नेता दोनों ही जेडीयू के हैं. एक विधायक, एक एमएलसी. विधायक अनंत सिंह हैं, एमएलसी नीरज कुमार. लेकिन दोनों के बीच टकराव एकदम दो कट्टर विरोधियों जैसा है. इस टक्कर की तारीख आ गई है. दरअसल पटना-मोकामा का पुराना झगड़ा फिर से गर्म हुआ पड़ा है. मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह और जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार इस 23 अक्तूबर को सियासी मैदान में आमने-सामने होंगे.
बिहार के छोटे सरकार अनंत सिंह इस विवाद से सीधे नहीं जुड़े हैं. लेकिन बिहार ब्रांड की राजनीति जहां सिपहसालारों के जोर पर सत्ता हासिल की जाती है और कायम रखी जाती है वहां अनंत सिंह ने एमएलसी के इस चुनाव को अपनी मूंछ की लड़ाई बना ली है.
पहले विवाद को समझिए
ये विवाद नया नहीं है, 2015 से चल रहा है और अब पटना स्नातक एमएलसी चुनाव के नाम पर फिर से गरमा गया है. 23 अक्तूबर को पटना के 8 एमएलसी सीटों के लिए चुनाव होने वाला है.
इस वक्त जेडीयू नेता नीरज कुमार पटना ग्रेजुएट सीट से MLC हैं. उनका कार्यकाल 16 नवंबर को खत्म होने वाला है. टीवी चैनलों और मीडिया पर जेडीयू का पक्ष रखने वाले नीरज कुमार ने इस सीट से फिर दावेदारी ठोक दी है. लेकिन इस सीट में अच्छा खासा होल्ड रखने वाले अनंत सिंह ने कह दिया है कि वे नीरज कुमार को सपोर्ट नहीं करेंगे.
इस सीट के लिए उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार अनुज कुमार सिंह को अपनी पसंद बताया है. अनुज कुमार सिंह नवादा के हैं और जन सुराज से चुनाव लड़ चुके हैं.
अनंत कुमार अपनी ही पार्टी के नीरज कुमार को क्यों सपोर्ट नहीं कर रहे हैं, इस अदावत की कहानी हम आगे बताएंगे, लेकिन पहले आप पटना ग्रेजुएट सीट को समझिए
कैसी होती हैं ग्रेजुएट सीटें
पटना ग्रेजुएट सीट बिहार विधान परिषद की Graduates’ Constituency है. यह आम विधानसभा सीट जैसी नहीं होती, बल्कि यहां वही लोग वोट डाल सकते हैं जो इस सीट की मतदाता सूची में ग्रेजुएट के तौर पर पंजीकृत हों और चुनाव आयोग की तय शर्तें पूरी करते हों. यहां मतदाता बनने के लिए कम से कम तीन साल पहले से ग्रेजुएट होना जरूरी है.
इस सीट में पटना, नालंदा और नवादा जिले आती हैं. यानी पटना ग्रेजुएट सीट का दायरा सिर्फ पटना शहर या पटना जिले तक सीमित नहीं है. इस सीट से विधान परिषद में एक एमएलसी चुना जाता है. कम मतदाता होने की वजह से हर एक मतदाता जरूरी और अहम होता है.
इस चुनाव की एक खास बात यह है कि यहां वोटर सामान्य विधानसभा चुनाव के सभी मतदाता नहीं, बल्कि अलग से तैयार की गई Graduates’ Electoral Roll में दर्ज पात्र मतदाता होते हैं।. इसके लिए चुनाव आयोग के Form-18 के जरिए पंजीकरण होता है.
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद क्यों हैं?
इस विवाद की शुरुआत 2015 के विधानसभा चुनाव से हुई थी. अनंत सिंह का तब मोकामा में सिक्का चलता था. अनंत सिंह की राजनीति दबंगई और बाहुबल के आधार पर चलती है. 2015 में अनंत सिंह हत्या के एक केस में जेल चले गए. विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने उन्हें टिकट नहीं दिया, बल्कि नीरज कुमार को उम्मीदवार बना दिया.
