केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पूरी दुनिया को आईना दिखाते हुए कहा कि भारत ने कोविड-19 महामारी के दौरान अन्य देशों से मदद मांगी थी, हमने सभी की मदद की, लेकिन हमे बुरी तरह से निराश किया गया. उन्होंने कहा कि इससे भारत को आत्मनिर्भर बनने के लिए मजबूर होना पड़ा.
नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में हुई चर्चा के दौरान गोयल ने कहा कि कोविड-19 के दौरान, हमने भारत जैसे 1.4 अरब आबादी वाले देश की उन कमजोरियों को पहचाना, जिनका सामना ग्लोबल सप्लाई चेन के बाधित होने पर करना पड़ता है. उन्होंने आगे कहा कि हमे अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त चीजें नहीं दी गईं.
उन्होंने कहा कि जब भी हमने व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण, कोविड किट या टीकों के लिए ऑर्डर दिए, हमें बुरी तरह निराश होना पड़ा. सभी देशों ने ऐसा किया. जब हमें फाइजर और मॉडर्ना से टीकों की जरूरत थी, तो पश्चिमी देशों ने उन्हें देने से इनकार कर दिया. उन्होंने टीकों को भारतीय बाजार में लाने के लिए आवेदन करने से भी इनकार कर दिया. हम हर शर्त को माफ करने के लिए तैयार थे.
भारत करता है मदद, बाकी देश देखते हैं अपना फायदा
उन्होंने आगे कहा कि भारत इकलौता ऐसा देश है जिसने किसी न किसी तौर पर दूसरों की मदद करता है, जबकि बाकी सभी देश सिर्फ अपना ख्याल रखते हैं. मंत्री ने कहा कि हमने जरूरतमंदों को दवाइयां मुहैया कराईं, हमने 100 से ज्यादा देशों को फ्री में अनाज उपलब्ध कराए और हमने 100 से ज्यादा देशों को टीके भी उपलब्ध कराए.
भारत ने विश्व के समुदाय का हिस्सा बनने के लिए तैयार था और कोशिश भी की, लेकिन ज्यादातर देशों ने निराश किया. यही कारण रहा कि भारत आत्मनिर्भर बनने की ओर कदम बढ़ाया. मंत्री ने कहा कि भारत अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ सहयोग करने को तैयार है, लेकिन विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है.
हम बेहतर सप्लाई चेन बनाना चाहते हैं
उन्होंने आगे कहा कि भारत ऐसे भरोसेमंद साझेदारियों का निर्माण करना चाहता है जिनमें सप्लाई चेन के हिस्से के रूप में देश एक-दूसरे पर भरोसा कर सकें. उन्होंने कहा कि हमारा नजरिया विश्वसनीय देशों के साथ साझेदारी के माध्यम से दक्षता और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता के बीच संतुलन बनाना है.
भारत ने पिछले चार से साढ़े चार वर्षों में 38 विकसित देशों के साथ तरजीही व्यापार समझौता किया है.उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य भारत के बाजारों को विश्व के लिए खोलना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि अन्य बाजार भी भारतीय व्यवसायों के लिए समान रूप से सुलभ हों. उन्होंने आगे कहा कि भारत कनाडा, मैक्सिको, खाड़ी सहयोग काउंसिल के अन्य देशों, दक्षिणी अफ्रीकी विकास समुदाय, मर्कोसुर, यूरेशिया और कई अन्य साझेदारों के साथ बातचीत कर रहा है. उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य इस दायरे को 115 ट्रिलियन डॉलर के वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में से लगभग 85 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ाना है.
आजतक बिजनेस डेस्क