न फोन, न गाड़ियां... इस ‘घोस्ट आइलैंड’ के लिए लोग क्यों खर्च रहे लाखों रुपये!

यह द्वीप जून से सितंबर की शुरुआत तक ही पर्यटकों के लिए खुलता है. बैटल हार्बर की खासियत यही है कि यहां लोग ऐसी जगह छुट्टियां मनाने के लिए पैसे खर्च करते हैं, जहां उनका फोन काम नहीं करता. यहां की असली लग्जरी आधुनिक सुविधाएं नहीं, बल्कि प्रकृति, इतिहास और डिजिटल दुनिया से दूर बिताए गए सुकून के पल हैं.

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इस वीरान द्वीप पर छुट्टियां मनाने के लिए खर्च होते हैं ₹1.06 लाख (Picture credit: Battleharbour) इस वीरान द्वीप पर छुट्टियां मनाने के लिए खर्च होते हैं ₹1.06 लाख (Picture credit: Battleharbour)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 23 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:52 PM IST

कल्पना कीजिए कि आप छुट्टियां मनाने किसी ऐसी जगह पहुंचें, जहां मोबाइल नेटवर्क न हो, गाड़ियां न चलती हों और इंटरनेट के लिए सिर्फ एक कॉमन वाई-फाई स्पॉट हो. आज के डिजिटल दौर में जहां लोग हर वक्त फोन से जुड़े रहते हैं, वहीं कनाडा का एक छोटा-सा द्वीप आधुनिक जिंदगी से दूर रहने का मौका दे रहा है. हैरानी की बात है कि यहां दो रात ठहरने के लिए पर्यटक करीब 1 लाख रुपये खर्च करते हैं.

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बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा के लैब्राडोर तट के पास स्थित बैटल हार्बर कभी मछली कारोबार का बड़ा केंद्र था. आज यह ऐतिहासिक पर्यटन स्थल बन चुका है, जहां लोग शोर-शराबे और मोबाइल नोटिफिकेशन से दूर सुकून के पल बिताने आते हैं.

कभी मछली कारोबार का बड़ा केंद्र था बैटल हार्बर

बैटल हार्बर की लंबाई करीब आधा मील है, लेकिन इतिहास में इसकी अहम भूमिका रही है. 1770 के दशक में अंग्रेज व्यापारी जॉन स्लेड ने यहां व्यापार शुरू किया था. उस समय कॉड मछली को नमक लगाकर सुरक्षित किया जाता था और यूरोप, कैरेबियन समेत दूसरे क्षेत्रों में भेजा जाता था.

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अपने सुनहरे दौर में यहां अस्पताल, स्कूल, चर्च और वायरलेस स्टेशन जैसी सुविधाएं थीं. द्वीप पर करीब 300 लोग स्थायी रूप से रहते थे, जबकि मछली पकड़ने के मौसम में हजारों लोग यहां आते थे. हालांकि, 1930 में लगी भीषण आग, मछलियों की घटती संख्या और 1960 के दशक के पुनर्वास कार्यक्रम के कारण यहां की आबादी कम होती गई. 1970 के दशक तक आखिरी स्थायी निवासी भी द्वीप छोड़ चुके थे. इसके बाद 2 जुलाई 1992 को कॉड मछली पकड़ने पर सरकारी रोक ने मछली उद्योग को बड़ा झटका दिया और न्यूफाउंडलैंड व लैब्राडोर में करीब 30,000 लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ.

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पुराने घर और समुद्र के खूबसूरत नजारे

आज बैटल हार्बर में कोई स्थायी आबादी नहीं है, लेकिन इसकी ऐतिहासिक पहचान को सहेजकर रखा गया है. यहां लकड़ी के पुराने घर, मछली कारोबार से जुड़ी इमारतें और ऐतिहासिक रास्ते मौजूद हैं. पर्यटक पुराने भवनों में बने कॉटेज और पूर्व मर्चेंट बिल्डिंग के कमरों में ठहर सकते हैं.

यहां टेलीविजन नहीं है और न ही आधुनिक पर्यटन स्थलों जैसी चहल-पहल. समुद्र की लहरों और वन्यजीवों की आवाज के बीच पर्यटक पुराने रास्तों पर घूम सकते हैं, कब्रिस्तान देख सकते हैं और द्वीप का इतिहास जान सकते हैं. यहां आर्कटिक लोमड़ियां भी दिखाई देती हैं.

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पहुंचना भी किसी रोमांच से कम नहीं

बैटल हार्बर पहुंचने के लिए पहले हैप्पी वैली-गूज बे तक फ्लाइट लेनी होती है. इसके बाद मैरी हार्बर तक सड़क से करीब पांच घंटे का सफर करना पड़ता है. वहां से फेरी के जरिए 60 से 75 मिनट में द्वीप पहुंचा जा सकता है. रास्ते में समुद्री पक्षियों, हिमखंडों और अनुकूल परिस्थितियों में हंपबैक व्हेल को देखने का मौका भी मिल सकता है.

दो रात के लिए 1.06 लाख रुपये का पैकेज

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रिपोर्ट के मुताबिक, दो लोगों के लिए दो रात के पैकेज की शुरुआती कीमत 1,570 कनाडाई डॉलर यानी करीब 1.06 लाख रुपये है. इसमें ठहरने की व्यवस्था, आने-जाने की फेरी, भोजन और ऐतिहासिक स्थलों की गाइडेड टूर शामिल है, टैक्स और टिप्स का खर्च अलग है.

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