Ethanol Powered EV Charger: भारत में E20 पेट्रोल को लेकर बहस अभी थमी भी नहीं है कि इथेनॉल ने एक और बड़े बदलाव की दस्तक दे दी है. अब इथेनॉल सिर्फ पेट्रोल में मिलाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे इलेक्ट्रिक गाड़ियों को चार्ज करने के लिए बिजली भी बनाई जाएगी. देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन कई जगह अब भी चार्जिंग स्टेशन की कमी सबसे बड़ी परेशानी बनी हुई है. खासकर हाईवे और दूरदराज के इलाकों में जहां बिजली की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है.
अब तेलंगाना ने इस समस्या का एक नया ढूढा है. राज्य में 150kW का इथेनॉल से चलने वाला EV चार्जिंग सिस्टम लॉन्च किया गया है, जो पावर ग्रिड पर डिपेंड नहीं रहेगा बल्कि ये इथेनॉल से तैयार बिजली से गाड़ियों को चार्ज करेगा. इसे दुनिया का पहला इथेनॉल बेस्ड EV चार्जिंग सॉल्यूशन बताया जा रहा है.
कैसे काम करता है यह चार्जिंग सिस्टम
इस नई तकनीक में 150kW का फास्ट EV चार्जर और इथेनॉल से बिजली बनाने वाले सिस्टम को एक साथ जोड़ा गया है. यानी यह सिस्टम पहले इथेनॉल की मदद से बिजली तैयार करता है और फिर उसी बिजली से इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करता है. इससे चार्जिंग स्टेशन को हर समय ट्रेडिशनल इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड पर निर्भर नहीं रहना पड़ता.
9 मीटर सेगमेंट में Keto Motors के पहले इलेक्ट्रिक कमर्शियल बस के लॉन्च के मौके पर केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि, कंपनी ने एक ख़ास इक्यूपमेंट डेवलप किया है जिसकी मदद से इलेक्ट्रिक वाहनों को ट्रेडिशनल बिजली की बजाय इथेनॉल की मदद से तैयार की गई इलेक्ट्रिसिटी से चार्ज किया जा सकेगा. उनके मुताबिक यह तकनीक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और भारत में तेजी से बढ़ रहे इथेनॉल के इस्तेमाल को एक साथ जोड़ती है. इससे ग्रीन एनर्जी और मोबिलिटी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
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आज ज्यादातर फास्ट EV चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए भारी क्षमता वाले बिजली कनेक्शन, कई तरह की मंजूरियां और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है. यही वजह है कि कई जगह चार्जिंग स्टेशन तैयार होने में काफी समय लग जाता है. खासकर हाईवे, रिमोट एरिया और उन इलाकों में जहां बिजली की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है.
ऐसे में इथेनॉल बेस्ड यह सिस्टम इलेक्ट्रिसिटी की इस बड़ी समस्या को काफी हद तक कम करने में मदद करेगा. क्योंकि यह खुद बिजली बनाता है, इसलिए इसे ऐसे जगहों पर भी लगाया जा सकता है जहां ग्रिड कनेक्शन उपलब्ध नहीं है.
72 घंटे में शुरू हो सकता है चार्जिंग स्टेशन
इस तकनीक का सबसे बड़ा दावा इसकी तेज इंस्टॉलेशन है. जानकारी के मुताबिक यह चार्जिंग यूनिट सिर्फ 72 घंटे में चालू की जा सकती है. वहीं ट्रेडिशनल चार्जिंग स्टेशन शुरू करने में कई बार बिजली कनेक्शन, मंजूरियों और अन्य तैयारियों के कारण काफी ज्यादा समय लग जाता है. बताया गया है कि इस नई तकनीक से चार्जिंग स्टेशन लगाने की लागत और सेटअप का समय 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है. इससे उन इलाकों में तेजी से चार्जिंग नेटवर्क तैयार करने में मदद मिलेगी जहां EV की संख्या बढ़ रही है लेकिन इलेक्ट्रिसिटी इंफ्रा अभी उतना मजबूत नहीं है.
डीजल जनरेटर का विकल्प
अभी कई दूरदराज के चार्जिंग स्टेशनों पर बिजली की कमी होने पर डीजल जनरेटर का इस्तेमाल किया जाता है. नया इथेनॉल बेस्ड सिस्टम इसकी जगह ले सकता है. दावा किया गया है कि यह तकनीक डीजल जनरेटर की तुलना में कार्बन उत्सर्जन को 80 प्रतिशत तक कम कर सकती है. यह सिस्टम बिजली का इस्तेमाल खत्म नहीं करता, बल्कि बिजली बनाने का तरीका बदल देता है.
इसमें इथेनॉल से बिजली तैयार की जाती है और फिर उसी बिजली के जरिए 150kW फास्ट चार्जर इलेक्ट्रिक वाहन को चार्ज करता है. अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है, तो भविष्य में हाईवे, फ्लीट डिपो, रिमोट एरिया और कम बिजली वाले इलाकों में EV चार्जिंग नेटवर्क को तेजी से बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है.
आजतक ऑटोमोबाइल डेस्क