भारत का होम इंटीरियर बाजार अब बड़े महानगरों से आगे निकलकर छोटे शहरों में भी तेजी से विस्तार कर रहा है. टियर-2 शहरों में परिवार डिजाइन आधारित और मॉड्यूलर घरों पर पहले की तुलना में तेजी से अधिक खर्च कर रहे हैं. Deloitte की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में टियर-2 शहरों के परिवारों ने एक घर के इंटीरियर पर औसतन 3.9 लाख रुपये खर्च किए. यह टियर-1 शहरों में होने वाले औसत खर्च का करीब 74% है.
यह आंकड़ा भारत के छोटे शहरों में बदलते उपभोग के रुझान की ओर इशारा करता है. बढ़ती आकांक्षाएं, आवासीय विकास और डिजाइन से जुड़े नए ट्रेंड्स की बढ़ती जानकारी लोगों को अपने घरों की साज-सज्जा पर अधिक खर्च करने के लिए प्रेरित कर रही है. Deloitte के मुताबिक, टियर-2 शहरों में इंटीरियर बाजार टियर-1 शहरों की तुलना में लगभग दोगुनी तेजी से बढ़ रहा है, इसमें मॉड्यूलर और डिजाइन आधारित घरों की बढ़ती मांग की अहम भूमिका है.
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टियर-2 शहरों के घरों में औसतन 3.9 लाख रुपये का खर्च
इंटीरियर पर बढ़ता खर्च इस बात को दर्शाता है कि भारतीय परिवार अब घर को बेहतर बनाने को किस नजर से देख रहे हैं, इंटीरियर को अब सिर्फ एक बार किया जाने वाला खर्च नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आराम, खूबसूरती, उपयोगिता और जीवनशैली से जुड़ा निवेश माना जा रहा है.
Deloitte का अनुमान है कि उपभोक्ता अपने घर की कुल कीमत का करीब 10-15% हिस्सा इंटीरियर पर खर्च कर रहे हैं. वहीं, 2025 में लग्जरी डेकोर की खरीदारी में 2024 की तुलना में सालाना आधार पर 300% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, इससे पता चलता है कि घर से जुड़े खर्च में सजावट और खूबसूरती का महत्व लगातार बढ़ रहा है.
खरीदारी के तरीके में भी यह बदलाव दिखाई दे रहा है. 2025 में स्टोरेज, किचन यूटिलिटीज, ऑर्गनाइजर और लाइटिंग जैसी श्रेणियों में 2024 की तुलना में फर्नीचर के मुकाबले लेनदेन की तीव्रता दोगुनी रही. अलग-अलग श्रेणियों के उत्पादों को एक साथ खरीदने का चलन भी बढ़ा है, उदाहरण के लिए, वॉल आर्ट और वॉल एक्सेंट या मॉड्यूलर उत्पादों की संयुक्त खरीद में 62% की वृद्धि हुई.
छोटे शहरों में तेजी से कम हो रहा उपभोग का अंतर
टियर-2 शहरों में इंटीरियर बाजार का विस्तार इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन बाजारों में खर्च अब सिर्फ सामान्य फर्नीचर या जरूरी बदलावों तक सीमित नहीं रह गया है, उपभोक्ता अब मॉड्यूलर किचन, अपनी जरूरत के अनुसार तैयार किए गए फर्नीचर, बेहतर लाइटिंग, ज्यादा और बेहतर स्टोरेज तथा डिजाइन पर केंद्रित समाधान चाहते हैं.
2030 तक 260 अरब डॉलर का हो सकता है होम और घरेलू सामान बाजार
बड़े बाजार की तस्वीर देखें तो भारत का होम और घरेलू सामान क्षेत्र अगले पांच वर्षों में 1.6 गुना बढ़ने का अनुमान है. 2030 तक इसके 260 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. फर्नीचर और फर्निशिंग का बाजार अकेले 2025 के 39 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 67 अरब डॉलर होने का अनुमान है.
वहीं, इंटीरियर सेवाओं का बाजार भी 2025 के 4 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 8 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. कुल मिलाकर, ये आंकड़े बताते हैं कि घरों की साज-सज्जा और इंटीरियर अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित बाजार नहीं रह गया है.
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