मौत के बाद बीते 5 दिन, पोस्टमार्टम से कई खुलासे... कब सुलझेगी प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी की डेथ मिस्ट्री?

वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत मामले में पुलिस आत्महत्या के एंगल से जांच कर रही है. परिवार ने CBI और संतों ने SIT जांच की मांग की है. पढ़ें सिलसिलेवार पूरी कहानी.

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इस मामले में पुलिस की जांच जारी है (फोटो-ITG) इस मामले में पुलिस की जांच जारी है (फोटो-ITG)

मदन गोपाल शर्मा

  • मथुरा,
  • 30 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:40 PM IST

मथुरा के वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य बताए जा रहे रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत का मामला कई सवाल खड़े कर रहा है. 25 सितंबर की सुबह गुरु कृपा कुंज अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई. पुलिस की शुरुआती जांच और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है. लेकिन पांच दिन बीत जाने पर भी रसिक दुलारी शरण की मौत एक मिस्ट्री बनी हुई है.

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हालांकि, मौत से पहले शरीर के निजी अंग पर गंभीर चोट मिलने और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद मामले की जांच कई सवालों के बीच चल रही है. परिवार ने निष्पक्ष जांच के लिए CBI जांच की मांग की है, जबकि संत समाज भी SIT या उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहा है.

25 सितंबर 2026 

शुक्रवार की सुबह करीब 10:25 बजे रसिक दुलारी शरण अपने कमरे से बाहर निकलते हुए सीसीटीवी में दिखाई दिए. पुलिस के मुताबिक, उनके कपड़ों पर खून लगा हुआ था. इसके बाद वह कुछ देर चलते हुए अपार्टमेंट की चौथी मंजिल की छत पर पहुंचे. जांच के मुताबिक, करीब 10:36 बजे उन्होंने छत से नीचे छलांग लगा दी. गिरने के बाद उन्हें आश्रम से जुड़े लोग गंभीर हालत में अस्पताल लेकर पहुंचे.

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दीपक को सर्वोदय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. इसके बाद पुलिस को घटना की जानकारी दी गई और जांच शुरू हुई. घटना वृंदावन के वराह घाट मार्ग स्थित गुरु कृपा कुंज अपार्टमेंट से जुड़ी है. पुलिस अब कमरे से लेकर छत और फिर अस्पताल तक के पूरे घटनाक्रम को सीसीटीवी और दूसरे साक्ष्यों के जरिए जोड़ने की कोशिश कर रही है.

कमरे से मिला इलेक्ट्रिक ग्राइंडर

जांच आगे बढ़ी तो दीपक के कमरे से एक इलेक्ट्रिक टाइल्स ग्राइंडर यानी कटिंग मशीन बरामद होने की बात सामने आई. पुलिस के मुताबिक, उनके निजी अंग पर गंभीर चोट के तथ्य भी जांच में सामने आए. मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि चौथी मंजिल से छलांग लगाने से पहले उन्होंने ग्राइंडर से अपने निजी अंग को नुकसान पहुंचाया था. हालांकि, पुलिस अभी इस पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की जांच कर रही है.

पुलिस उपाधीक्षक (DSP) वृंदावन संदीप कुमार के मुताबिक, पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दीपक ने खुद को ग्राइंडर से चोट पहुंचाई थी या इसके पीछे कोई दूसरी वजह थी. इस सवाल का जवाब फोरेंसिक जांच और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही सामने आ सकेगा. पुलिस ने कमरे से मिले सामान और अन्य साक्ष्यों को जांच में शामिल किया है.

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट में से खुलासा!

29 सितंबर को सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की मुख्य वजह अत्यधिक खून बहने से लगा शॉक यानी Hemorrhagic Shock बताई गई. रिपोर्ट में सिर पर गंभीर चोट का उल्लेख है, जिस पर 14 टांके लगाए गए थे. निचले होंठ और ठुड्डी पर भी गहरे कट के निशान बताए गए हैं. टखने की हड्डी टूटने और निजी अंग के जड़ वाले हिस्से पर 5 टांके के निशान की बात भी रिपोर्ट में दर्ज है.

अंदरूनी जांच में खोपड़ी के पीछे हेयरलाइन फ्रैक्चर और खून का थक्का मिला. रिपोर्ट के मुताबिक, छाती की बाईं तरफ पांचवीं से आठवीं पसलियां टूटी हुई थीं और बायां फेफड़ा भी फटा हुआ पाया गया. रिपोर्ट में शरीर का निजी अंग अलग पाए जाने की बात भी दर्ज है. पुलिस इन चोटों को घटना के पूरे क्रम के साथ जोड़कर देख रही है.

