मोबाइल फोन पर सिर्फ स्टेप्स में मिलने वाला क्विक लोन (Quick Loan) भले ही मुश्किल वक्त में राहत जैसा लगे, लेकिन यही सुविधा बाद में बड़ा झटका भी दे सकती है. बिना जांच-पड़ताल किए किसी लोन ऐप को Aadhaar, PAN, बैंक अकाउंट या दूसरी निजी जानकारी देना आपके पैसे के साथ-साथ संवेदनशील डेटा को भी खतरे में डाल सकता है. इसलिए डिजिटल लोन लेते समय पहला सवाल यह नहीं होना चाहिए कि पैसा कितनी जल्दी मिलेगा, बल्कि यह होना चाहिए कि लोन देने वाला असली और भरोसेमंद है या नहीं.
मुसीबत अक्सर वहीं से शुरू होती है, जहां क्विक कैश का ऑफर बेहद आसान और भरोसेमंद नजर आता है. फर्जी या नुकसान पहुंचाने वाले लोन ऐप खुद को असली लेंडर की तरह पेश करके ग्राहकों को आकर्षित करते हैं. कभी कम ब्याज पर लोन देने का दावा किया जाता है, तो कभी लोन मिलने के बाद फीस और दूसरे शुल्क जुड़ने से चुकाने वाली रकम उम्मीद से काफी ज्यादा हो जाती है. ऐसे में केवल ऐप के आसान इंटरफेस या जल्दी अप्रूवल के भरोसे लोन लेना जोखिम भरा हो सकता है.
सबसे पहले पहचानें असली लेंडर
मान लीजिए किसी छात्र को अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है. मिनटों में लोन देने वाला App उसे तुरंत आकर्षित कर सकता है. मोबाइल नंबर, Aadhaar और PAN जैसी जानकारी देने के बाद प्रक्रिया भी आसान लग सकती है. लेकिन यहीं रुककर लेंडर की पहचान जांचना बेहद जरूरी है. मणिपाल फिनटेक की CEO पूजा अभिषेक सिंह के मुताबिक, लेंडर की पहचान स्पष्ट न होना, सीमित जानकारी उपलब्ध होना और बिना उचित क्रेडिट असेसमेंट के लोन मंजूर होना बड़े रेड फ्लैग हैं.
App Store पर मौजूद होना ही काफी नहीं
किसी ऐप का Google Play Store या दूसरे ऐप स्टोर पर उपलब्ध होना अपने आप में उसकी विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है. डाउनलोड करने से पहले डेवलपर का नाम, ऐप का विवरण, प्राइवेसी पॉलिसी, कस्टमर सपोर्ट की जानकारी और हाल के यूजर रिव्यू जरूर जांचें. इसके अलावा ऐप में दी गई कंपनी की जानकारी को उसकी आधिकारिक वेबसाइट से मिलाएं. अगर नाम, कंपनी की डिटेल या संपर्क जानकारी में अंतर नजर आए, तो सावधान हो जाएं.
भारतीय रिजर्व बैंक से लेंडर को करें वेरिफाई
डिजिटल लोन लेते समय सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि वास्तव में पैसा कौन दे रहा है. जिस बैंक या NBFC के नाम पर लोन दिया जा रहा है, उसका सही नाम और रेगुलेटेड स्टेटस जांचना जरूरी है. पूजा अभिषेक सिंह के मुताबिक, यह भी देखना चाहिए कि ऐप किसी रेगुलेटेड बॉडी से जुड़ा है या नहीं. इसके लिए RBI के आधिकारिक स्रोतों और डिजिटल लेंडिंग ऐप्स डायरेक्टरी में उपलब्ध जानकारी की जांच की जा सकती है.
जरूरत से ज्यादा परमिशन मांगे तो सतर्क रहें
लोन ऐप अगर आपके फोन के कॉन्टैक्ट्स, कॉल लॉग, मीडिया फाइल्स या दूसरी निजी जानकारी का एक्सेस मांगता है, तो बिना वजह समझे अनुमति न दें. KYC के लिए कैमरा या कुछ जरूरी परमिशन की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन हर जानकारी मांगने को सामान्य नहीं मानना चाहिए. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, किसी भी परमिशन के मामले में तीन चीजें महत्वपूर्ण हैं- वह क्यों मांगी जा रही है, वास्तव में कितनी जरूरी है और इसकी जानकारी ग्राहक को कितनी स्पष्टता से दी गई है.
सिर्फ कम इंटरेस्ट देखकर मत करें फैसला
किसी लोन का ऑफर आकर्षक लग रहा हो तो इंटरेस्ट रेट देखकर फैसला न लें. लोन की वास्तविक लागत समझने के लिए APR यानी Annual Percentage Rate, प्रोसेसिंग फीस, अन्य चार्ज, रीपेमेंट शेड्यूल, लोन की अवधि और कुल चुकाई जाने वाली रकम को ध्यान से देखें. कम ब्याज दर का दावा होने के बावजूद अतिरिक्त फीस और दूसरे शुल्क कुल लागत को काफी बढ़ा सकते हैं.
'Accept' दबाने से पहले 5 मिनट जांच करें
डिजिटल लोन लेने से पहले कुछ मिनट की सावधानी आपको बड़े वित्तीय और डेटा जोखिम से बचा सकती है. ऐप की जानकारी को आधिकारिक वेबसाइट से मिलाएं, लेंडर की पहचान वेरिफाई करें, प्राइवेसी पॉलिसी पढ़ें और समझें कि आपकी कौन-सी जानकारी क्यों ली जा रही है. खुद या परिवार से जुड़ी संवेदनशील जानकारी केवल आधिकारिक और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म पर ही साझा करें. रियल और ट्रांसपेरेंट लेंडर को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह कौन-सा डेटा ले रहा है, उसकी जरूरत क्यों है और उसका इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा.
क्विक लोन की सुविधा तभी फायदेमंद है जब उसके पीछे मौजूद लेंडर भी भरोसेमंद हो. इसलिए अगली बार किसी लोन ऐप पर 'Accept' बटन दबाने से पहले कुछ मिनट रुकें, लेंडर को Verify करें और लोन की सभी शर्तों को अच्छी तरह समझ लें. जल्दबाजी में लिया गया आसान लोन बाद में महंगा पड़ सकता है.
आजतक बिजनेस डेस्क