केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ईंधन शॉर्टेज को लेकर बड़ा बयान दिया है. उनका कहना है कि भारत संकट के समय सिर्फ उबरा ही नहीं है, बल्कि निखरा भी है. जियो-पॉलिटिकल तनाव के बीच आयात बढ़ाने के साथ ही ईंधन का निर्यात भी ज्यादा मात्रा में किया है.
पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि दुनिया में उथल-पुथल जारी है, जिस कारण देश एक बड़ी परीक्षा से गुजर रहा है, जिस गति से चीजें चल रही हैं, हम नई तरह की रुकावटें देख रहे हैं. उन्होंने कहा कि मैंने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का जिक्र किया था. हम उससे सफलतापूर्वक निपटने में कामयाब रहे और वहां से काफी मात्रा में कार्गो आया.
उन्होंने आगे कहा कि अब, लाल सागर (Red Sea) क्षेत्र में तनाव है. भारत की ऊर्जा सुरक्षा के नजरिए से अहम बात यह है कि प्रधानमंत्री ने पहले से ही कई कदम उठाए, सप्लाई के सोर्स में विविधता लाई और हमारी रिफाइनिंग क्षमता को बढ़ाया है. आज, इन सबके बीच एक दिन में 50 लाख (5 मिलियन) बैरल से ज्यादा तेल आयात कर रहे हैं और खपत भी कर रहे हैं और हम 10 लाख (1 मिलियन) बैरल तेल का निर्यात भी कर रहे हैं, क्योंकि हमारी रिफाइनिंग क्षमता बढ़ रही है.
रूस से बढ़ा तेल आयात: पुरी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह लगातार बढ़ रहा है और ऐसा इसलिए संभव हो पा रहा है, क्योंकि हमें प्रधानमंत्री जैसा नेतृत्व मिला है. अब तक हमने इन चुनौतियों का काफी अच्छे से सामना किया है. कहीं कोई कमी नहीं आई, तेल का संकट नहीं हुआ, और कीमतों को भी नियंत्रित रखा गया है. पुरी ने कहा कि मैं बस इतना बता सकता हूं कि फरवरी 2022 में, रूस से हमारा कच्चा तेल आयात 0.2% से भी कम था. आज, यह काफी ज्यादा है. पहले, हम संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से लगभग 8 लाख बैरल और सऊदी अरब से भी 8 लाख बैरल कच्चा तेल रोजाना आयात करते थे. यह आंकड़ा बदलता रहता है.
105 डॉलर के ऊपर कच्चे तेल का दाम
पेट्रोलियम मंत्री के इस बयान के बीच ब्रेंट क्रूड ऑयल का दाम 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ था. इसमें हल्की सी गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन फिर भी कच्चे तेल के दाम ऊपर बने हुए हैं. दूसरी ओर, मार्केट के जानकारों का कहना है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो कच्चे तेल के दाम में और भी तेजी आएगी और यह 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच सकता है.
गौरतलब है कि कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी की बड़ी वजह अमेरिका-ईरान के बीच जंग से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव होना. साथ लाल सागर पर हुतियों का कब्जा होने की वजह से यूरोप और अन्य देशों की सप्लाई प्रभावित होना है. वहीं सऊदी अरब और हुतियों के बीच तनाव के कारण सऊदी अरब की भी सप्लाई ज्यादा प्रभावित हुई है.
आजतक बिजनेस डेस्क