सोचिए, आपकी कमाई इतनी भी नहीं कि इनकम टैक्स देना पड़े, लेकिन अचानक आपके पास करोड़ों रुपये की कमाई का हिसाब मांगने वाला नोटिस आ जाए. वजह यह हो कि आपके पैन कार्ड (PAN) पर किसी दूसरी कंपनी के करोड़ों रुपये के लेनदेन दर्ज हों. ऐसी स्थिति में न सिर्फ टैक्स की मांग, बल्कि जुर्माने और कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है. दिल्ली में एक कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी के साथ ऐसा ही हुआ.
हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने सबूतों की कमी के चलते उसके खिलाफ करीब 4 करोड़ रुपये की टैक्स डिमांड रद्द कर दी. आयकर विभाग ने होटल अशोका में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कुक ललित के पैन से 24.62 करोड़ रुपये का कैश सेल्स का रिकॉर्ड ट्रेस किया था. यह लेनदेन पैकेजिंग मैटेरियल का कारोबार करने वाली एक कंपनी से जुड़ा था. ललित ने इन लेनदेन से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया.
उन्होंने आइडेंटिटी थेफ्ट (पहचान की चोरी) की शिकायत भी दर्ज कराई. आइडेंटिटी थेफ्ट तब होती है जब कोई व्यक्ति आपकी निजी, वित्तीय या सरकारी जानकारी जैसे कि नाम, पासवर्ड, बैंक खाता नंबर या आधार-पैन कार्ड की जानकारी आपकी अनुमति के बिना चुरा लेता है और इसका उपयोग अवैध खरीद, धोखाधड़ी या अपराध की आय अर्जित करने के लिए करता है. यह मामला बताता है कि पैन का गलत इस्तेमाल होने पर टैक्स रिकॉर्ड में गड़बड़ी कैसे बड़ी परेशानी बन सकती है. आइए जानते हैं ऐसी स्थिति में टैक्सपेयर्स को क्या करना चाहिए...
कैसे बनी ₹4 करोड़ की टैक्स देनदारी?
रिपोर्ट के मुताबिक, ललित को 26 फरवरी 2024 को आयकर विभाग का नोटिस मिला था. इसमें आरोप लगाया गया कि उन्होंने एक पैकेजिंग मैटेरियल कंपनी के जरिए 24.62 करोड़ रुपये की नकद ब्रिकी की है. नकद बिक्री (Cash Sales) वह व्यापारिक लेनदेन है जिसमें ग्राहक सामान या सेवा खरीदने के ठीक उसी समय कैश, चेक, डेबिट/क्रेडिट कार्ड या किसी अन्य डिजिटल माध्यम से पूरा भुगतान कर देता है. इसमें किसी प्रकार के उधार (Credit) की कोई गुंजाइश नहीं होती है.
आयकर विभाग ने इस कथित लेनदेन के आधार पर ललित से करीब 4 करोड़ रुपये का टैक्स और अपनी आय कम दिखाने के लिए जुर्माना मांगा. वास्तव में ललित की कमाई इतनी कम थी कि वह इनकम टैक्स ब्रैकेट में भी नहीं आते थे. जब उन्होंने अपना फॉर्म 26एएस (Form 26AS) चेक किया, तो उसमें उनके पैन के साथ कथित नकद बिक्री का रिकॉर्ड मिला. इस रकम पर एक फीसदी टीडीएस (Tax Deducted at Source) भी दर्ज था.
ललित ने दावा किया कि उन्होंने न तो इतनी बड़ी रकम का कोई कारोबार किया और न ही उनका पैकेजिंग कंपनी से कोई संबंध था. इसके बाद उन्होंने दिल्ली के ग्रेटर कैलाश पुलिस स्टेशन और साकेत स्थित दिल्ली पुलिस की साइबर सेल में पहचान चोरी की शिकायतें दर्ज कराईं.
पैन कार्ड कैसे होता है गलत इस्तेमाल?
ललित के वकील ए.के. बब्बर के मुताबिक, उनके मुवक्किल ने होटल अशोका और विज्ञान भवन में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी के तौर पर काम किया था. नौकरी के दौरान सत्यापन के लिए उन्होंने ठेकेदारों को अपने पैन कार्ड की प्रतियां दी थीं. हालांकि, सिर्फ पैन कार्ड की कॉपी साझा करने से यह साबित नहीं होता कि उसका गलत इस्तेमाल हुआ. लेकिन अगर किसी दूसरे व्यक्ति या कंपनी ने आपके पैन का इस्तेमाल करके कारोबार किया है, तो टैक्स रिकॉर्ड में उसका असर दिखाई दे सकता है.
ऐसे में अपने टैक्स रिकॉर्ड की नियमित जांच करना जरूरी है. ललित के मामले में असेसिंग ऑफिसर ने उन्हें टैक्स की मांग चुकाने या संबंधित प्राधिकरण के सामने अपील करने का विकल्प दिया था. लेकिन अपील के लिए करीब 78 लाख रुपये जमा करने की शर्त उनके लिए बड़ी आर्थिक बाधा थी. इसके बाद मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा.
हाई कोर्ट ने रद्द की ₹4 करोड़ की टैक्स डिमांड?
