अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने वाले 5 देशों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने के प्रस्ताव को लागू होने से ठीक एक दिन पहले रोक दिया है. उनके इस फैसले से भारत को बड़ी राहत मिली है. अमेरिका में प्रस्तावित कानून के तहत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले बड़े देशों के आयात पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था. भारत भी इसके संभावित दायरे में था. इसकी समयसीमा 18 अक्टूबर तय की गई थी. ऐसे में भारतीय निर्यातकों को आशंका थी कि अमेरिकी बाजार में उनके उत्पादों पर भारी शुल्क लगाया जा सकता है.
अगर यह अतिरिक्त शुल्क लागू होता, तो अमेरिका में भारतीय उत्पादों की कीमत बढ़ सकती थी. इसका असर उन कंपनियों पर पड़ता जो अमेरिकी बाजार में अपने सामान की बिक्री पर निर्भर हैं. ज्यादा कीमत के कारण अमेरिकी खरीदार दूसरे देशों के विकल्प चुन सकते थे. इससे भारतीय निर्यात, कंपनियों के मुनाफे और नए व्यापारिक सौदों पर दबाव बढ़ने की आशंका थी. ट्रंप के फैसले से फिलहाल इन आशंकाओं को राहत मिली है. लेकिन इसे स्थायी राहत नहीं माना जा सकता. आने वाले दिनों में भारत-अमेरिका बातचीत और अमेरिकी प्रशासन के अगले फैसलों से साफ होगा कि यह राहत कितनी टिकाऊ साबित होती है.
ट्रंप ने क्यों रोका 100% टैरिफ?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुक्रवार देर रात जारी एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंधों और टैरिफ को फिलहाल लागू करने से छूट दी. उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस को भी प्रमाण दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में यह छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है. यह कदम 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' से जुड़ा है. इस कानून में रूस से तेल खरीदने वाले बड़े देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया था.
इसके संभावित दायरे में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देश शामिल थे. हालांकि, टैरिफ को फिलहाल रोकने का फैसला कानून के प्रावधानों को स्थायी रूप से खत्म नहीं करता. यानी अमेरिकी प्रशासन भविष्य में परिस्थितियों के आधार पर इन शुल्कों को लागू करने का विकल्प अपने पास रखता है.
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भारत-अमेरिका ट्रेड पर पहले से दबाव
भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्ते पिछले साल से टैरिफ के मुद्दे पर दबाव में रहे हैं. रूस से तेल खरीदने के मामले में भारत पर पहले 25% अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था. इसके अलावा 25% रेसिप्रोकल टैरिफ भी लागू किया गया था. इससे भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में कारोबार करना मुश्किल हो रहा था. भारत सरकार के लगातार प्रयासों के बाद ट्रंप प्रशासन ने अतिरिक्त 25% टैरिफ फरवरी 2026 में हटा दिया, जबकि रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18% किया गया. अब दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर भी बातचीत एडवांस स्टेज में है और बहुत जल्द इसे अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है.
रूस से तेल खरीद पर भारत का रुख
भारत लगातार कहता रहा है कि उसकी ऊर्जा नीति का मुख्य उद्देश्य देश के 140 करोड़ लोगों की जरूरतों और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देना है. विदेश मंत्रालय ने दोहराया है कि भारत अपने लोगों की ऊर्जा सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और ऊर्जा बाजार की बदलती परिस्थितियों के हिसाब से अलग-अलग स्रोतों से तेल और गैस खरीदता रहेगा. भारत के लिए रूस से तेल खरीद का मुद्दा केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है. इसका संबंध विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता और कीमतों से भी है.
अब 20 अक्टूबर की बैठक पर नजर
टैरिफ पर अस्थायी रोक के बीच भारत और अमेरिका के बीच बातचीत भी अहम हो गई है. 20 अक्टूबर को मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की बैठक प्रस्तावित है. इसमें द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की जाएगी. रुबियो 17 से 22 अक्टूबर तक भारत की यात्रा पर रहेंगे. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, दोनों पक्ष मौजूदा रिश्तों की स्थिति का आकलन करेंगे और सहयोग बढ़ाने के नए क्षेत्रों पर चर्चा करेंगे.
आजतक बिजनेस डेस्क