परिवार को ऐसे मिली घटना की जानकारी

दीपक के परिवार के मुताबिक, उन्हें फोन के जरिए बताया गया था कि वह गिर गए हैं और उनकी हालत गंभीर है. परिजनों को यह भी बताया गया कि अस्पताल में ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है. इसके बाद मध्य प्रदेश के जबलपुर से परिवार के लोग वृंदावन के लिए रवाना हुए. परिजनों के मुताबिक, वे रात करीब 3 बजे आश्रम पहुंचे.

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परिवार का आरोप है कि आश्रम पहुंचने के बाद उन्हें दीपक के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई. उनका कहना है कि उनसे बाहर बैठने के लिए कहा गया और वे सुबह तक इंतजार करते रहे. परिवार के मुताबिक, करीब 8 बजे तक वे वहां मौजूद रहे और इसके बाद करीब 9 बजे वहां से निकल गए. इस पूरे घटनाक्रम को लेकर परिवार सवाल उठा रहा है कि उन्हें सही जानकारी मिलने में इतना समय क्यों लगा.

परिवार का बड़ा दावा

परिजनों का कहना है कि दीपक वर्ष 2024 से वृंदावन में रह रहे थे. परिवार के मुताबिक, शुरुआती समय में वे दीपक से मिल पाते थे, लेकिन बाद में उनसे मिलना मुश्किल हो गया. परिवार का दावा है कि गुरु दीक्षा लेने के बाद दीपक से मिलने के लिए उन्हें कई बार इंतजार करना पड़ता था. कुछ मौकों पर परिवार के लोग आश्रम में कई घंटे तक इंतजार करने के बावजूद उनसे नहीं मिल पाए.

दीपक के जीजा सोनू पटेल के मुताबिक, परिवार के लोगों ने उनसे संपर्क बनाए रखने की कई कोशिशें की थीं. परिजनों का कहना है कि वे कई बार वृंदावन आए और दीपक से मिलने की कोशिश की, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी. परिवार के मुताबिक, एक समय दीपक परिवार से सामान्य रूप से बातचीत करते थे, लेकिन बाद में संपर्क काफी सीमित हो गया. हालांकि, आश्रम की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक पक्ष इस इनपुट में उपलब्ध नहीं है.

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परिवार को नहीं लगा था कि ऐसा होगा!

परिजनों का कहना है कि दीपक की मानसिक स्थिति को लेकर उन्हें कभी ऐसा नहीं लगा कि वह आत्महत्या जैसा कदम उठा सकते हैं. परिवार के मुताबिक, वह उनके लिए सामान्य था और उसने कभी इस तरह की कोई बात नहीं कही थी. परिवार का कहना है कि घर में भी ऐसी कोई परिस्थिति नहीं थी जिससे उन्हें दीपक के इस तरह का कदम उठाने की आशंका होती.

परिवार ने यह भी बताया कि दीपक कुछ लोगों से ऐसी बातें करता था, जिनसे उन्हें लगता था कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है. हालांकि, परिवार के पास इस बात की स्पष्ट जानकारी नहीं है कि दीपक किस घटना या परेशानी की ओर इशारा कर रहा था. अब परिवार चाहता है कि उसकी कही गई बातों, मोबाइल चैट और डायरी समेत सभी संभावित साक्ष्यों की जांच की जाए.

आश्रम की भूमिका पर भी परिवार ने उठाए सवाल

परिवार का आरोप है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद जब वे रात में आश्रम पहुंचे तो उन्हें काफी देर तक स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई. परिजनों का यह भी कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि आश्रम की ओर से कोई व्यक्ति उनके पास आएगा और घटना के बारे में जानकारी देगा. परिवार का दावा है कि ऐसा नहीं हुआ.

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परिजनों ने यह भी कहा कि दीपक की मौत के बाद आश्रम की ओर से कोई व्यक्ति उनसे मिलने या संवेदना जताने के लिए नहीं आया. हालांकि, इन आरोपों पर आश्रम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया इस उपलब्ध इनपुट में नहीं है. इसलिए इन बातों को परिवार के आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है.

कौन था रसिक दुलारी शरण?

रसिक दुलारी शरण का वास्तविक नाम दीपक लोधी था. वह मध्य प्रदेश के जबलपुर का रहने वाला था. परिवार के मुताबिक, वह नर्मदा परिक्रमा के बाद वृंदावन पहुंचा और संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़ गया. वर्ष 2024 से वह वृंदावन में रह रहा था. उसे संत प्रेमानंद महाराज का शिष्य बताया गया है.

