
मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग अब और ज्यादा खतरनाक होती जा रही है. इसमें अब एक नया और निर्णायक मोड़ आ गया है, जब हूती ने सीधे तौर पर एंट्री करते हुए इजरायल पर मिसाइलें दाग दी हैं. इसके साथ ही यह जंग अब तीन मोर्चों पर फैल चुकी है. ईरान, लेबनान-इजरायल फ्रंट और अब यमन से नया मोर्चा खुल गया है.
हूती विद्रोही अब तक इस युद्ध में सीधे शामिल नहीं हुए थे. लेकिन चार हफ्तों की दूरी के बाद उन्होंने अचानक हमला करके संकेत दे दिया है कि यह जंग अब और बड़ी हो सकती है. इजरायल की सेना ने पुष्टि की है कि यमन से एक मिसाइल दागी गई, हालांकि इससे बड़े नुकसान की खबर नहीं आई. इसके बावजूद यह घटना बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे युद्ध के फैलने का खतरा कई गुना बढ़ गया है.
यह भी पढ़ें: ग्लोबल ट्रेड के लिए डबल झटका... होर्मुज के बाद इस समुद्री रास्ते पर संकट, रुक जाएगा तेल, व्यापार और सप्लाई सिस्टम?
हूती के सैन्य प्रवक्ता ने दावा किया है कि उनका निशाना "संवेदनशील सैन्य ठिकाने" थे और उन्होंने आगे भी हमले जारी रखने की चेतावनी दी है. यह बयान इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में हमले और तेज हो सकते हैं. हूती विद्रोहियों ने शनिवार को एक ही दिन में इजरायल पर दो बार बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं और दावा किया कि इससे उनका मकसद भी पूरा हुआ.
हिज्बुल्लाह का उत्तरी इजरायल में हमला
इस युद्ध का असर सिर्फ ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं है. लेबनान में भी हालात बिगड़ते जा रहे हैं, जहां इजरायल ने ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं. एक हमले में लेबनानी पत्रकारों और रेस्क्यू वर्कर्स की मौत की खबर सामने आई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है.

हिज्बुल्लाह की तरफ से उत्तरी उत्तरी इजरायल और गोलान हाइट्स में रॉकेट और ड्रोन से हमले किए जा रहे हैं. इससे कई इलाके में बड़े नुकसान की भी खबरें सामने आई हैं.
इसी बीच ईरान भी लगातार जवाबी हमले कर रहा है. उसने सऊदी अरब के एयरबेस पर हमला कर अमेरिकी सैनिकों को घायल किया, वहीं कुवैत, यूएई और ओमान जैसे देशों में भी हमलों की खबरें सामने आई हैं. यह साफ दिखाता है कि ईरान अब पूरे क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत का इस्तेमाल कर रहा है.
दो समुद्री रास्तों पर संकट गहराया
लेकिन इस पूरी स्थिति में सबसे बड़ा खतरा समुद्री रास्तों को लेकर है. पहले से ही होर्मुज स्ट्रेट लगभग ठप पड़ा हुआ है, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है. अब अगर हूती बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को भी निशाना बनाते हैं, तो वैश्विक व्यापार को दोहरा झटका लगेगा.

बाब-अल-मंदेब, जो लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है, दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है. यहां से एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच भारी मात्रा में व्यापार होता है. अगर यह रास्ता बंद होता है, तो जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते से जाना पड़ेगा, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ेंगे.
इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. तेल की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं और अगर सप्लाई और बाधित होती है, तो महंगाई और तेज हो सकती है. सप्लाई चेन टूटने से ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भी भारी असर पड़ेगा.
मिडिल ईस्ट में अमेरिका बढ़ा रहा सैन्य मौजूदगी
अमेरिका भी अपनी सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ा रहा है. अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन ने हजारों मरीन सैनिकों को मिडिल ईस्ट भेज दिया है. पहला जत्था क्षेत्र में पहुंच चुका है, जिसमें 2500 मरीन और 3500 फौजी शामिल हैं. इसके अलावा अमेरिकी सेना की 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के सैनिकों की तैनाती की भी तैयारी है.
यह भी पढ़ें: ईरान में तो नहीं लेकिन जंग चलती रही तो इस अरब मुल्क में जरूर हो सकता है 'रिजीम चेंज'

हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का कहना है कि अमेरिका ग्राउंड पर बिना सेना उतारे भी अपने लक्ष्य हासिल कर सकता है, लेकिन दूसरी तरफ रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि पेंटागन ईरान में सीमित जमीनी ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है. इसमें स्पेशल फोर्सेज और नियमित सेना की तैनाती शामिल हो सकती है.
अमेरिका-इजरायल की जंग और ईरान का बचाव
राजनीतिक स्तर पर भी हालात तेजी से बदल रहे हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस जंग को जल्द खत्म करना चाहते हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने ईरान को चेतावनी भी दी है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला गया, तो उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमले किए जाएंगे. हालांकि, ईरान लगातार कह रहा है कि स्ट्रेट को सिर्फ "दुश्मनों के लिए बंद" किया गया है. इनके अलावा इजरायल लगातार ट्रंप के बयानों के इतर ईरान में हमले लगातार कर रहा है.
दूसरी तरफ, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने साफ कहा है कि अगर उनके देश के आर्थिक या ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया गया, तो जवाब "बहुत कड़ा" होगा. ईरान की यूनिवर्सिटी पर हमले के बाद उसने पहले ही इजरायल और अमेरिकी शिक्षण संस्थानों को निशाना बनाने की चेतावनी दे दी है. मसलन, ईरान फिलहाल "आंख के बदले आंख" वाली रणनीति के साथ जंग में अपना बचाव कर रहा है.