रियल एस्टेट में विदेशी निवेशकों ने खींचे हाथ, अब घरेलू निवेशकों के भरोसे बाजार

विदेशी निवेशकों के सतर्क रहने के बीच घरेलू पूंजी इस सेक्टर के लिए अहम बनी रह सकती है. वहीं, वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता कम होने पर विदेशी निवेश में दोबारा बढ़ोतरी की गुंजाइश बन सकती है.

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NCR बना निवेशकों की पहली पसंद (Photo-ITG) NCR बना निवेशकों की पहली पसंद (Photo-ITG)

आदित्य के. राणा

  • नई दिल्ली ,
  • 28 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:38 PM IST

भारतीय रियल एस्टेट में प्राइवेट इक्विटी (PE) निवेश को बड़ा झटका लगा है. 2026 के पहले 9 महीनों में इस सेक्टर में निवेश सालाना आधार पर 31% घटकर 1.66 अरब डॉलर रह गया. पिछले साल इसी अवधि में ये आंकड़ा 2.41 अरब डॉलर था.

हालांकि, निवेश की कुल रकम घटने के बावजूद सौदों की संख्या 24 से बढ़कर 31 हो गई यानी निवेशकों ने ज्यादा सौदे किए, लेकिन इस बार बड़े निवेश वाले सौदों की कमी रही. रियल एस्टेट कंसल्टेंसी कंपनी Knight Frank India की Q3 2026 कैपिटल मार्केट रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान भारतीय निवेशकों की हिस्सेदारी में बड़ी बढ़ोतरी हुई है.

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2025 के पहले 9 महीनों में कुल प्राइवेट इक्विटी निवेश में घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी 25% थी, जो 2026 की इसी अवधि में बढ़कर 85% हो गई. दूसरी तरफ, विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 75% से घटकर 15% रह गई.

6 साल के निचले स्तर पर पहुंचा निवेश

रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के पहले 9 महीनों में रियल एस्टेट में प्राइवेट इक्विटी निवेश पिछले 6 साल के सबसे निचले स्तर पर रहा. इसकी बड़ी वजह बड़े निवेश वाले सौदों की कमी रही. इस दौरान औसत घोषित डील साइज भी 47% घटकर 5.3 करोड़ डॉलर रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह करीब 10 करोड़ डॉलर था. साल की तीसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर 2026 में भी निवेश में गिरावट दर्ज की गई.

इस दौरान रियल एस्टेट में प्राइवेट इक्विटी निवेश सालाना आधार पर 43% घटकर 53 करोड़ डॉलर रहा. हालांकि, सौदों की संख्या 12 से बढ़कर 15 हो गई. इससे साफ है कि सौदों की संख्या बढ़ने के बावजूद निवेश की कुल रकम में गिरावट आई.

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ऑफिस प्रॉपर्टी में निवेशकों की सबसे ज्यादा दिलचस्पी

रियल एस्टेट के अलग-अलग सेगमेंट में ऑफिस प्रॉपर्टी निवेशकों की पहली पसंद बनी रही. जनवरी से सितंबर 2026 के बीच ऑफिस सेगमेंट में 1.18 अरब डॉलर का प्राइवेट इक्विटी निवेश आया. ये कुल निवेश का करीब 71% था. हालांकि, पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले ऑफिस प्रॉपर्टी में निवेश 19% घटा है. ऑफिस सेगमेंट में निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा तैयार यानी रेडी प्रॉपर्टी में आया. कुल ऑफिस निवेश में ऐसी प्रॉपर्टी की हिस्सेदारी 78% रही, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ये 49% थी. वहीं, ऑफिस सेगमेंट में 88% पूंजी इक्विटी के जरिए लगाई गई.

रेडी ऑफिस प्रॉपर्टी में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी की वजह इनसे मिलने वाली आमदनी और निर्माण से जुड़े जोखिम का कम होना है. जब कोई प्रॉपर्टी पहले से तैयार होती है, तो निवेशकों के लिए किराये से होने वाली संभावित कमाई का आकलन करना आसान होता है. इसके मुकाबले निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में देरी और लागत बढ़ने जैसे जोखिम रहते हैं.

रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी में निवेश घटा, कर्ज का बड़ा रोल

रेजिडेंशियल रियल एस्टेट में प्राइवेट इक्विटी निवेश भी घटा है. जनवरी-सितंबर 2026 के दौरान इस सेगमेंट में 32 करोड़ डॉलर का निवेश आया, जो पिछले साल की इसी अवधि के 48 करोड़ डॉलर से 33% कम है. इस निवेश की सबसे खास बात ये रही कि 97% रकम डेट और स्ट्रक्चर्ड क्रेडिट के जरिए आई यानी निवेश का बड़ा हिस्सा सीधे इक्विटी हिस्सेदारी लेने के बजाय कर्ज और उससे जुड़े वित्तीय विकल्पों के जरिए आया. रेजिडेंशियल सेगमेंट में निवेश का 83% हिस्सा निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स में गया.