परिवार के मुताबिक, वृंदावन में रहने के बाद धीरे-धीरे उसका संपर्क परिवार से कम होता गया. एक बार वृंदावन आने के बाद दीपक जबलपुर वापस भी गया था, लेकिन करीब दो साल पहले दोबारा वृंदावन आने के बाद वह घर नहीं लौटा. परिवार का कहना है कि इसके बाद उनसे मिलना भी मुश्किल हो गया था.

सीसीटीवी और मोबाइल की जांच

पुलिस का कहना है कि शुरुआती सीसीटीवी फुटेज में दीपक के चौथी मंजिल की छत से नीचे कूदने की पुष्टि होती है. CO संजीव कुमार के मुताबिक, शुरुआती तौर पर मामला आत्महत्या से जुड़ा है. हालांकि, परिवार की शिकायत के बाद पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है.

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पुलिस ने अपार्टमेंट का DVR, मृतक का मोबाइल फोन, खून के सैंपल और दूसरे साक्ष्य फोरेंसिक लैब भेजे हैं. पुलिस को उम्मीद है कि मोबाइल में मौजूद चैट, फोटो या अन्य डिजिटल साक्ष्यों से घटना से पहले की स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है. पुलिस ने मृतक की डायरी और दूसरे सामान को भी जांच में शामिल किया है.

संत समाज ने भी उठाई उच्च स्तरीय जांच की मांग

दीपक की मौत के बाद वृंदावन के साधु-संतों में भी नाराजगी सामने आई. परिक्रमा मार्ग स्थित ललित कुंज आश्रम में धर्म रक्षा संघ के बैनर तले साधु-संतों की बैठक हुई. बैठक में मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की गई. संतों ने सवाल उठाया कि यह आत्महत्या है या इसके पीछे कोई और वजह, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

महंत मोहिनी शरण महाराज ने कहा कि युवा साधु की मौत दुखद है और प्रशासन को इस मामले में उच्च स्तरीय जांच गठित करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो संत समाज आंदोलन कर सकता है. वहीं, बैठक में महंत गंगादास जी महाराज ने भी घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए और कार्रवाई की मांग की. उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस इनपुट में उपलब्ध नहीं है.

अब SIT और CBI जांच की मांग

अब मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है. इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर SIT या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है. दूसरी तरफ, दीपक के परिजनों ने CBI से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. परिवार का कहना है कि घटना की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए.

पुलिस फिलहाल आत्महत्या के एंगल से जांच कर रही है, लेकिन साथ ही दूसरे पहलुओं को भी जांच में शामिल किया गया है. मोबाइल चैट, डायरी, CCTV फुटेज, DVR, फोरेंसिक सैंपल और मृतक के साथियों से पूछताछ के जरिए पुलिस घटनाक्रम को समझने की कोशिश कर रही है. इस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 25 सितंबर की सुबह दीपक के साथ आखिर क्या हुआ था.

जांच में सबसे बड़े सवाल!

इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि दीपक के कमरे में क्या हुआ था और निजी अंग पर गंभीर चोट किस परिस्थिति में लगी. दूसरा सवाल यह है कि कमरे से निकलने और चौथी मंजिल की छत तक पहुंचने के बीच क्या-क्या हुआ. तीसरा सवाल यह है कि घटना से पहले उनके मोबाइल, चैट और डायरी में क्या जानकारी मौजूद थी.

इसके अलावा परिवार की ओर से आश्रम में मुलाकात न होने और घटना की जानकारी मिलने में देरी को लेकर लगाए गए आरोपों की भी जांच की जरूरत बताई जा रही है. पुलिस का शुरुआती निष्कर्ष आत्महत्या की ओर इशारा करता है, लेकिन परिवार और संत समाज स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं. फिलहाल मामले में फोरेंसिक जांच और पुलिस की आगे की पड़ताल के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी.

दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण का अंतिम संस्कार परिजनों की मौजूदगी में वृंदावन में ही किया जा चुका है. अब पुलिस की जांच का फोकस इस बात पर है कि घटना से पहले कमरे में क्या हुआ, चोटें कैसे लगीं और उसके बाद वह छत तक कैसे पहुंचे. परिवार CBI जांच की मांग कर रहा है, जबकि संत समाज SIT या उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच चाहता है. ऐसे में इस मामले में आगे आने वाले फोरेंसिक और डिजिटल साक्ष्य अहम माने जा रहे हैं. 

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