आरजेडी कार्यालय में सोमवार को आयोजित पर्वत पुरुष दशरथ मांझी की 19वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा में बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की जुबान फिसल गई. उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत में तेजस्वी यादव ने दशरथ मांझी की जगह दो बार जीतनराम मांझी का नाम ले लिया.
मंच पर मौजूद लोगों द्वारा टोके जाने के बाद उन्होंने अपनी बात सुधारते हुए दशरथ मांझी का नाम लिया. इस दौरान तेजस्वी ने दशरथ मांझी को भारत रत्न देने, पटना में प्रतिमा लगाने और आश्रम बनाने की भी मांग की.
तेजस्वी ने लोगों का जताया आभार
सोमवार को श्रद्धांजलि कार्यक्रम में तेजस्वी यादव ने शुरुआत में कहा कि आज जीतनराम मांझी के श्रद्धांजलि समारोह में उपस्थित सभी लोगों का वे आभार व्यक्त करता हूं. उनके मुंह से जीतनराम मांझी का नाम निकलते ही मंच पर मौजूद नेताओं और लोगों ने उन्हें तुरंत टोका. इसके बाद तेजस्वी ने फौरन खुद को संभालते हुए दशरथ मांझी का नाम लिया और सभा में दूर-दराज से पहुंचे मुसहर समाज के लोगों का आभार जताकर उन्हें नमन किया.
दशरथ मांझी के संघर्ष को तेजस्वी ने किया याद
तेजस्वी यादव ने दशरथ मांझी के ऐतिहासिक संघर्ष को याद करते हुए कहा कि उन्होंने पहाड़ काटकर रास्ता बनाने जैसा असंभव काम पूरा कर मिसाल पेश की. उनके संकल्प 'जब तक तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं' का उल्लेख करते हुए तेजस्वी ने उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग उठाई. इसके अलावा उन्होंने पटना के किसी प्रमुख चौराहे पर उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित करने और उनके नाम पर आश्रम बनाने की मांग रखी.
NDA सरकार पर साधा निशाना
नेता प्रतिपक्ष ने बीजेपी, जदयू और एनडीए पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग दशरथ मांझी के नाम पर सिर्फ राजनीति करते हैं, लेकिन उनके समाज की भलाई के लिए काम नहीं करते. उन्होंने दावा किया कि आरजेडी के समय गरीबों और दलितों को बसाया गया, जबकि वर्तमान एनडीए सरकार गरीबों को उजाड़ रही है. उन्होंने गरीबों को पानी, खाना, दवाई और रोजगार देने पर जोर दिया.
शशि भूषण कुमार