
उत्तर प्रदेश को कभी बीमारू राज्य के रूप में देखा जाता था, गांव और कस्बों में बनने वाले प्रोडक्ट सिर्फ लोकल बाजार तक सीमित रह जाते थे. कारीगर मेहनत मशक्कत से बेहतर प्रोडक्ट बनाते थे, लेकिन मार्केंटिंग और ब्रांडिंग न होने से उचित दाम नहीं मिल पाता था. योगी सरकार ने ऐसी योजना शुरू की, जिसने कारीगरों की सिर्फ तकदीर ही नहीं बल्कि उनके हुनर को एक पहचान दी है.
यूपी आज देश के सबसे बड़े 'एक्सपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग हब' में बदल रहा है. इस बदलाव के पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी सोच और 2018 में शुरू की गई 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट' योजना है. यह योजना उत्तर की आर्थिक प्रगति का पावरहाउस बन चुकी है और यूपी के छोटे जिलों में हो रहे शानदार काम को लोकल से नेशनल और ग्लोबल बना दिया है.
योगी सरकार में शुरू हुई वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट ने गांव-कस्बों के प्रोडक्ट्स और हुनर को नई पहचान देने का काम किया है. यह योजना यूपी के खास और लोकल प्रोडक्ट्सस क्राफ्ट्स को बढ़ावा देता है. इस योजना ने न केवल दम तोड़ते पारंपरिक उद्योगों को पुनर्जीवित किया, बल्कि उत्तर प्रदेश के स्थानीय हुनर को 'लोकल से ग्लोबल' बनाकर लाखों कारीगरों की किस्मत बदल दी है.
योगी सरकार में शुरू हुई ODOP योजना
उत्तर प्रदेश में 14 साल के सियासी वनवास के बाद 2017 में जब सरकार बनी तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बने. सीएम योगी आदित्यनाथ सूबे की आर्थिक प्रगति के लिए हर जिले के प्रोडक्ट को पहचान देने के लिए 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट'(ODOP) योजना शुरू की. 2018 में एक छोटे से कदम के रूप में शुरू हुई यह पहल अब प्रदेश की अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव का सबसे बड़ा माध्यम बन गई है.

योगी सरकार की 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को ट्रेनिंग, टूलकिट और फाइनेंशियल सपोर्ट देकर आत्मनिर्भर बनाना है. इसकी वजह यह थी कि कभी गांव और कस्बों में बनने वाले कई प्रोडक्ट सिर्फ लोकल बाजार तक सीमित रह जाते थे.लोगों को यह भी पता नहीं चलता था कि यूपी के छोटे जिलों में इतना शानदार काम होता है, लेकिन योगी सरकार की इस योजना ने पूरी तस्वीर ही बदल गई है.
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ODOP यानी वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट ने गांव-कस्बों के प्रोडक्ट्स को नई पहचान देने की कोशिश की है. ODOP की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, सरकार की इस योजना यूपी के खास और लोकल प्रोडक्ट्स व क्राफ्ट्स को बढ़ावा देता है. इसका आसान आइडिया है कि हर जिले की एक खास पहचान हो और उस पहचान को मार्केट, ब्रांडिंग, ट्रेनिंग और फाइनेंस से सपोर्ट दिया जा रहा है. सरकार की ओर से कारीगरों को निःशुल्क प्रशिक्षण और टूल किट प्रदान किया जाता है. योजना के तहत कारीगरों को मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना के माध्यम से 5 लाख रुपए तक का बीमा सुरक्षा कवच भी दिया जा रहा है.
लोकल प्रोडक्ट को नेशनल पहचान
यूपी में जो प्रोडक्ट पहले लोकल मंडी या छोटी दुकान तक सीमित रहता था, वो अब नेशनल और ग्लोबल मार्केट में अपनी पहचान बना रहे. बीते 9 सालों में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के जरिए 1 लाख 46 हज़ार से ज्यादा कारीगरों को बकायदा ट्रेनिंग देने का काम किया गया और 20 हज़ार से अधिक उद्यमियों ने इस योजना का सीधा लाभ उठाया है.
बजट सत्र 2026-27 के दौरान प्रदेश के एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने विधानसभा में बताया था कि वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना केवल उत्पादों की ब्रांडिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि कारीगरों के जीवन में सामाजिक और आर्थिक पुनर्जागरण की नींव रखी है. ओडीओपी ने यूपी के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है.
2017-18 में उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात जो मात्र 86 हजार करोड़ रुपये का था, वह अब बढ़कर 1.84 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. इस कुल निर्यात में करीब 50 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले ओडीओपी और हस्तशिल्प उत्पादों की है. इस योजना ने अब तक 3.16 लाख लोगों के लिए रोजगार के रास्ते खोले हैं.