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तीसरी तिमाही में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी में करीब 19 करोड़ डॉलर का निवेश आया. ये इस सेगमेंट में पहले 9 महीनों के कुल निवेश का करीब 60% था. रिपोर्ट के मुताबिक, रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी में आए कुल निवेश का 63% हिस्सा एनसीआर में गया. इससे दिल्ली-NCR के रेजिडेंशियल मार्केट में निवेशकों की मजबूत मौजूदगी का पता चलता है.

वेयरहाउसिंग में 66% बढ़ा निवेश, रिटेल सेक्टर खाली

वेयरहाउसिंग सेगमेंट में निवेश का रुझान बाकी बाजार से अलग रहा. 2026 के पहले 9 महीनों में इस सेगमेंट में 16 करोड़ डॉलर का निवेश आया, जो पिछले साल की इसी अवधि के 10 करोड़ डॉलर के मुकाबले 66% ज्यादा है. हालांकि, वेयरहाउसिंग में आया पूरा निवेश तीसरी तिमाही में एक ही सौदे के जरिए हुआ. ये सौदा एक तैयार एसेट से जुड़ा था. इसके उलट, रिटेल रियल एस्टेट में जनवरी-सितंबर 2026 के दौरान प्राइवेट इक्विटी निवेश का एक भी सौदा दर्ज नहीं हुआ. पिछले साल इसी अवधि में रिटेल सेगमेंट में करीब 37.4 करोड़ डॉलर का निवेश आया था.

NCR बना सबसे बड़ा निवेश सेंटर, पुणे-चेन्नई भी आगे

शहरों के लिहाज से देखें तो जनवरी-सितंबर 2026 के दौरान NCR रियल एस्टेट में प्राइवेट इक्विटी निवेश का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा. इस दौरान NCR में 56.8 करोड़ डॉलर का निवेश आया, जो देश में हुए कुल निवेश का करीब 34% था. पिछले साल इसी अवधि में NCR की हिस्सेदारी केवल 9% थी और निवेश करीब 21 करोड़ डॉलर रहा था. पुणे में 35.6 करोड़ डॉलर का निवेश आया, जो कुल निवेश का 21% था.

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चेन्नई में 31.9 करोड़ डॉलर का निवेश हुआ और इसकी हिस्सेदारी 19% रही. मुंबई में निवेश 27.6 करोड़ डॉलर रहा, जबकि बेंगलुरु में ये घटकर 13.7 करोड़ डॉलर रह गया. हैदराबाद में निवेश करीब 40 लाख डॉलर रहा, जबकि कोलकाता में कोई निवेश दर्ज नहीं हुआ.

घरेलू निवेशकों ने बढ़ाई हिस्सेदारी, विदेशी निवेशक सतर्क

Knight Frank की रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू निवेशकों ने जनवरी-सितंबर 2026 के दौरान भारतीय रियल एस्टेट में कुल 1.42 अरब डॉलर लगाए. ये कुल प्राइवेट इक्विटी निवेश का करीब 85% था. पिछले साल इसी अवधि में घरेलू निवेशकों का योगदान करीब 60.3 करोड़ डॉलर था, जो कुल निवेश का 25% था. घरेलू निवेशकों ने रेजिडेंशियल सेगमेंट में आए निवेश का 94% और ऑफिस सेगमेंट में आए निवेश का 81% हिस्सा दिया. वेयरहाउसिंग में दर्ज एकमात्र सौदे में भी घरेलू पूंजी लगी.

दूसरी तरफ, विदेशी निवेशकों ने इस दौरान करीब 24 करोड़ डॉलर का निवेश किया, जिसमें 92% हिस्सा इक्विटी के रूप में था. रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी बाजारों में ज्यादा रिटर्न की उम्मीद और रुपये में गिरावट ने विदेशी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित किया है. घरेलू निवेशकों को देश के भीतर निवेश करने पर करेंसी में उतार-चढ़ाव का जोखिम नहीं उठाना पड़ता. इसके अलावा, अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) और घरेलू प्राइवेट इक्विटी प्लेटफॉर्म के बढ़ने से भारतीय निवेशकों के लिए रियल एस्टेट में पैसा लगाने के नए रास्ते भी खुले हैं.

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आगे क्या रहेगा रियल एस्टेट निवेश का रुख?

Knight Frank India के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल के मुताबिक, रियल एस्टेट में निवेश के बदलते आंकड़ों के साथ ये समझना भी जरूरी है कि पैसा किस तरह और किन प्रॉपर्टी में लगाया जा रहा है. घरेलू निवेशक अब निवेश की रकम, जोखिम और संभावित रिटर्न को ध्यान में रखकर फैसले ले रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में रियल एस्टेट में प्राइवेट इक्विटी निवेश का रुख प्रॉपर्टी की गुणवत्ता, जोखिम के बंटवारे और करेंसी के असर को ध्यान में रखकर मिलने वाले रिटर्न पर निर्भर करेगा.

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