दिल्ली हाई कोर्ट ने 6 अक्टूबर 2026 को ललित के खिलाफ टैक्स डिमांड रद्द कर दी. अदालत ने पाया कि आयकर विभाग ने मुख्य रूप से फॉर्म 26एएस और पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर आकलन किया था. लेकिन ऐसा कोई स्वतंत्र सबूत सामने नहीं रखा गया, जिससे कथित नकद बिक्री और ललित के बीच संबंध स्थापित होता. अदालत ने यह भी गौर किया कि आयकर विभाग कंपनी की स्वतंत्र जांच करने या उसके मालिक का बयान दर्ज करने की कार्रवाई साबित नहीं कर सका. इसके अलावा, एक ही लेनदेन के ग्रॉस और नेट आंकड़ों को दो बार गिनने की गड़बड़ी भी सामने आई.
अदालत ने ललित की नौकरी, उनकी आर्थिक स्थिति और उनके स्पष्टीकरण पर भी ध्यान दिया. इसमें प्रोविडेंट फंड (PF) की रकम निकालने और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) प्रमाणपत्र से जुड़ी जानकारी शामिल थी. कोर्ट ने माना कि इन तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए थी. हालांकि, अदालत ने भविष्य में नए सिरे से कार्रवाई की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं की. यदि लागू कानूनी समय-सीमा के भीतर कोई ठोस आपत्तिजनक सबूत सामने आता है, तो कानून के मुताबिक आगे की कार्यवाही की जा सकती है.
PAN का गलत इस्तेमाल ऐसे चेक करें
पैन कार्ड का गलत इस्तेमाल होने पर जरूरी नहीं कि आपको तुरंत इसकी जानकारी मिल जाए. कई बार इसका पता तब चलता है, जब टैक्स रिकॉर्ड में कोई अनजान लेनदेन दिखाई देता है या आयकर विभाग की ओर से नोटिस आता है. इसलिए समय-समय पर अपने टैक्स रिकॉर्ड की जांच करना जरूरी है.
1. फॉर्म 26एएस चेक करें
फॉर्म 26एएस में आपके पैन से जुड़ी टैक्स कटौती और जमा की गई टैक्स राशि समेत अन्य संबंधित जानकारी दिखाई देती है. इसमें किसी ऐसी रकम पर टीडीएस दर्ज है, जिससे आपका कोई संबंध नहीं है, तो उसकी जांच करें.
2. एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) देखें
आयकर विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध एआईएस में विभिन्न वित्तीय लेनदेन की जानकारी मिल सकती है. इसमें अनजान रसीद, बिक्री या अन्य बड़े वित्तीय लेनदेन दिखाई दें, तो संबंधित जानकारी और दस्तावेजों से उनका मिलान करें.
3. GST पोर्टल पर अपने पैन से जुड़ा रिकॉर्ड जांचें
जीएसटी पोर्टल पर 'Search by PAN' सुविधा के जरिए यह जांचा जा सकता है कि आपके पैन से कौन-कौन से जीएसटी रजिस्ट्रेशन जुड़े हैं. यदि कोई ऐसा कारोबार या रजिस्ट्रेशन दिखे, जिससे आपका कोई संबंध नहीं है, तो उसकी जानकारी जुटाएं और संबंधित अधिकारियों को शिकायत दें.
पैन के गलत इस्तेमाल का शक हो तो क्या करें?
अगर आपको अपने पैन से जुड़ी किसी संदिग्ध गतिविधि का पता चलता है, तो उसे नजरअंदाज न करें. सबसे पहले संबंधित रिकॉर्ड की कॉपी या स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें और उपलब्ध दस्तावेजों से उसकी जांच करें.
पुलिस और साइबर सेल में शिकायत करें: यदि पहचान चोरी या पैन के अनधिकृत इस्तेमाल का संदेह है, तो संबंधित पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम प्राधिकरण में शिकायत दर्ज कराएं.
आयकर विभाग को लिखित जानकारी दें: संबंधित टैक्स अधिकारी को बताएं कि विवादित लेनदेन आपका नहीं है. शिकायत के साथ उपलब्ध दस्तावेज और पुलिस शिकायत की प्रति लगाएं.
सैलरी और बैंक रिकॉर्ड सुरक्षित रखें: बैंक स्टेटमेंट, वेतन पर्ची, नौकरी से जुड़े दस्तावेज और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड संभालकर रखें. जरूरत पड़ने पर ये आपकी वास्तविक आर्थिक स्थिति स्पष्ट करने में मदद कर सकते हैं.
टैक्स नोटिस का समय पर जवाब दें: नोटिस को अनदेखा न करें. तय समय-सीमा के भीतर जवाब देकर विभाग से उस लेनदेन के समर्थन में उपलब्ध साक्ष्य मांगें.
जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लें: यदि विभाग आपकी आपत्ति पर ध्यान नहीं देता या टैक्स डिमांड को लेकर विवाद बना रहता है, तो टैक्स विशेषज्ञ या वकील से अपील और अन्य कानूनी विकल्पों पर सलाह लें.
टैक्स रिकॉर्ड की नियमित जांच क्यों जरूरी है?
ललित का मामला बताता है कि पैन से जुड़ी गलत जानकारी टैक्सपेयर को बड़ी आर्थिक और कानूनी परेशानी में डाल सकती है. हालांकि, हर अनजान एंट्री का मतलब धोखाधड़ी नहीं होता. रिकॉर्ड में गलती या जानकारी के मिलान से जुड़ी समस्या भी हो सकती है. इसलिए पहले तथ्य जांचना, जरूरी दस्तावेज जुटाना और संबंधित विभाग को समय पर जानकारी देना अहम है. ध्यान रखें कि आपके पैन कार्ड का इस्तेमाल कहां और किस उद्देश्य से हो रहा है. फॉर्म 26एएस और एआईएस की नियमित जांच करने से संदिग्ध लेनदेन का समय रहते पता चल सकता है.
आजतक बिजनेस डेस्क