बिहार के कटिहार में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस लाइन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां एक शख्स करीब 10 से 12 दिनों तक पुलिसकर्मियों के साथ बैरक में रहा. वह खुद को पुलिसवाला बताता था. कभी कहता कि वह डायल 112 की गाड़ी चलाता है, तो कभी खुद को सैप जवान बताता था. उसके पास पुलिस जैसी वर्दी, जूते और आईडी कार्ड भी थे. लेकिन एक सिपाही को उसकी बातों और कामकाज पर शक हुआ. जांच हुई तो पता चला कि वह पुलिस विभाग का कर्मचारी ही नहीं है.
अब पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है. उसके पास से वर्दी, टोपी, जूते, फर्जी पहचान पत्र और मोबाइल फोन समेत कई सामान मिले हैं. अब पुलिस यह पता लगा रही है कि वह इतने दिनों तक पुलिस लाइन में क्यों रहा और वहां उसकी असली मंशा क्या थी. पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार शख्स की पहचान दीपक कुमार उर्फ दिलखुश कुमार के रूप में हुई है. वह मूल रूप से सहरसा जिले के डेरार थाना क्षेत्र के बरहड़ा गांव का रहने वाला है.
दीपक कटिहार पुलिस लाइन के सिपाही बैरक नंबर 100 में रह रहा था. वहां मौजूद दूसरे जवानों को वह खुद को डायल 112 का ड्राइवर और सैप जवान बताता था. इस तरह वह करीब 10 से 12 दिनों तक पुलिसकर्मियों के बीच रहा.
इसी दौरान कटिहार जिला बल में तैनात सिपाही सुनील कुमार महतो को उसकी बातों पर शक हुआ. उसे दीपक की बताई गई ड्यूटी और उसकी गतिविधियां ठीक नहीं लगीं. सुनील ने जानकारी पुलिस लाइन की परिवहन शाखा के प्रभारी सार्जेंट को दी. इसके बाद जब सार्जेंट ने रिकॉर्ड खंगाले और जानकारी जुटाई, तो पता चला कि दीपक नाम का कोई व्यक्ति न तो डायल 112 की गाड़ी का ड्राइवर है और न ही हाइवे पेट्रोलिंग वाहन में उसकी ड्यूटी लगी है.
तलाशी में मिली वर्दी, जूते और फर्जी पहचान पत्र
शक पुख्ता होने के बाद अधिकारियों की मौजूदगी में दीपक की तलाशी ली गई. पुलिस के मुताबिक, उसके पास से कैमोफ्लाज यानी सेना जैसी दिखने वाली वर्दी का एक सेट, टोपी, जूते, फर्जी पहचान पत्र, मोबाइल फोन और वर्दी पहनकर खिंचवाई गई दो तस्वीरें मिलीं.
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इसके अलावा उसके पास से पर्स और कुछ कागजात भी बरामद किए गए हैं. बरामद सामान में बिहार पुलिस और बिहार मिलिट्री पुलिस यानी BMP लिखे पर्स भी शामिल बताए गए हैं. पुलिस इन पहचान पत्रों और कागजात की जांच कर रही है. सवाल यह है कि दीपक ने ये वर्दी और पहचान पत्र कहां से बनवाए? क्या वह पहले भी इसी तरह किसी दूसरी जगह खुद को पुलिसकर्मी बताकर रह चुका है? फिलहाल पुलिस इन सभी बातों की जांच कर रही है.
पुलिस लाइन में रहकर क्या कर रहा था?
इस मामले की गंभीरता इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि पुलिस लाइन कोई आम जगह नहीं होती. यहां पुलिस के जवान और अधिकारी रहते हैं. इसके अलावा शस्त्रागार और प्रोटेक्टेड ऑफिस जैसे जरूरी ठिकाने भी इसी परिसर में होते हैं. यहां पुलिस से जुड़े कई जरूरी दस्तावेज और सामान रखे जाते हैं. ऐसे में किसी बाहरी व्यक्ति का फर्जी पहचान के सहारे इतने दिनों तक बैरक में रहना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है.
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पुलिस को शक है कि दीपक पुलिस लाइन के शस्त्रागार और प्रोटेक्टेड ऑफिस जैसे जरूरी ठिकानों की रेकी कर रहा हो सकता है. एक और सवाल जांच के दायरे में है कि आखिर वह पुलिस लाइन के अंदर दाखिल कैसे हुआ? क्या किसी ने उसकी पहचान की जांच नहीं की या उसने किसी तरह जवानों का भरोसा जीत लिया था? पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि उसे बैरक में रहने की जगह किसने और किन हालात में दी.
इस पूरे मामले को लेकर DSP ने क्या बताया?
कटिहार सदर के DSP विशाल आनंद ने बताया कि 4 नवंबर को पुलिस लाइन में एक व्यक्ति के फर्जी तरीके से रहने की सूचना मिली थी. जांच में पता चला कि वह पुलिसकर्मी नहीं है और खुद को पूर्व सैनिक तथा डायल 112 का ड्राइवर बता रहा था. इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया. उसके पास से कैमोफ्लाज वर्दी, जूते, फर्जी पहचान पत्र, मोबाइल फोन और वर्दी में खिंचवाई गई दो तस्वीरें बरामद हुई हैं.
DSP के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ संबंधित सहायक थाने में FIR दर्ज की गई है. पुलिस यह पता लगा रही है कि वह 10-12 दिनों से पुलिस लाइन में क्यों रह रहा था, उसका मकसद क्या था और उसे अंदर आने की जगह कैसे मिली. फिलहाल दीपक पुलिस की गिरफ्त में है और पूरे मामले की जांच जारी है.
बिपुल राहुल