सोने-चांदी में रिकॉर्ड तेजी के बाद अब ऐसी गिरावट आई है कि निवेशकों के पोर्टफोलियो का कैलकुलेशन पूरी तरह से बिगाड़ दिया है. चांदी का भाव जनवरी 2026 के रिकॉर्ड हाई करीब 4.20 लाख रुपये प्रति किलो से गिरकर 2 लाख रुपये के नीचे आ चुका है. यानी ऊंचाई से करीब 55% की गिरावट देखने को मिली है. गोल्ड में भी हालिया तेजी के बाद गिरावट देखने को मिली है.
इन दोनों कीमती धातुओं की गिरावट का असर सीधा गोल्ड और सिल्वर ETF पर पड़ा है. ऐसे में सवाल है कि जिन निवेशकों ने ऊंचे भाव पर ETF खरीदे हैं, वे अब क्या करें- बेच दें, होल्ड करें या और खरीदें?
चांदी में इतनी बड़ी गिरावट क्यों?
रिकॉर्ड तेजी के बाद मुनाफावसूली, मजबूत अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और अमेरिकी ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है. कच्चे तेल के दाम में तेजी के कारण महंगाई की भी चिंता बढ़ी है. चांदी की औद्योगिक मांग को लेकर भी आशंकाएं भी इसकी गिरावट को बढ़ा रही हैं. 23 अक्टूबर को MCX पर चांदी का दिसंबर वायदा करीब 1.95 लाख रुपये प्रति किलो तक आ गया, जबकि कई सिल्वर ETF में 3 से 5% तक की गिरावट देखी गई.
गोल्ड और सिल्वर ETF करीब 50 फीसदी तक गिरे
गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ को देखें तो जनवरी के हाई से लेकर सिल्वर ईटीएफ में 48 फीसदी से लेकर 50 प्रतिशत तक की गिरावट आई है. वहीं दूसरी ओर, Gold ETF में 20 से 23 फीसदी की गिरावट आई है. ऐसे में यह कुछ निवेशकों के लिए मौजूदा रेट्स आकर्षक लग सकते हैं. आइए जानते हैं ब्रोकरेज ने इसे लेकर क्या कहा है...
मोतीलाल ओसवाल: ब्रोकरेज के चंदन तापड़िया ने 9 अक्टूबर को चांदी के लिए 2 लाख रुपये को अहम सपोर्ट जोन बताया था. तेजी लौटने पर 2.50 लाख से 2.75 लाख रुपये तक के स्तर की संभावना जताई गई थी, लेकिन मौजूदा गिरावट के बाद इस पुराने टारगेट को निश्चित लक्ष्य नहीं समझना चाहिए. चांदी में इसके नीचे भी आ सकती है.
कोटक नियो रिसर्च: सितंबर में आउटलुक रिपोर्ट में कोटक नियो ने अगले 6–12 महीनों के लिए चांदी का टारगेट करीब 2.55 लाख रुपये प्रति किलो बताया था. यह अनुमान मौजूदा तेज गिरावट से पहले का है.
ICICI Direct: जनवरी 2026 के सालाना कमोडिटी आउटलुक में ब्रोकरेज ने 1.50–1.65 लाख रुपये के दायरे में गिरावट को लंबी अवधि में खरीदारी का संभावित अवसर बताया था. तेजी की स्थिति में 2.60–2.75 लाख रुपये का स्तर दिया गया था. यह पुराना अनुमान है, मौजूदा बाजार के लिए नया टारगेट नहीं.
मिराए एसेट: 16 अक्टूबर के विश्लेषण में ब्रोकरेज के प्रवीण सिंह ने अंतरराष्ट्रीय चांदी के लिए 54.50 डॉलर प्रति औंस को अहम सपोर्ट बताया था. इसके निर्णायक रूप से टूटने पर 50 और 48 डॉलर तक गिरावट की आशंका जताई गई थी. उनका निकट अवधि का रुख सतर्क था.
ETF निवेशक अब क्या करें?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपने चांदी या गोल्ड ईटीएफ को लंबे समय के लिए खरीदा है तो वे अपने लक्ष्य और रिस्क की क्षमता के आधार पर होल्ड कर सकते हैं. अगर आप नए खरीदार हैं तो भाव गिरने पर एकमुश्त निवेश ना करें, बल्कि थोड़ा-थोड़ा करके आप गोल्ड सिल्वर को अपने पोर्टफोलियो में जोड़ सकते हैं. शॉर्टटर्म नजरिया लेकर चलना गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में नुकसान भरा हो सकता है. ऐसे में सीमित और संतुलित निवेश ही करना चाहिए.
(नोट- सोना या चांदी ईटीएफ में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)
हिमांशु द्विवेदी