7.8% vs 2.6% में कौन सा सही? GDP पर सुभाष गर्ग और गौरव वल्लभ का हुआ आमना-सामना

भारत की पहली तिमाही की GDP ग्रोथ 7.8% रहने के बाद आंकड़ों की गणना को लेकर बहस तेज हो गई है. आजतक के डिबेट शो 'दंगल' में पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार समिति के सदस्य गौरव वल्लभ इस मुद्दे पर अपने-अपने तर्क रखे. गर्ग ने पुराने और नए आंकड़ों के अंतर का हवाला देते हुए 2.6% ग्रोथ का दावा किया, जबकि वल्लभ ने नई GDP सीरीज और बदली गणना पद्धति का बचाव किया.

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जीडीपी के आंकड़ों पर सुभाष गर्ग (L) और गौरव वल्लभ (R) ने अपने-अपने तर्क रखे. (Photo: ITG) जीडीपी के आंकड़ों पर सुभाष गर्ग (L) और गौरव वल्लभ (R) ने अपने-अपने तर्क रखे. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 03 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:45 PM IST

भारत की पहली तिमाही की GDP ग्रोथ 7.8% रहने के बाद आर्थिक आंकड़ों को लेकर बहस तेज हो गई है. इसी मुद्दे पर आजतक (Aaj Tak) के डिबेट शो 'दंगल' (Dangal) में बुधवार को पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य गौरव वल्लभ आमने-सामने थे.

बहस का सबसे बड़ा मुद्दा यह रहा कि पिछले साल की पहली तिमाही के GDP के मौजूदा कीमतों वाले आंकड़े को करीब ₹86 लाख करोड़ से घटाकर लगभग ₹80 लाख करोड़ क्यों किया गया. सुभाष गर्ग ने इस बड़े बदलाव पर सवाल उठाया, जबकि वल्लभ ने नए GDP सिस्टम और बदली हुई गणना पद्धति का बचाव किया.

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₹6 लाख करोड़ के बदलाव पर सवाल

पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने GDP के पुराने और नए आंकड़ों में हुए बदलाव को लेकर सवाल उठाया है. उनका कहना है कि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही की करंट प्राइस GDP पहले करीब ₹86 लाख करोड़ थी. नई GDP सीरीज में यही आंकड़ा करीब ₹80 लाख करोड़ हो गया. उन्होंने इसी अंतर को आधार बनाकर कहा कि अगर पुराने आंकड़े को बरकरार रखा जाए, तो मौजूदा तिमाही की GDP ग्रोथ करीब 2.6% बैठती है.

सुभाष गर्ग का कहना था कि GDP के आंकड़ों में बदलाव को सिर्फ बेस ईयर या डिफ्लेटर में बदलाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. उनके मुताबिक सबसे बड़ा सवाल पिछले साल की पहली तिमाही के मौजूदा कीमतों वाले GDP अनुमान में करीब ₹6 लाख करोड़ की कमी का है. उन्होंने कहा कि इतने बड़े बदलाव की सरकार को स्पष्ट वजह बतानी चाहिए. सुभाष गर्ग ने इसे असामान्य रूप से बड़ा संशोधन बताया और पुराने आंकड़ों में हुए बदलावों की भी जांच की मांग की.

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गर्ग के दावों पर गौरव वल्लभ का तर्क

पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के 2.6% जीडीपी ग्रोथ के दावों को खारिज करते हुए पीएम की इकोनॉमिक एडवाइजरी कमेटी के सदस्य गौरव वल्लभ ने नए GDP मेथोडोलॉजी का बचाव किया. उनका तर्क था कि अर्थव्यवस्था का आकलन करते समय बदली हुई डेटा कवरेज और नए कैलकुलेशन मेथड को ध्यान में रखना जरूरी है. उन्होंने कहा कि GDP की नई सीरीज तैयार करते समय सिर्फ बेस ईयर नहीं बदला गया है, बल्कि आंकड़े जुटाने के तरीके में भी बदलाव किया गया है.

गौरव वल्लभ के मुताबिक नई सीरीज में बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया गया है. इसके अलावा GST रिकॉर्ड, कंपनियों की जानकारी, सरकारी रिकॉर्ड और नए सर्वे जैसे स्रोतों का ज्यादा इस्तेमाल किया गया है. उनका तर्क था कि जब GDP की गणना का तरीका और आंकड़ों का आधार बदल जाता है, तो पुराने आंकड़ों को भी नई पद्धति के हिसाब से दोबारा तैयार किया जाता है. इसलिए पुराने आंकड़े को नए आंकड़े से सीधे तुलना करके ग्रोथ निकालना सही नहीं है.

