धारा परिवर्तन, तटबंधों में लगातार बदलाव और कम होती चौड़ाई... कोसी नदी की तबाही के ये हैं 5 कारण

कोसी नदी के बारे में कहा जाता है कि यह लगातार दिशा बदलते रहती है जिसकी वजह से हर बार नए इलाके इसकी चपेट में आ जाते हैं. जैसे ही कोसी नदी बड़ी नदियों में मिलती है तो पानी का फ्लो तेज हो जाता है  और यह विभिन्न क्षेत्रों में फैल जाता है.

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बिहार में बाढ़ से कई जिलों में जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है बिहार में बाढ़ से कई जिलों में जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है

किशोर जोशी

  • नई दिल्ली,
  • 03 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 2:46 PM IST

बिहार एक बार फिर सैलाब के आगे सरेंडर करता दिख रहा है. वर्षों से बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा झेलने वाले बिहार में बारिश नहीं हो रही है लेकिन आफत सीधे आसमान से बरस रही है. पानी ने ऐसा प्रकोप दिखाया कि हजारों लोग पलायने को मजबूर हैं. बाढ़ से खेतों में पानी भर चुका है, सैकड़ों एकड़ खेती बर्बाद हो चुकी है. बाढ़ ने खेती ही नहीं बल्कि लोगों के घर भी उजाड़ दिए हैं. बुजुर्ग हों या बच्चे, महिलाएं हों या युवा, सभी बाढ़ के कहर के आगे बेबस नजर आ रहे हैं.

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बिहार के 16 जिले पूरी तरह जलमग्न हैं और कोसी और उसकी सहायक नदियों के अलावा अन्य नदियां भी उफान पर हैं. दरअसल बिहार में बाढ़ से आई तबाही की मुख्य वजह नेपाल में हुई मूसलाधार बारिश है जिसके बाद  कोसी और वाल्मीकि नगर बैराज से पानी छोड़ा गया. इससे राज्य में हालात बेकाबू हो गए हैं. अब कोसी से लेकर गंडक, कमला और बागमती जैसी नदिया रौद्र रूप धारण किए हुए हैं. तो आइए जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर बिहार में बाढ़ की बड़ी वजहें कौन सी हैं-

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लगातार दिशा बदलते रहती है कोसी
कोसी नदी तिब्बत-नेपाल के हिमालय से निकलती है. भीमनगर के रास्ते भारत में प्रवेश करते हुए कोसी 250 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय करती है. बिहार के पूर्णिया से होते हुए कटिहार के कुरसेला में गंगा से मिल जाती है. इस नदी को बिहार का श्राप कहा जाता है क्योंकि हर साल सबसे ज्यादा तबाही यही लेकर आती है. इसे सप्तकोशी भी कहते हैं क्योंकि इसकी सात शाखाएं हैं. इसमें चीन और तिब्बत से उत्पन्न होने वाली नदियां भी मिलती हैं. कोसी बिहार में महानंदा और गंगा में मिलती है.अररिया, मधेपुरा, पूर्णिया, सहरसा, कटिहार जिलों में कोसी की कई शाखाएं हैं.

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कोसी नदी के बारे में कहा जाता है कि यह लगातार दिशा बदलते रहती है जिसकी वजह से हर बार नए इलाके इसकी चपेट में आ जाते हैं. जैसे ही कोसी नदी बड़ी नदियों में मिलती है तो पानी का फ्लो तेज हो जाता है  और यह विभिन्न क्षेत्रों में फैल जाता है. इन बड़ी नदियों में मिलने से विभिन्न क्षेत्रों में पानी का दबाव और भी बढ़ जाता है. बिहार और नेपाल में कोसी बेल्ट शब्द काफी लोकिप्रय है. इसका अर्थ उन इलाकों से हैं, जहां कोसी का प्रवेश है.

तटबंध भी नहीं टिके 
बाढ़ के पानी को रोकने के लिए कई प्रयास किए गए.  1954 में बांध बनाकर पहला प्रयास किया गया लेकिन यह सफल नहीं हो सका. तब राज्य में कुल 160 किलोमीटर इलाके में तटबंध बने थे और बाढ़ प्रभावित कुल इलाकों का आकलन था 25 लाख हेक्टेयर इलाका. तब से अबतक राज्य में 13 नदियों पर 4 हजार किमी से अधिक एरिया में तटबंध बनाए जा चुके हैं लेकिन बाढ़ के हालात में कोई बदलाव नहीं देखने को मिला. उल्टे इन सात दशकों में बिहार में बाढ़ के खतरे वाला इलाका बढ़कर करीब 70 लाख हेक्टेयर हो गया है क्योंकि नदियों का लगातार विस्तार हो रहा है.

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लगातार मरम्मत के काम और रखरखाव के खर्च के बावजूद हर साल जगह-जगह तटबंध टूट जाते हैं और आसपास के इलाकों में बसे लोगों का सबकुछ बहा ले जाती है बाढ़. बिहार के जल संसाधन विभाग की 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक विभिन्न नदियों पर बने तटबंधों में पिछले तीन दशकों में 400 से अधिक दरारें आईं और बाढ़ का कारण बनीं.हर साल फिर करोड़ों लगाकर इनकी मरम्मत होती है लेकिन फिर मॉनसून आते ही हालात जस के तस हो जाते हैं. एक्सपर्ट और बिहार की सरकार भी मानती है कि तटबंधों का निर्माण बाढ़ का टेंपररी समाधान ही है. लेकिन इसके आगे कोई ठोस प्लान नहीं दिखता. 

डैम नहीं होना
विशेषज्ञ और पर्यावरणविद् मानते हैं कि नेपाल में जब तक कोसी नदी पर बड़ा डैम नहीं बनता तब तक बाढ़ की समस्या का शायद ही कोई समाधान निकल पाए. ऐसा नहीं है कि डैम बनाने के लिए कोशिश नहीं हुई, भारत और नेपाल के बीच इसे लेकर कई दौर की बातचीत हुई पर अभी तक फैसले का इंतजार है. नेपाल के लोग इस डैम का विरोध यह कहते हुए करते हैं कि इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा और उनका एक बड़ा हिस्सा इसमें डूब जाएगा.   

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सिल्ट की समस्या

नेपाल से निकलने वाली सप्तकोशी (सात नदियों) का पानी भीमनगर बैराज में आकर गिरता है. कुछ साल पहले एक अध्ययन में यह बात सामने निकलकर आई थी कि कोसी में बाढ़ आने की वजह से कई टन सिल्ट यानि गाद कोसी नदी के सतह में जमा हो गई है और यह लगातार बढ़ती जा रही है. लगातार सिल्ट बढ़ने से नदी की गहराई कम हो गई है और चौड़ाई भी कम हो गई है. सिल्ट की वजह से सरकार द्वारा बनाए जा रहे है तटबंधों की ऊंचाई ज्यादा हो गई है. इससे रिसाव और तटबंध के इलाके में बाढ़ का खतरा बना रहता है.

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ज्यादा बारिश
कोसी नदी में सालाना 2,500 मिमी से अधिक वर्षा होती है, जिसमें से 80% वार्षिक बारिश जून और सितंबर के बीच होती है. भारी बारिश की वजह से ही नेपाल से पानी छोड़ा जाता है जो बिहार में तबाही का कारण बनता है.

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