होर्मुज, मंदेब के बाद एक और ग्लोबल ट्रांजिट रूट पर संकट, खत्म हो रहा पनामा नहर का पानी

पनामा नहर करीब 82 किलोमीटर लंबा कृत्रिम जलमार्ग है. ये नहर अटलांटिक महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ती है. दुनिया के व्यापार का एक अहम हिस्सा इस नहर से होकर गुजरता है.

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कम बारिश की वजह से पनामा का जलस्तर कम हो गया है. (Photo: Reuters) कम बारिश की वजह से पनामा का जलस्तर कम हो गया है. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:24 PM IST

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बॉब अल मंदेब में जहाजों की आवाजाही पहले से ही बाधित है और अब दुनिया के एक और ट्रांजिट रूट से परेशान करने वाली खबर आई है. पनामा नहर प्राधिकरण की नई प्रशासक इल्या एस्पिनो डे मारोटा ने चेतावनी दी है कि पानी की गंभीर कमी के कारण आने वाले महीनों में नहर से जहाजों के रोजाना गुजरने की संख्या और कम हो सकती है. यह वैश्विक शिपिंग के लिए एक और बड़ा झटका साबित हो सकता है, जो पहले से ही ईरान युद्ध के प्रभावों से जूझ रहा है.

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एस्पिनो डे मारोटा ने अंग्रेजी बिजनेस अखबार फाइनेंशियल टाइम्स को दिए साक्षात्कार में बताया कि दैनिक ट्रांजिट की संख्या मौजूदा 32 से घटकर 27 तक आ सकती है. उन्होंने इसे “सबसे खराब स्थिति” बताया, जो 1997 के वर्षा पैटर्न पर आधारित मॉडलिंग से निकली है. 1997 नहर के इतिहास का सबसे सूखा वर्ष था. 

पनामा नहर अटलांटिक और प्रशांत महासागरों को जोड़ती है और वैश्विक व्यापार का 3 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभालती है. पानी की कमी अब जलवायु परिवर्तन के कारण लगभग हर तीन साल में एक समस्या बनती जा रही है. एस्पिनो डे मारोटा ने कहा, “जलवायु परिवर्तन सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि हम देख सकते हैं कि सूखे वर्ष लगातार बढ़ रहे हैं.”

वे सोमवार को प्रशासक पद की शपथ लेने से ठीक पहले यह बातचीत कर रही थीं. नहर में जल स्तर बनाए रखने के लिए बारिश पर निर्भरता बहुत अधिक है. कम बारिश होने पर जहाजों की संख्या सीमित करनी पड़ती है ताकि पानी की बचत हो सके. इससे पहले भी सूखे के कारण ट्रांजिट कम किए जा चुके हैं, लेकिन आगे और कटौती की आशंका शिपिंग कंपनियों के लिए चिंता का विषय है. 

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ग्लोबल ट्रेड रूट युद्ध की वजह से पहले से ही व्यवधानों का सामना कर रहे हैं. ईरान युद्ध ने समुद्री मार्गों पर दबाव बढ़ाया है. ऐसे में पनामा नहर में कटौती से माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है और डिलीवरी में देरी हो सकती है. 

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के लंबे समय तक पड़ने वाले प्रभावों को देखते हुए वैकल्पिक जल स्रोतों और बेहतर प्रबंधन की जरूरत है. एस्पिनो डे मारोटा की चेतावनी ने एक बार फिर याद दिलाया है कि जलवायु परिवर्तन सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण मार्गों को भी प्रभावित कर रहा है. 

पनामा नहर कृत्रिम जलमार्ग है

पनामा नहर मध्य अमेरिका के पनामा देश में स्थित करीब 82 किलोमीटर लंबी कृत्रिम जलमार्ग है, जो अटलांटिक महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ती है. इसका निर्माण 1881 में फ्रांस ने शुरू किया था, लेकिन तकनीकी मुश्किलों के कारण परियोजना विफल हो गई. बाद में अमेरिका ने निर्माण पूरा किया और 1914 में नहर को यातायात के लिए खोल दिया.

पनामा नहर की सबसे बड़ी खासियत इसकी लॉक प्रणाली है, जो जहाजों को समुद्र तल से ऊपर उठाकर गाटून झील तक ले जाती है और फिर दूसरी ओर नीचे उतारती है. इससे जहाजों को दक्षिण अमेरिका के चारों ओर हजारों किलोमीटर लंबा रास्ता तय नहीं करना पड़ता.

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यह वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इस नहर की वजह से एशिया, अमेरिका और यूरोप के बीच माल ढुलाई में समय और ईंधन दोनों की बचत होती है. 1999 में नहर का नियंत्रण पूरी तरह पनामा को सौंप दिया गया. 

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