सीएनजी गाड़ियों की सेफ्टी और बेहतर करने के लिए आईजीएल (इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड) ने टेक्नोलॉजी बेस्ड ऑटोमेटेड व्हीकल रिकग्निशन और वेरिफिकेशन सिस्टम की शुरुआत की है. अभी ये सिस्टम सिर्फ 10 आईजीएल (IGL) स्टेशन पर शुरू किया गया है.
इस सिस्टम की मदद से गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नंबर और सीएनजी सिलेंडर के हाइड्रो-टेस्ट सर्टिफिकेट के रिकॉर्ड को मैच किया जाएगा. इसकी मदद से ऐसी गाड़ियों की पहचान हो सकेगी, जिनके सीएनजी सिलेंडर का हाइड्रो-टेस्ट सर्टिफिकेट एक्सपायर हो चुका है. या फिर जिनका सर्टिफिकेट वैलिड नहीं है. ये एक बड़े डिजिटल सेफ्टी सिस्टम की शुरुआत है.
टेक्नोलॉजी बेस्ड इस सिस्टम में कैमरे की मदद से गाड़ियों के नंबर (रजिस्ट्रेशन नंबर) को कैप्चर किया जाता है. उस नंबर को वेरिफाई किया जाता है. इसके बाद रजिस्ट्रेशन डिटेल को एआई बेस्ड ऐप्लिकेशन में प्रॉसेस किया जाता है. ये सिस्टम सीएनजी सिलेंडर से जुड़ी डिटेल्स को वेरिफाई करता है.
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इसके बाद पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) के पोर्टल के जरिए सिलेंडर की वैलिडिटी चेक की जाएगी. सिस्टम ये बताएगा कि गाड़ी में लगा सीएनजी सिलेंडर वैलिड है या उसका हाइड्रो-टेस्ट एक्सपायर हो चुका है. इससे स्टेशन पर रियल-टाइम में सीएनजी सिलेंडर से जुड़ी डिटेल्स मिलेंगी.
अगर वाहन का सर्टिफिकेट वैलिड नहीं है, तो स्टेशन पर अलर्ट भी जारी किया जाएगा. इस ऑटोमेटिड सिस्टम की वजह से मैन्युअल तरीके से होने वाली जांच पर निर्भरता कम होगी. साथ ही एक डेटा सेट भी तैयार किया जा सकेगा, जिसका इस्तेमाल सेफ्टी नॉर्म्स का पालन नहीं करने वाली सीएनजी गाड़ियों को रोकने में मिल जा सकेगा.
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ऐसे गाड़ियों में सीएनजी रिफ्यूलिंग को रोका जा सकेगा. आईजीएल आने वाले दिनों में इस टेक्नोलॉजी को अपने सभी स्टेशनों पर लागू करने की तैयारी में है. नियमों के मुताबिक हर सीएनजी सिलेंडर की 3 साल में एक बार पीईएसओ से अप्रूव्ड सिलेंडर टेस्टिंग सेंटर पर हाइड्रो टेस्टिंग कराना जरूरी है.
आशुतोष मिश्रा