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चेरी की गुठली से घर पर उगाएं पेड़, आसान है तरीका, जानें कब आएंगे फल

भारत में कश्मीर में चेरी ब्लॉसम के पेड़ देखने को मिलते हैं. इसके अलावा उत्तर-पूर्व भारत के कुछ हिस्सों में भी चेरी ब्लॉसम जैसे फूलों वाले पेड़ लगाए जाते हैं.

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चेरी की गुठली से पौधा उगाने का तरीका
चेरी की गुठली से पौधा उगाने का तरीका

चेरी खाने के बाद अक्सर लोग उसकी गुठली फेंक देते हैं, लेकिन अगर आप चाहें तो इसी गुठली से घर में चेरी का पेड़ उगा सकते हैं. हालांकि बीज से चेरी का पेड़ तैयार करना थोड़ा लंबा और धैर्य वाला काम है, लेकिन सही तरीके से देखभाल करने पर यह आपके गार्डन की खूबसूरती बढ़ा सकता है.

चेरी का पेड़ सिर्फ अपने मीठे और रसीले फलों के लिए ही नहीं, बल्कि खूबसूरत फूलों के लिए भी जाना जाता है. वसंत ऋतु में चेरी के पेड़ों पर आने वाले सफेद और गुलाबी फूल बेहद आकर्षक लगते हैं. जापान का प्रसिद्ध सकूरा (Sakura) भी चेरी परिवार से जुड़े पेड़ों की एक किस्म है, जो अपने शानदार फूलों के लिए दुनियाभर में मशहूर है. हालांकि सकूरा और फल देने वाला चेरी का पेड़ अलग-अलग किस्में हैं.

चेरी की गुठली से पौधा उगाने का तरीका

गुठली को तैयार करें
चेरी खाने के बाद उसकी गुठली को अच्छी तरह धोकर साफ करें और कुछ दिनों तक सुखा लें. गुठली पर फल का गूदा नहीं रहना चाहिए, वरना उसमें फफूंद लग सकती है.

ठंडे तापमान की जरूरत
चेरी के बीज को अंकुरित होने के लिए ठंडे मौसम जैसी स्थिति चाहिए होती है. इसके लिए गुठली को नम पेपर टॉवल में लपेटकर कुछ हफ्तों तक फ्रिज में रखा जाता है. इस प्रक्रिया को कोल्ड स्ट्रैटिफिकेशन कहा जाता है.

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गमले में लगाएं
जब बीज में अंकुर निकलने लगे तो इसे अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में करीब एक इंच गहराई में लगाएं. पौधे को ऐसी जगह रखें जहां पर्याप्त धूप आती हो और मिट्टी हल्की नम रहे.

कब आएंगे चेरी के फल?

बीज से उगाए गए चेरी के पेड़ को फल देने में काफी समय लग सकता है. आमतौर पर ऐसे पेड़ों पर फल आने में 7 से 10 साल तक का समय लग सकता है. साथ ही यह भी जरूरी नहीं है कि बीज से उगा पेड़ बिल्कुल उसी स्वाद और आकार की चेरी दे, जिस फल से गुठली ली गई थी. अगर आप जल्दी फल पाने चाहते हैं तो नर्सरी से तैयार या ग्राफ्टेड चेरी का पौधा लगाना बेहतर विकल्प माना जाता है.

किन जगहों पर उगा सकते हैं चेरी का पेड़?

चेरी के पेड़ को ठंडा मौसम पसंद होता है. भारत में यह जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे ठंडे क्षेत्रों में बेहतर बढ़ सकता है. गर्म इलाकों में इसे उगाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

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