अमेरिकी सेना ने मंगलवार को जानकारी दी कि उसने इस हफ्ते ईरान के तटवर्ती जलक्षेत्र में गोलीबारी कर दो छोटी ईरानी नावों को तबाह कर दिया. ये कार्रवाई तब की गई जब ईरानी नावों ने एक अमेरिकी मानवरहित ड्रोन पोत पर कब्जा करने की कोशिश की थी. दोनों देशों के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कंट्रोल को लेकर छह महीने से ज्यादा वक्त से चल रहे संघर्ष के बीच ये घटनाक्रम सामने आया है.
इस टकराव ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और पेट्रोल की कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है, जबकि राजनयिक स्तर पर इस अहम शिपिंग रूट को फिर से खोलने की कोशिशें जारी हैं.
अमेरिकी नौसेना का सेल्ड्रोन
यूएस सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिंस ने बताया कि ईरानी नावों ने हाल ही में एक अमेरिकी मानवरहित सतही पोत (USV) पर कब्जा करने की कोशिश की थी, लेकिन अमेरिकी सेना ने तुरंत ताकतवर जवाब दिया और इस प्रयास को पूरी तरह नाकाम कर दिया. उन्होंने बताया कि ये 25 फीट (8 मीटर) लंबा एक सेल्ड्रोन था जो स्वचालित रूप से काम कर सकता है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड समुद्री यातायात की निगरानी के लिए कई सालों से ऐसे ड्रोनों का इस्तेमाल कर रहा है. हॉकिंस ने साफ किया कि इस सेल्ड्रोन में लगी तकनीक व्यावसायिक है और कोई संवेदनशील डेटा इसमें नहीं था.
'मछली पकड़ने वाली बोट्स पर किया हमला'
दूसरी तरफ ईरानी सरकारी मीडिया ने सोमवार को बताया कि देश के दक्षिणी तट पर स्थित होर्मोज्गान प्रांत के पास मछली पकड़ने वाली दो नौकाओं पर हमला किया गया. होर्मोज्गान के उपराज्यपाल अहमद नफीसी ने समाचार एजेंसी इरना (IRNA) को बताया कि फारस की खाड़ी में एक दुश्मन ड्रोन ने दो नौकाओं को निशाना बनाया. इस हमले के बाद कई मछुआरे लापता बताए जा रहे हैं. हालांकि, ईरानी मीडिया की रिपोर्ट में अमेरिकी ड्रोन को जब्त करने की किसी भी कोशिश का कोई उल्लेख नहीं किया गया है.
ये घटना ईरानी सरकारी टेलीविजन द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मुहाने पर अमेरिकी नौसेना के एक अंडरवाटर ड्रोन को पकड़ने का दावा करने के एक सप्ताह बाद सामने आई है. उस वक्त हॉकिंस ने बताया था कि 'अंदुरिल डाइव-एलडी' ड्रोन सर्वेक्षण के दौरान खराब हो गया था और वह अब अमेरिका के कब्जे में नहीं है. उन्होंने कहा था कि वह एक पुराना मॉडल था, जिसमें न तो कोई संवेदनशील डेटा था और न ही कोई गोपनीय सोनार या रडार उपकरण लगे थे.
होर्मुज पर जंग
ये टकराव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कंट्रोल की होड़ के बीच हुआ है. अमेरिका ने हाल के हफ्तों में इस गलियारे पर ईरान की पकड़ को ढीला किया है, लेकिन युद्ध के कारण तेल और पेट्रोल की कीमतों में भारी उछाल आया है. नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक दबाव बन गया है. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि संघर्ष खत्म होते ही तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी. वहीं, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने तनाव घटाने और जलमार्ग खोलने के लिए ओमान के विदेश मंत्री से बात की है.
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे पर हमले तेज कर दिए हैं, जिससे सऊदी अरब की सबसे बड़ी पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई है. वाशिंगटन में गैर-पक्षपातपूर्ण कांग्रेसनल बजट कार्यालय (CBO) ने कहा कि एक अगस्त तक इस युद्ध से पेंटागन को 38 अरब डॉलर से अधिक का खर्च उठाना पड़ा है और ये हर महीने 3 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी हमलों में मिडिल ईस्ट में सैकड़ों अमेरिकी इमारतों और दर्जनों विमानों व ड्रोनों को नुकसान पहुंचा है.