वर्ल्ड बैंक से कर्ज लेने में भारत ने पाकिस्तान को भी पछाड़ा? हां-ना में उलझे बिना जानें सच

भारत मार्च 2026 तक वर्ल्ड बैंक का सबसे बड़ा कर्जदार देश है और उस पर 34.35 अरब डॉलर का आउटस्टैंडिंग कर्ज है. हालांकि, सिर्फ इस आंकड़े से भारत के कर्ज बोझ की तुलना पाकिस्तान से करना सही तस्वीर नहीं देता. भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान से करीब 10 गुना बड़ी है और वर्ल्ड बैंक कर्ज में 2020 के मुकाबले कमी भी आई है.

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भारत वर्ल्ड बैंक का सबसे बड़ा कर्जदार देश है, लेकिन पाकिस्तान से उसकी तुलना असलियत नहीं. (सांकेतिक तस्वीर) भारत वर्ल्ड बैंक का सबसे बड़ा कर्जदार देश है, लेकिन पाकिस्तान से उसकी तुलना असलियत नहीं. (सांकेतिक तस्वीर)

अविनाश कटील

  • नई दिल्ली,
  • 12 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:30 PM IST

भारत पर मार्च 2026 तक वर्ल्ड बैंक का आउटस्टैंडिंग कर्ज 34.35 अरब डॉलर था. डॉलर वैल्यू के हिसाब से भारत वर्ल्ड बैंक का सबसे बड़ा कर्जदार देश है. हालांकि, सिर्फ इस आंकड़े के आधार पर भारत पर कर्ज के दबाव की तुलना पाकिस्तान जैसे देशों से करना पूरी तस्वीर नहीं बताता. इसके लिए GDP, कर्ज किस तरह का है, रीपेमेंट और अलग-अलग फंडिंग सोर्स को भी साथ में देखना जरूरी है.

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यह चर्चा 8 अगस्त की एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद तेज हुई. प्रसार भारती के पूर्व सीईओ और टीएमसी के पूर्व राज्यसभा सांसद जवाहर सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर दावा किया था कि भारत ने पाकिस्तान को पीछे छोड़ते हुए वर्ल्ड बैंक का सबसे बड़ा कर्जदार बन गया है. हालांकि, वर्ल्ड बैंक के रिकॉर्ड बताते हैं कि भारत वर्ष 1969 तक ही उसका सबसे बड़ा कर्जदार बन चुका था.

रेलवे से शुरू हुआ भारत का वर्ल्ड बैंक कर्ज

भारत 1945 में वर्ल्ड बैंक का संस्थापक सदस्य बना था. इसके बाद 18 अगस्त 1949 को भारत को अपने रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए वर्ल्ड बैंक से पहला 34 मिलियन डॉलर का कर्ज मिला. यह किसी एशियाई देश को दिया गया वर्ल्ड बैंक का पहला कर्ज था. इस लोन एग्रीमेंट पर भारत की तत्कालीन राजनयिक विजयलक्ष्मी पंडित ने हस्ताक्षर किए थे.

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इसके बाद दशकों में वर्ल्ड बैंक की फंडिंग का इस्तेमाल बिजली, स्टील, कृषि, ग्रीन रिवोल्यूशन, ऊर्जा, बंदरगाह, शिक्षा, ग्रामीण सड़क, शहरी परिवहन, फ्रेट कॉरिडोर, इनलैंड वॉटरवेज, रिन्यूएबल एनर्जी, सैनिटेशन, अर्बन डेवलपमेंट और गंगा रिजुवनेशन जैसी परियोजनाओं में हुआ.

कैसे बढ़ता गया भारत का बकाया कर्ज?

वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, भारत 1969 तक उसका सबसे बड़ा कर्जदार बन चुका था. इसके बाद दशकों में भारत का आउटस्टैंडिंग कर्ज लगातार बढ़ता गया. बाद में भारत के वर्ल्ड बैंक कर्ज में कमी का रुख देखने को मिला.

  • 1970: 1.56 अरब डॉलर
  • 1975: 3.24 अरब डॉलर
  • 1980: 5.56 अरब डॉलर
  • 1985: 10.38 अरब डॉलर
  • 1990: 19 अरब डॉलर से ज्यादा
  • 1995: 26 अरब डॉलर से ज्यादा
  • 2005: करीब 28 अरब डॉलर
  • 2010: 37 अरब डॉलर से ज्यादा
  • 2015: करीब 36.5 अरब डॉलर
  • 2020: करीब 39.6 अरब डॉलर

भारत का 2026 में कितना है वर्ल्ड बैंक कर्ज?

भारत का मार्च 2026 तक वर्ल्ड बैंक पर कुल आउटस्टैंडिंग कर्ज 34.35 अरब डॉलर था. इसमें करीब 21.92 अरब डॉलर रिकंस्ट्रक्शन और डेवलपमेंट लोन (IBRD Loans) और 12.43 अरब डॉलर इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन से जुड़े कर्ज शामिल थे. 2020 के करीब 39.6 अरब डॉलर के मुकाबले यह राशि 5 अरब डॉलर से ज्यादा कम है. यानी भारत के वर्ल्ड बैंक कर्ज में 2020 के मुकाबले 2026 में करीब 13% की गिरावट आई है.

