अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम समझौते के बाद शिपिंग कंपनियां होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों की आवाजाही फिर से शुरू होने को लेकर आशा से भर गई हैं. भारत समेत एशियाई देशों की रिफाइनरियों ने कच्चे तेल की लोडिंग के लिए शिपिंग कंपनियों से बड़े टैंकरों की मांग बढ़ा दी है. हालांकि, युद्धविराम फिलहाल बस 14 दिनों का है और जिस संख्या में खाड़ी में जहाज फंसे हैं, उन्हें देखते हुए लगता नहीं कि इतने कम दिन में होर्मुज का ट्रैफिक खत्म हो पाएगा. ऐसे में नए टैंकरों के होर्मुज से गुजरने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप यानी LSEG के शिपिंग डेटा के अनुसार, ज्यादातर फंसे हुए तेल और गैस टैंकर अभी भी खाड़ी के भीतर ही मौजूद हैं. यह स्थिति उस घोषणा के कुछ घंटों बाद की है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्ते के युद्धविराम का ऐलान किया और कहा कि अमेरिका जहाजों की भीड़ कम करने में मदद करेगा.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि अगर ईरान पर हमले बंद होते हैं, तो वो भी जवाबी हमले रोक देगा और अपनी सशस्त्र सेनाओं के साथ मिलकर जहाजों को होर्मुज में सुरक्षित रास्ता देगा.
शिप ट्रैकिंग कंपनी केप्लर के अनुसार, मंगलवार तक स्ट्रेट में करीब 187 भरे हुए टैंकर मौजूद थे, जिनमें लगभग 17.2 करोड़ बैरल कच्चा तेल और रिफाइंड उत्पाद थे.
होर्मुज में कितने जहाज फंसे हुए हैं?
Fertmax FZCO के ग्लोबल हेड ऑफ रिसर्च डेजिन ली के अनुसार, खाड़ी में 1,000 से ज्यादा समुद्री जहाज फंसे हुए हैं और सामान्य हालात में भी इस ट्रैफिक को खत्म करने में दो हफ्तों से ज्यादा समय लग सकता है.
उन्होंने कहा कि 14 दिन की अवधि इतनी कम है कि इससे बाजार में भरोसा पूरी तरह बहाल नहीं हो पाएगा, खासकर अरब खाड़ी के लोडिंग रूट्स पर. अभी यह भी साफ नहीं है कि जहाजों और चार्टर कंपनियों को होर्मुज में रास्ता तलाशने के लिए क्या कदम उठाने होंगे.
उन्होंने यह भी कहा कि कई बड़ी शिपिंग कंपनियां इस वक्त इंतजार कर रही हैं और देख रही हैं कि युद्धविराम कितना स्थिर रहेगा. जब उन्हें युद्धविराम की स्थिरता पर भरोसा हो जाएगा, वो तभी अपने जहाज खाड़ी में भेजेंगी.
वहीं, चीन ने ईरान के राजदूत अब्दुलरेजा रहमानी फजली की मानें तो, खाड़ी में 3,000 से ज्यादा जहाज समंदर में फंसे हैं और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने का इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ईरान होर्मुज पर पड़ रहे प्रेशर को कम करने की कोशिश करेगा और जहाजों को वहां से गुजरने देने के लिए कदम उठाएगा. हालांकि, उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह तभी खुल पाएगा जब अमेरिका के साथ बातचीत के अच्छे नतीजे निकलेंगे.
होर्मुज से निकलना अभी खतरनाक
शिपिंग एसोसिएशन BIMCO के सुरक्षा प्रमुख जैकब लार्सन ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए कहा कि इंडस्ट्री अमेरिका और ईरान से टेक्निकल दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि बिना ईरान और अमेरिका से समन्वय के खाड़ी से निकलना खतरनाक हो सकता है.
28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों के जवाब में ईरान ने इस स्ट्रेट को बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक तेल और एलएनजी सप्लाई का करीब 20% प्रभावित हुआ और ऊर्जा कीमतों में भारी उछाल आया.
हालांकि युद्धविराम की घोषणा के बाद तेल कीमतों में गिरावट देखी गई है.
शिपिंग सूत्रों के मुताबिक, जहाज मालिक फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपना रहे हैं और स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही खाड़ी में जहाज भेजने का फैसला करेंगे.
बुधवार को भारत की बड़ी रिफाइनरियों, जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडियन ऑयल कोर्पोरेशन ने मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की लोडिंग के लिए बड़े तेल टैंकरों के ऑर्डर बढ़ा दिए हैं. चीन की सरकारी तेल कंपनी चाइना नेशनल ऑफशोर ऑयल कोर्पोरेशन CNOOC ने भी टैंकरों की डिमांड बढ़ा दी है. लेकिन होर्मुज में लगे जाम को देखते हुए यह साफ नहीं कहा जा सकता है एशियाई देशों तक तेल कब तक आ सकेगा.