शराबबंदी वाले बिहार में 'सूखा नशा' बना नई मुसीबत, हाजीपुर में 2 महीने में 100 से ज्यादा युवा HIV पॉजिटिव

बिहार में शराबबंदी को लागू हुए कई साल हो चुके हैं. लेकिन अब नशे का एक दूसरा रूप स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता की वजह बन रहा है. हाजीपुर में नशे के लिए इंजेक्शन का इस्तेमाल करने वाले युवाओं में HIV संक्रमण के मामले सामने आए हैं. स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, पिछले करीब डेढ़ से दो महीने में 100 से ज्यादा युवा HIV पॉजिटिव पाए गए हैं. इनमें बड़ी संख्या 25 से 30 साल की उम्र के युवाओं की बताई जा रही है.

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ड्रग्स के इस्तेमाल से जुड़ी है पूरी कहानी. (Photo: Screengrab) ड्रग्स के इस्तेमाल से जुड़ी है पूरी कहानी. (Photo: Screengrab)

विकाश कुमार

  • हाजीपुर ,
  • 26 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:34 PM IST

बिहार में शराबबंदी लागू है. लेकिन नशे का खेल खत्म नहीं हुआ. अब हाजीपुर से जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है. दावा है कि पिछले करीब डेढ़ से दो महीने में 100 से ज्यादा युवा HIV पॉजिटिव मिले हैं. इनमें बड़ी संख्या 25 से 30 साल की उम्र के युवाओं की बताई जा रही है.

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स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, इन मामलों में इंजेक्शन के जरिए नशा करने और एक ही सिरिंज को कई लोगों द्वारा इस्तेमाल करने की बात सामने आ रही है. यानी मामला सिर्फ नशे तक नहीं है. सिरिंज शेयर करने से HIV समेत खून से फैलने वाले संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है.

बिहार में सूखे नशे के बढ़ने का दावा किया जा रहा है. हालांकि शराबबंदी और इन HIV मामलों के बीच सीधा संबंध साबित करने के लिए अलग से ठोस आंकड़ों की जरूरत होगी. लेकिन स्वास्थ्य विभाग के सामने जो समस्या है, वो बिल्कुल वास्तविक है- इंजेक्शन से नशा करने वाले लोगों तक पहुंचना और उन्हें संक्रमण से बचाना.

जिला एड्स कंट्रोल अधिकारी डॉ. अजय के मुताबिक, ज्यादातर HIV संक्रमण के मामले दियारा और ग्रामीण इलाकों से सामने आ रहे हैं. यही बात विभाग के लिए ज्यादा चिंता की वजह है.

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इंजेक्शन से नशा करने वाले लोगों में अगर एक ही सिरिंज कई लोग इस्तेमाल करते हैं, तो संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है. मान लीजिए किसी व्यक्ति के खून में HIV मौजूद है और उसके इस्तेमाल की गई सिरिंज दूसरे व्यक्ति को लगा दी गई. ऐसी स्थिति में संक्रमित खून के जरिए वायरस दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है.

यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग अब हाई रिस्क वाले इलाकों पर फोकस कर रहा है. लेकिन सिर्फ उन्हीं इलाकों तक जांच सीमित नहीं रखी जा रही. दूसरे स्थानों पर भी जांच शिविर लगाए जा रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की पहचान की जा सके.

डेढ़ महीने में 100 से ज्यादा HIV पॉजिटिव

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले करीब डेढ़ से दो महीने में 100 से ज्यादा युवा HIV पॉजिटिव मिले हैं. उम्र की बात करें तो 25 से 30 साल के युवाओं की संख्या ने खास तौर पर चिंता बढ़ाई है. हालांकि HIV पॉजिटिव होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति की जिंदगी खत्म हो गई. HIV का इलाज और देखभाल उपलब्ध है. समय पर जांच और उचित इलाज से संक्रमित व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकता है. लेकिन समस्या तब बढ़ती है जब संक्रमण की जानकारी न हो और जोखिम वाला व्यवहार जारी रहे.

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अब स्वास्थ्य विभाग का फोकस क्या है?

जिला एड्स कंट्रोल अधिकारी डॉ. अजय के मुताबिक, विभाग का लक्ष्य संक्रमण को बड़े स्तर की समस्या बनने से पहले रोकना है. इसके लिए जांच शिविर बढ़ाए जा रहे हैं और हाई रिस्क वाले इलाकों में विशेष निगरानी की जा रही है. साथ ही उन लोगों तक पहुंचना भी जरूरी है, जो नशे के लिए इंजेक्शन का इस्तेमाल कर रहे हैं. क्योंकि सिर्फ HIV की जांच कर लेना काफी नहीं होगा. अगर सिरिंज शेयर करने जैसी वजहें जारी रहीं तो संक्रमण का खतरा बना रहेगा.

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