देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 तक बिना किसी ड्यूटी के 10 लाख टन तक कच्ची चीनी के आयात की मंज़ूरी दी है. इस कदम से त्योहारों के मौसम से पहले देश में चीनी की कीमतों को काबू में रखने में मदद मिल सकती है. वहीं विपक्ष ने कहा है कि देश में चीनी की भारी कमी हो गई है. क्योंकि चीनी बनाने वाले गन्ने से मोदी जी ने इथेनॉल बना दिया है.
देश में पिछले कुछ दिनों में चीनी की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कई जगहों पर चीनी 60 से 65 रुपये किलो बिक रही है, जबकि कुछ जिन पहले इसकी कीमतें 45 से 50 रुपये के आसपास थी.
अब त्योहारों की सीजन शुरू होने से पहले सरकार ने कदम उठाया है. सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 तक बिना किसी ड्यूटी के 10 लाख टन तक कच्ची चीनी के आयात की मंज़ूरी दी है. इस कदम से त्योहारों के मौसम शुरू होने से पहले शुगर की कीमतों को कंट्रोल में लाने में मदद मिलेगी.
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ फॉरेन ट्रेड (DGFT) के नोटिफ़िकेशन के अनुसार इस फ़ैसले से टैरिफ़ रेट कोटा के तहत 10 लाख टन कच्ची चीनी का ज़ीरो ड्यूटी पर आयात किया जा सकेगा.
यानी की चीनी के आयात पर कोई ड्यूटी यानी की कर नहीं चुकानी पड़ेगी.
यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि इससे बड़ी मात्रा में चीनी के आयात का रास्ता खुल गया है, जबकि देश में चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं. हालांकि भारत की चीनी इंडस्ट्री का कहना है कि इस फैसले को चीनी की कमी के जवाब के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने कहा कि सरकार का यह फैसला एक "साफ़ संकेत" देता है कि सट्टेबाजी और बिना वजह कीमतों में बढ़ोतरी को जारी नहीं रहने दिया जाएगा.
दाम बढ़ने की वजह सट्टेबाजी और पैनिक बाइंग
ISMA ने कहा, "देश में चीनी की कोई कमी नहीं है." साथ ही संगठन ने कहा कि नए सीज़न की चीनी आने तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए मिलों के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है.
इंडस्ट्री बॉडी के मुताबिक चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी बाज़ार के बुनियादी कारणों पर आधारित नहीं है, बल्कि यह त्योहारों के मौसम से पहले सट्टेबाजी और घबराहट में की गई खरीदारी का नतीजा है.
ISMA को उम्मीद है कि नए चीनी सीजन में गन्ने की पेराई आम समय से 10-15 दिन पहले शुरू हो जाएगी, जिससे घरेलू बाज़ार में नई चीनी जल्दी पहुंच सकेगी.
इसलिए आयात की सुविधा उन महीनों में अतिरिक्त राहत दे सकती है जब आमतौर पर चीनी की मांग बढ़ जाती है. ISMA ने इस कदम को "एहतियाती उपाय" बताया है, जिसका मकसद सप्लाई की कमी को पूरा करना नहीं, बल्कि त्योहारों के मुख्य समय में राहत देना है.
सरकार के इस फ़ैसले को आने वाले महीनों में कीमतों में तेज़ी से होने वाली बढ़ोतरी को रोकने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा सकता है. यह संकेत देकर कि ज़रूरत पड़ने पर घरेलू बाज़ार में अतिरिक्त सप्लाई आ सकती है, यह पॉलिसी सट्टेबाज़ी के लिए स्टॉक जमा करने और घबराहट में खरीदारी करने को हतोत्साहित कर सकती है.
केजरीवाल ने चीनी की कीमतों को इथेनॉल से जोड़ा
दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को इथेनॉल से जोड़ दिया है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, "अभी अभी खबर आई है कि चीनी आयात को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी पर आयात शुल्क जीरो कर दिया है. देश में चीनी की कीमतें बेतहाशा बढ़ रही हैं. क्योंकि चीनी की भारी कमी हो गई है."
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि जिस गन्ने से चीनी बनता था उससे सरकार इथेनॉल बना रही है. उन्होंने कहा, "चीनी बनाने वाले गन्ने से मोदी जी ने इथेनॉल बना दिया है. लगभग तीस लाख टन चीनी के गन्ने से मोदी जी ने एथनॉल बना दिया. प्रधानंमत्री का कहना है कि एथेनॉल बना कर विदेशी मुद्रा बचायी है. उस विदेशी मुद्रा से अब चीनी आयात कर रहे हैं."
चेतन भूटानी