नवरात्र में घरों में कलश स्थापित होते हैं. पूजा पंडालों में भी कलश स्थापना होती है. भक्त मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और अपनी-अपनी मान्यताओं के मुताबिक साधना करते हैं. लेकिन बिहार के रोहतास जिले के सासाराम में एक भक्त की साधना का तरीका थोड़ा अलग है. यहां सुनील कुमार अपने सीने पर नौ कलश स्थापित करके मां दुर्गा की आराधना कर रहे हैं. उनका कहना है कि वह ऐसा पिछले 10 से 12 साल से करते आ रहे हैं.
जगह है सासाराम के मोहद्दीगंज की शिव दुर्गा पूजा समिति का पूजा पंडाल... नवरात्र के दौरान सीने पर नौ कलश रखे सुनील को देखने के लिए लोग पंडाल पहुंच रहे हैं. किसी के लिए यह गहरी आस्था का दृश्य है, तो किसी के लिए कौतूहल का विषय. इस पूरी कहानी में सिर्फ सीने पर रखे नौ कलश ही नहीं हैं. इसके साथ नौ दिनों का व्रत और साधना का एक ऐसा नियम भी जुड़ा है, जिसे निभाना आसान नहीं है.
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सुनील कुमार नौ दिनों तक निर्जला उपवास रखते हैं. यानी इस दौरान वह पानी भी नहीं पीते. व्रत शुरू होने से दो-तीन दिन पहले ही वह अन्न का त्याग कर देते हैं. इसके बाद नवरात्र के नौ दिन मां दुर्गा की आराधना में बिताते हैं. सुनील की इस साधना को कुछ लोग हठयोग से जोड़कर देखते हैं. हठयोग का नाम आते ही कठिन अनुशासन और शरीर पर कंट्रोल जैसी बातें सामने आती हैं.
फिलहाल, मोहद्दीगंज के पूजा पंडाल में सुनील कुमार की साधना नवरात्र की चर्चा का हिस्सा बनी हुई है. समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि सुनील कई वर्षों से मां की आराधना करते आ रहे हैं. नौ कलश, नौ दिन और आस्था से जुड़ा यह अनुष्ठान उनके लिए नवरात्र का हिस्सा है. नवरात्र में हर भक्त का पूजा करने का तरीका एक जैसा नहीं होता. कोई व्रत रखता है, कोई दुर्गा सप्तशती का पाठ करता है, तो कोई मंदिर जाकर माथा टेकता है. सासाराम के सुनील कुमार ने अपनी आस्था को एक कठिन अनुष्ठान का रूप दिया है.
रंजन कुमार