यूपी में हर जिले का एक लोकल प्रोडक्ट
उत्तर प्रदेश के हर जिले का अपना लोकल उत्पाद अब नेशनल और इंटरनेशनल मार्केट में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है. इसका श्रेय सीएम योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में चल रही 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) योजना को जाता है. यूपी का हर जिला किसी न किसी खास प्रोडक्ट के लिए जाना जाता है, सूबे के किसी जिले में ताला बनता है, तो कहीं पीतल के बर्तन है तो कहीं चिकनकारी है. यही नहीं किसे जिले में काला नमक चावल है, कहीं गुड़ है, कहीं कालीन है और कहीं लकड़ी के खिलौने हैं.
डिस्ट्रिक्ट वाइज प्रोडक्ट लिस्ट में आगरा के लेदर और मार्बल प्रोडक्ट्स, अलीगढ़ के ताले और हार्डवेयर, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी, अयोध्या का गुड़, कन्नौज का इत्र, वाराणसी की सिल्क साड़ी, सहारनपुर और बरेली के फर्नीचर, और मुरादाबाद के मेटल क्राफ्ट जैसे कई उदाहरण मिलते हैं. यूपी का हुनर केवल बड़े शहरों में नहीं है, बल्कि असली प्रोडक्ट पावर गांव, कस्बों और छोटे वर्कशॉप में भी है. ODOP इसी पावर को सही मार्केट से कनेक्ट करने का रास्ता बना रहा है. गुड़ अगर साफ पैकिंग और ब्रांड नाम से बिके, तो उसका मार्केट बढ़ सकता है. इसी तरह लकड़ी का खिलौना अगर बेहतर डिजाइन और गिफ्ट पैक में आए, तो वह बच्चों और होम डेकोर दोनों मार्केट में जा सकता है.
योगी सरकार के पहल पर उत्तर प्रदेश के 79 उत्पादों को जीआई (GI) टैग प्राप्त हो चुका है, जिससे प्रोडक्ट को इंटरनेशनल स्तर पर ब्रांडिंग को मजबूत पहचान मिली है. इसके लिए पिछले बजट में 145 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था, जिसे बढ़ाकर 200 करोड़ रुपए कर दिया गया है. इसी का नतीजा है कि यूपी के तमाम प्रोडक्ट्स ग्लोबल मार्केट में आसानी से बिक रहे हैं.
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मुरादाबाद के पद्मश्री दिलशाद हुसैन बताते हैं कि योगी सरकार की ODOP योजना से जुड़ने के बाद उनके और स्थानीय कारीगरों के जीवन में एक बड़ा बदलाव आया है. इस योजना से मिली मार्केटिंग, ट्रेनिंग और ब्रांडिंग ने मुरादाबाद के पीतल उद्योग को लोकल से ग्लोबल स्तर पर पहचान दिलाई है, जहां पहले उनके उत्पाद सीमित मात्रा में बिकते थे, लेकिन सरकारी सहयोग और प्रदर्शनियों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग बढ़ने से उनका कारोबार कई गुना बढ़ गया है.
अमरोहा में जैकेट, ढोलक के बाद मेटल और वुडन हैंडीक्राफ्ट कारोबार को भी पहचान मिली है. फर्नीचर के कारीगर जीतेंद्र सैनी बताते हैं कि योगी सरकार ने मेटल और वुडन हैंडीक्राफ्ट को ओडीओपी में शामिल कर जिले के हम जैसे कारोबारियों की किस्मत बदल दी है. हमारी कमाई दो-गुना बढ़ गई है और अब अपना काम खुद शुरू कर दिए हैं. हमारे पास हुनर था, लेकिन काम बढ़ाने के लिए पैसा नहीं था. मशीन से लेकर रॉ मटेरियट खरीदने और ऑनलाइन सेटअप बनाने के लिए पैसे की जरूरत होती है, लेकिन ODOP से जुड़ने के बाद ये सारी समस्या हल हो गई और हम जैसे कारीगरों की किस्मत बदल गई.

लड़की के कारोबरी अमित गोयल बताते हैं कि लकड़ी के प्रोडक्ट अमरोहा में बनते हैं, पहले कोई नहीं जानता था. ओडीओपी में शामिल होते पहचान बढ़ गई. आज लकड़ी के डिनर सेट, लैंप, टेबिल, स्टूल, चेयर, फ्लावर कोट, रई, डमरू, पेन स्टैंड, गमले, कप-प्लेट, घड़ी, गिलास बन रहे हैं. पहले कारीगर अपने शहर या जिले के ग्राहकों पर निर्भर रहता था, लेकिन अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, एग्जीबिशन, ट्रेड फेयर और सोशल मीडिया के जरिए दूसरे राज्यों और देशों तक पहुंच रहे हैं. पहले लोग लोन के लिए भटकते थे, लेकिन अब आसानी से मिल रहा.
एक्सपोर्ट से विस्तार, यूपी को नया बाजार
हैंडीक्राफ्ट के एक्सपोर्ट के काम से जुड़े यूपी के फिरोज अहमद बताते हैं कि लोकल प्रोडक्ट की क्वालिटी, पैकेजिंग और ब्रांडिंग बेहतर होती है, तो एक्सपोर्ट का रास्ता खुलता है. यूपी के ODOP प्रोडक्ट्स में कई ऐसे आइटम हैं, जिनकी नेशनल और ग्लोबल मार्केट में मजबूत पहचान बनी है. ODOP के प्रयास के चलते एक्सपोर्ट में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई. मुरादाबाद का मेटल क्राफ्ट, वाराणसी की साड़ी, भदोही का कालीन, कन्नौज का इत्र और अलीगढ़ के लॉक्स जैसे प्रोडक्ट्स यूपी की ग्लोबल पहचान को मजबूत कर रहे हैं.