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भारत के लिए वर्ल्ड बैंक की नई फंडिंग जारी है. जून 2026 में निजी क्षेत्र के जरिए रोजगार बढ़ाने और आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए 1.5 अरब डॉलर के ऑपरेशन को मंजूरी दी गई. अप्रैल 2026 में राजस्थान हाईवे मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट के लिए 225 मिलियन डॉलर की मंजूरी भी दी गई. 30 जून 2026 तक भारत में वर्ल्ड बैंक फंडेड 718 प्रोजेक्ट्स के लिए करीब 142.75 अरब डॉलर की कमिटमेंट थी. भारत 2014 में इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन फाइनेंसिंग से बाहर निकल गया था और अब वर्ल्ड बैंक के इंटरनेशनल बैंक ऑफ रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट (IBRD) से कर्ज लेने के लिए पात्र है.

भारत की PAK से तुलना करना गलत क्यों?

पाकिस्तान का वर्ल्ड बैंक पोर्टफोलियो 30 जून 2026 तक 371 प्रोजेक्ट्स में करीब 51.85 अरब डॉलर की कुल कमिटमेंट का था. पाकिस्तान अब भी IBRD और IDA दोनों से कर्ज ले सकता है. जून 2026 में पाकिस्तान के लिए कनेक्ट पंजाब प्रोविंस प्रोजेक्ट के तहत 70 मिलियन डॉलर और तारबेला फोर्स एक्सटेंशन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग को मंजूरी दी गई. लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है- टोटल कमिटमेंट और आउटस्टैंडिंग लोन एक ही चीज नहीं हैं. पुराने आंकड़ों के मुताबिक, 2023 में पाकिस्तान का आउटस्टैंडिंग वर्ल्ड बैंक कर्ज करीब 20 अरब डॉलर था, जबकि भारत का करीब 39.3 अरब डॉलर.

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लोन की रकम आर्थिक स्थिति नहीं बताती

भारत और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्थाओं के आकार में बड़ा अंतर है. वर्ल्ड बैंक के ताजा आंकड़ों में भारत की GDP करीब 3.96 ट्रिलियन डॉलर और पाकिस्तान की करीब 407 अरब डॉलर है. यानी भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान से लगभग 10 गुना बड़ी है.

इसी वजह से केवल यह देखना कि किसी देश ने वर्ल्ड बैंक से कितने डॉलर उधार लिए हैं, उसके कर्ज के दबाव का पूरा आकलन नहीं देता. इंटरनेशनल मोनेटरी फंड (IMF) के अनुमान में भारत का कर्ज उसकी GDP के 80% से ज्यादा है, जबकि पाकिस्तान के कर्ज का उसकी जीडीपी के मामले में अनुपात करीब 60-70% के दायरे में है. वहीं, फरवरी 2026 के बजट दस्तावेज के मुताबिक 2026-27 के लिए भारत का डेट-टू-जीडीपी रेश्यो 55.6% अनुमानित है.

चीन और दूसरे देशों की स्थिति

दूसरे बड़े वर्ल्ड बैंक कर्जदारों की स्थिति भी इस तुलना को समझने में मदद करती है. 31 मार्च 2026 तक चीन का IBRD लोन करीब 13.74 अरब डॉलर और लोन आउटस्टैंडिंग करीब 13.87 अरब डॉलर था. वहीं इंडोनेशिया की कुल कमिटमेंट 418 प्रोजेक्ट्स में 73.83 अरब डॉलर और बांग्लादेश की 311 प्रोजेक्ट्स में 47.82 अरब डॉलर थी. इससे स्पष्ट होता है कि कमिटमेंट, डिस्बर्समेंट और आउटस्टैंडिंग कर्ज अलग-अलग आंकड़े हैं और इन्हें एक-दूसरे की जगह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

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भारत पर पाकिस्तान से ज्यादा कर्ज का दबाव?

सीधी बात यह है कि भारत ने पाकिस्तान की तुलना में वर्ल्ड बैंक से ज्यादा डॉलर उधार लिए हैं. लेकिन इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि भारत पर कर्ज का दबाव पाकिस्तान से ज्यादा है. कर्ज की स्थिति समझने के लिए GDP का आकार, सरकारी कर्ज, रीपेमेंट क्षमता, दूसरे घरेलू और विदेशी कर्ज, ब्याज लागत और फंडिंग स्ट्रक्चर जैसे कई पहलुओं को एक साथ देखना होगा. वर्ल्ड बैंक के FY2026-31 कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क में भारत के लिए प्राइवेट सेक्टर के नेतृत्व वाली इकोनॉमिक ग्रोथ, जॉब्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रामीण और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों पर फोकस किया गया है.

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