अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर लगातार दबाव बनाते आए हैं. भारत के साथ ट्रेड डील की घोषणा के वक्त उनके प्रशासन ने कहा कि भारत ने रूसी तेल की खरीद रोकने की बात की है. हालांकि, इस पर भारत ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है और भारतीय रिफाइनरियों ने भी कहा है कि उन्हें रूसी तेल की खरीद पर रोक के लिए कोई आदेश नहीं मिला है. भारत के साथ-साथ ट्रंप चीन पर भी तेल खरीद के लिए प्रेशर डाल रहे हैं और इसी क्रम में उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बात की है.
चीन रूस के अलावा ईरान और वेनेजुएला से भी बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है. अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल पर कब्जा कर लिया है जिससे चीन ने ईरानी तेल की खरीद बढ़ा दी है. ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण चीन ब्लैक मार्केट से ईरानी तेल खरीदता है. ट्रंप चाहते हैं कि चीन ईरान से तेल की खरीद बंद करे और इसी संबंध में उन्होंने बुधवार को जिनपिंग से बात की.
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने चीनी समकक्ष जिनपिंग से 'बेहद शानदार' बातचीत की है. इस बातचीत में व्यापार से लेकर यूक्रेन युद्ध तक कई मुद्दों पर चर्चा हुई. लेकिन सबसे बड़ा मुद्दा ईरान था क्योंकि अमेरिका लगातार दुनिया के देशों से ईरान को अलग-थलग करने की अपील कर रहा है.
जिनपिंग के साथ हुई बातचीत पर क्या बोले ट्रंप
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा, 'चीन के साथ संबंध और राष्ट्रपति शी के साथ मेरा पर्सनल रिश्ता बेहद अच्छा है. हम दोनों समझते हैं कि इसे बनाए रखना कितना जरूरी है.'
पिछले महीने ट्रंप ने घोषणा की थी कि जो भी देश ईरान के साथ कारोबार जारी रखेगा, उस पर अमेरिका 25 फीसदी टैरिफ लगाएगा. चीन ईरान का सबसे बड़ा और सबसे भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार है.
ईरान को वैश्विक मंच पर अलग-थलग करने और उसके परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ने से रोकने के लिए अमेरिका ने उस पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं. इसके बावजूद, ईरान ने 2024 में 125 अरब डॉलर का व्यापार किया, जिसमें चीन के साथ 32 अरब डॉलर का कारोबार शामिल था.
ट्रंप ईरान को लगातार हमले की धमकी देते रहे हैं. पिछले साल के अंत में ईरान में खामेनेई शासन के खिलाफ बड़े आंदोलन हुए थे. तब ट्रंप ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को धमकी दी थी कि अगर वो प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्ती करते हैं तो अमेरिका ईरान पर हमला करेगा. ईरान में प्रदर्शन अब थम गए हैं लेकिन ट्रंप की हमले की धमकी नहीं रुकी है.
वो अब ईरान से कह रहे हैं कि या तो ईरान अमेरिका से परमाणु समझौता करे या फिर अमेरिका उस पर हमला करेगा. दोनों देशों के बीच शुक्रवार को ओमान में परमाणु वार्ता होने वाली है.
ट्रंप से ठीक पहले जिनपिंग पुतिन से वर्चुअली मिले
बुधवार को ट्रंप से बात करने से ठीक पहले चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुलाकात की थी. बुधवार को वीडियो लिंक के जरिए हुई बातचीत में पुतिन ने चीन के साथ रूस की एनर्जी पार्टनरशिप को स्ट्रैटेजिक बताया और कहा कि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से चीन रूस के तेल और गैस का सबसे बड़ा खरीददार बना हुआ है.
अनुमानों के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से चीन ने रूस से 230 अरब डॉलर से ज्यादा की ऊर्जा खरीदी है.
भारत को सजा चीन को छूट
रूसी तेल और गैस का सबसे बड़ा खरीदार होने के बावजूद, ट्रंप ने चीन पर कोई दंडात्मक टैरिफ नहीं लगाया है. भारत पर रूसी तेल की खरीद को लेकर ही अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया गया था जो कि अब हटा दिया गया है. भारत ने अमेरिकी दबाव के चलते सालों पर ईरान से तेल खरीद भी रोक दी है लेकिन चीन अब भी बड़ी मात्रा में ईरानी तेल खरीद रहा है.
हालांकि, अब अमेरिका चीन पर ईरान तेल की खरीद रोकने के लिए दबाव बढ़ा रहा है. लेकिन इस दबाव के बीच ही चीन ने ईरानी तेल की खरीद बढ़ा दी है क्योंकि वो वेनेजुएला से तेल नहीं खरीद पा रहा.
चीन पर अमेरिका के इस नरम रुख की वजह उसके रेयर अर्थ मिनरल्स का भंडार भी है. अमेरिकी चीनी पर अपनी इस निर्भरता को कम करना चाहता है और इसके लिए कोशिशें भी शुरू कर दी गई हैं. अब भी अमेरिका अपने इस्तेमाल का 70-80% रेयर अर्थ मिनरल्स प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष तरीके से चीन से ही खरीदता है.