लेकिन अनंत सिंह की राजनीति मोकमा में काफी प्रभावशाली रही है और उनकी घर घर तक पहुंच है. अनंत सिंह जेल से ही निर्दलीय लड़े और नीरज कुमार को करीब अठारह हजार वोट से हरा दिया. तब से दोनों के बीच खटास बनी हुई है.
अनंत सिंह का आरोप है कि जब-जब उन्होंने चुनाव लड़ा, नीरज कुमार अंदर-बाहर से उनका विरोध करते रहे. ललन सिंह के चुनाव में भी उन्होंने विरोध किया था.
सबसे बड़ा मामला 2019 का एके-सैंतालीस वाला है. पुलिस ने अनंत सिंह के पैतृक घर लदमा में छापा मारा और एके-सैंतालीस राइफल के साथ गोला-बारूद बरामद किया. अनंत सिंह सीधा आरोप लगाते हैं कि नीरज कुमार की साजिश से उनके घर में हथियार रखवाया गया औऱ उन्हें जेल भिजवा दिया गया.
अनंत सिंह ने कहा, 'ओकरे कारण हम निर्दलीय लड़े, मोबाइल खोलिए कुल बात मिलेगा. घर में AK-47 रखकर हमको पकड़वाया, उसके बाद जेल में सजा करवाया, साबित करना हो तो बोलो नरको टेस्ट एगो होता है, उ माथा में लगा दिया जाता है तो ऑरिजिनल निकल जाता है."
जेडीयू एमएलए ने शर्त तक लगा दी और महावीर मंदिर के सामने आमने-सामने डिबेट की चुनौती दे दी.
फिर बिहार वाला रंग भी इस लड़ाई में खूब चढ़ा. अनंत सिंह ने मोकामा में नीरज कुमार को सार्वजनिक बहस की चुनौती दे दी. महावीर मंदिर में डिबेट का चैलेंज दिया गया. इसके बाद जुबानी तीर और तेज हो गए. अनंत ने नीरज पर बेहद तीखी टिप्पणी की तो नीरज ने भी पलटवार करते हुए कहा कि जो जमानत लिखना तक नहीं जानते, वे उनकी जमानत जब्त कराने की बात कर रहे हैं.
अनंत सिंह ने यहां तक कहा कि अगर नीरज कुमार उनके साथ दो करोड़ रुपये लेकर बैठ जाएं और बहस में जीत जाएं तो वह चार करोड़ रुपये दे देंगे. इस पूरे विवाद में व्यक्तिगत आरोपों और सार्वजनिक चुनौतियों का सिलसिला इतना बढ़ गया कि जेडीयू नेतृत्व को बीच-बचाव करना पड़ा.
बता दें कि दोनों नेता भूमिहार समुदाय से हैं, मोकामा क्षेत्र के रहने वाले हैं और नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं, फिर भी ये अदावत नहीं मिट रही है.
नीरज कुमार ने कहा, "करोड़ों अनंत सिंह पैदा ले लेगा ना 1 करोड़, ये सब को कलेजा में दम है. आंख मिला के बात किया है हमसे. कौन-कौन घूम रहा है साथ में? सबका हम फुटेज देखे हैं. गुंडा बदमाश, मवाली लेके घूमते हो, बैठाते हो अगल-बगल. और उसके चक्कर में पड़े हो सब. सबका जन्म टिपन हम निकाले हैं. किस पर कितना मुकदमा है? कौन-कौन फरार है। हम सचेत कर दे रहे हैं. कानून का राज है."
MLC चुनाव का शेड्यूल
चुनाव के लिए नोटिफ़िकेशन 29 सितंबर को जारी किया जाएगा, जबकि नॉमिनेशन भरने की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है. नॉमिनेशन की जांच 7 अक्टूबर को होगी और उम्मीदवार 9 अक्टूबर तक अपना नॉमिनेशन वापस ले सकते हैं. वोटिंग 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक होगी और वोटों की गिनती 27 अक्टूबर को होगी.
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