अकोला में बैंक लॉकर से 1 करोड़ का सोना गायब, क्लीनर ने डुप्लीकेट चाबी से चुराया 715 ग्राम गोल्ड

अकोला में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के लॉकर से 715.044 ग्राम सोना गायब होने का मामला सामने आया है. बैंक के क्लीनर पर डुप्लीकेट चाबी बनाकर सोना निकालने और फाइनेंस कंपनियों में मॉर्गेज कराने का आरोप है. पढ़ें पूरी कहानी.

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इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG) इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG)

धनंजय साबले

  • अकोला,
  • 03 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:01 PM IST

महाराष्ट्र के अकोला में बैंक लॉकर से करीब 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का सोना गायब होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. यह मामला सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की एमजी रोड शाखा से जुड़ा है. बैंक के लॉकर में रखे 715.044 ग्राम सोने के आभूषण कथित तौर पर गायब पाए गए. इनकी अनुमानित कीमत करीब 1 करोड़ 7 लाख 25 हजार 660 रुपये बताई जा रही है. मामले में बैंक के ही एक क्लीनर को गिरफ्तार किया गया है.

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पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी की पहचान 29 वर्षीय वैभव धनराज कोल्हे के तौर पर हुई है. वैभव बैंक में क्लीनर के पद पर काम करता था. इस मामले में सिटी कोतवाली पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज किया है. आरोपी को कोर्ट में पेश किए जाने के बाद अदालत ने उसे 4 सितंबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है. पुलिस अब उससे पूछताछ कर कथित चोरी और सोने से जुड़े पूरे लेन-देन का पता लगाने में जुटी है.

पुलिस की शुरुआती जांच में इस मामले में बैंक के लॉकर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं. सिटी कोतवाली पुलिस के थानेदार संजय गवई के मुताबिक, प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने कथित तौर पर लॉकर की डुप्लीकेट चाबी तैयार की. इसी चाबी की मदद से उसने लॉकर तक पहुंच बनाई और उसमें रखा 700 ग्राम से ज्यादा सोना निकाल लिया.

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हालांकि अभी यह साफ नहीं हुआ है कि डुप्लीकेट चाबी कब और कैसे तैयार की गई थी. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी को लॉकर तक पहुंच किस तरह मिली और क्या उसने बैंक में अपनी नौकरी का फायदा उठाया. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि लॉकर खोलने और सोना निकालने के दौरान आरोपी अकेला था या किसी अन्य व्यक्ति ने उसकी मदद की.

इस कथित वारदात का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपी ने सोने के आभूषणों को सीधे बेचने के बजाय कथित तौर पर अलग-अलग फाइनेंस कंपनियों में मॉर्गेज कराया. पुलिस के अनुसार, सोने के बदले इन कंपनियों से रकम हासिल की गई. आरोप है कि इस रकम को आरोपी ने अपने बैंक खाते में जमा कराया.

अब पुलिस उन सभी फाइनेंस कंपनियों और उनसे जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है. जांच में यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि 715.044 ग्राम सोने में से कितना सोना किस कंपनी में मॉर्गेज कराया गया. साथ ही पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इसके बदले कितनी रकम मिली और वह रकम किन बैंक खातों में ट्रांसफर या जमा की गई.

यह पूरा मामला सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय प्रमुख पंकजकुमार कमलाप्रसाद श्रीवास्तव की शिकायत के बाद पुलिस तक पहुंचा. शिकायत मिलने के बाद सिटी कोतवाली पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. प्राथमिक जांच में बैंक लॉकर में रखे सोने के आभूषणों में कथित गड़बड़ी सामने आई, जिसके बाद आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की गई.

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पुलिस ने आरोपी वैभव कोल्हे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(4) और 318(4) के तहत मामला दर्ज किया है. पुलिस अब केस से जुड़े दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और आरोपी के बैंक खातों की जांच कर रही है. इसके साथ ही सोने की बरामदगी के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं.

पुलिस के मुताबिक, बैंक में डिमांड लोन से जुड़े कुछ लेन-देन में भी कथित अनियमितता सामने आई थी. इसी मामले की जांच के दौरान बैंक लॉकर में रखे सोने के आभूषणों को लेकर भी गड़बड़ी का पता चला. अब जांच एजेंसियां दोनों मामलों के बीच संभावित कनेक्शन तलाश रही हैं.

पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि डिमांड लोन से जुड़े कथित संदिग्ध लेन-देन और लॉकर से गायब हुए सोने के बीच कोई संबंध है या नहीं. इसके लिए बैंक के रिकॉर्ड, लेन-देन और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है. पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है.

इस मामले में पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरोपी ने लॉकर की डुप्लीकेट चाबी अकेले तैयार की या उसे किसी दूसरे व्यक्ति की मदद मिली. इसके अलावा लॉकर तक उसकी पहुंच कैसे हुई और बैंक की सुरक्षा व्यवस्था को कथित तौर पर चकमा देकर 715 ग्राम से ज्यादा सोना बाहर कैसे निकाला गया, इसकी भी जांच हो रही है.

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पुलिस यह भी पता लगा रही है कि कथित तौर पर निकाला गया सोना किन-किन फाइनेंस कंपनियों में मॉर्गेज कराया गया. उसके बदले कितनी रकम हासिल हुई और वह रकम किन खातों में जमा की गई, इसका भी रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है. जांच के दौरान पुलिस सीसीटीवी फुटेज, बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन समेत दूसरे सबूतों को भी खंगाल सकती है.

फिलहाल आरोपी वैभव धनराज कोल्हे पुलिस रिमांड पर है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है. पुलिस का फोकस कथित तौर पर गायब हुए 715.044 ग्राम सोने की बरामदगी पर है. इसके साथ ही फाइनेंस कंपनियों में हुए मॉर्गेज और आरोपी के बैंक खातों में जमा रकम की भी पड़ताल की जा रही है.

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस कथित वारदात में आरोपी के अलावा कोई और व्यक्ति शामिल था या नहीं. अगर जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है. फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती सोने की बरामदगी और पूरे कथित वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ना है.

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