जन सुराज के संस्थापक और विधायक प्रशांत किशोर ने कहा कि हर छह महीने या हर साल, सरकार और मौजूदा सिस्टम को जवाबदेह ठहराने का मौका आता है. आज ऐसा ही एक मौका सामने आया है. उन्होंने कहा कि आपने NDA को वोट दिया और NDA की सरकार बनी.
भले ही इससे तुरंत सरकार न गिरे या मौजूदा व्यवस्था न बदले, लेकिन इससे एक मजबूत संदेश जाएगा. इससे सत्ता में बैठे लोगों में डर पैदा होगा. जिन लोगों ने उन्हें सत्ता में पहुंचाया, उन्हीं के पास उन्हें सत्ता से हटाने की भी ताकत है.
प्रशांत किशोर आगे कहते हैं कि बिहार की बागडोर संभालने वाले नेताओं, मुख्यमंत्री, कानून बनाने वालों और उस हालात पर सवाल उठाए जा रहे हैं जिसने बिहार के युवाओं को बिना किसी मकसद के भटकने पर मजबूर कर दिया है.
रेत खनन का संकट और रोजगार की कमी जैसे मुद्दों पर लोग जागरूक हो रहे हैं. वोट देते समय वे अब जाति और धर्म से ऊपर उठकर, और सिर्फ़ पांच किलो मुफ़्त अनाज के लालच से आगे बढ़कर सोचना शुरू कर रहे हैं.
जन सुराज संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा, पिछले 35 सालों से यहां की राजनीति पूरी तरह से 'फॉरवर्ड वर्सेस बैकवर्ड' के बंटवारे के इर्द-गिर्द घूमती रही है. तथ्यों पर नजर डालें तो OBC और यादव समुदाय से लालू यादव, फिर कुर्मी समुदाय से नीतीश कुमार और सत्ता में 30 साल रहने के बाद, उन्होंने आखिरकार जाति जनगणना करवाई.
उन्होंने कहा कि इससे पता चला कि आज भी OBC समुदाय के केवल 9 प्रतिशत युवा, केवल 9 प्रतिशत ही 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी कर पाते हैं. EBC समुदाय के लिए यह आंकड़ा 7 प्रतिशत है, और दलितों व मुसलमानों के लिए यह 5 प्रतिशत से भी कम है.
aajtak.in