इसे आसान उदाहरण से समझें. अगर किसी स्कूल में पहले परीक्षा के लिए 5 विषयों के नंबर गिने जाते थे और बाद में 7 विषयों के नंबर शामिल कर दिए जाएं, तो दोनों साल के कुल नंबरों की सीधी तुलना नहीं की जा सकती. GDP के आंकड़ों में भी डेटा और गणना का आधार बदलने से ऐसी ही स्थिति बनती है. गौरव वल्लभ ने भी कहा कि नई GDP सीरीज में बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया गया है और अर्थव्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों से ज्यादा अपडेटेड डेटा को शामिल किया गया है.

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पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग के दावे को बेमतलब करार देते हुए सरकार का भी कहा कि पिछले आंकड़ों में हुए बदलाव किसी आंकड़े को जानबूझकर बढ़ाने या घटाने के लिए नहीं, बल्कि नई जानकारी और बेहतर पद्धति के कारण हुए हैं. सांख्यिकी मंत्रालय ने भी कहा है कि GDP की तुलना एक ही सीरीज के आंकड़ों के बीच की जानी चाहिए.

रोजगार और अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर भी बात

बहस सिर्फ GDP के आंकड़ों तक सीमित नहीं रही. गौरव वल्लभ ने निजी खपत में 7.1%, निवेश में 11.9% और वास्तविक निर्यात में 12% की बढ़त का हवाला दिया. उन्होंने रोजगार के आंकड़ों में भी सुधार की बात रखी. वहीं, सुभाष गर्ग ने रोजगार के आंकड़ों को ज्यादा बारीकी से देखने की जरूरत बताई. उनका कहना था कि रोजगार में बढ़ोतरी का एक हिस्सा बिना वेतन वाले पारिवारिक काम और कृषि से जुड़ा हो सकता है. ऐसे में सिर्फ रोजगार की संख्या बढ़ने से यह साबित नहीं होता कि अच्छी गुणवत्ता वाली नौकरियां भी उसी रफ्तार से बढ़ रही हैं. उन्होंने शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी और लेबर फोर्स से बाहर लोगों की स्थिति पर भी सवाल उठाए.

जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों पर असली विवाद क्या?

पूरे मामले को आसान भाषा में समझें तो सरकारी आंकड़े पहली तिमाही में 7.8% वास्तविक GDP ग्रोथ दिखा रहे हैं, जबकि पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने पुराने और नए आंकड़ों की तुलना के आधार पर 2.6% का दावा किया है. लेकिन दोनों आंकड़ों की गणना का आधार एक जैसा नहीं है. सरकार का कहना है कि नई GDP सीरीज में पुराने आंकड़ों को भी नई पद्धति के हिसाब से संशोधित किया गया है. इसलिए अलग-अलग सीरीज के आंकड़ों को आपस में मिलाकर ग्रोथ निकालना सही नहीं है. इसका मतलब यह है कि 2.6% को आधिकारिक GDP ग्रोथ नहीं माना जा सकता. लेकिन सुभाष गर्ग का सवाल GDP के आंकड़ों में हुए बड़े बदलाव और उसकी वजह को लेकर है. यही मुद्दा अब राजनीतिक और आर्थिक बहस का केंद्र बन गया है.

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गर्ग के दावे पर कांग्रेस ने सरकार से पूछे सवाल

पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के 2.6% जीडीपी ग्रोथ के दावे को कांग्रेस केंद्र सरकार पर निशाना साधने के लिए इस्तेमाल कर रही है. कांग्रेस ने GDP के 7.8% के आंकड़े को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं. मुख्य विपक्षी पार्टी का कहना है कि सरकार सिर्फ GDP ग्रोथ का आंकड़ा बताकर अपनी उपलब्धि नहीं गिना सकती. उसे यह भी बताना चाहिए कि आर्थिक ग्रोथ का फायदा आम लोगों तक कितना पहुंच रहा है. कांग्रेस ने रोजगार, महंगाई, लोगों की खरीदारी की क्षमता और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दे उठाए हैं. पार्टी का सवाल है कि अगर अर्थव्यवस्था इतनी तेजी से बढ़ रही है, तो इसका असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में भी दिखाई देना चाहिए.

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