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रेड जोन एरिया, चप्पे-चप्पे पर कमांडो और बैरिकेड्स... शांति वार्ता से पहले छावनी में तब्दील हुआ इस्लामाबाद

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता से पहले सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. रेड जोन इलाके की ओर जाने वाली सड़कों पर बैरिकेड लगाए गए हैं.पाकिस्तान की मेजबानी में होने वाली इस बैठक में दोनों देशों के दिग्गज आपसी तनाव कम करने और शांति बहाली पर चर्चा करेंगे.

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रेड जोन की ओर जाने वाले रास्तों पर कड़ा पहरा (Photo: Reuters)
रेड जोन की ओर जाने वाले रास्तों पर कड़ा पहरा (Photo: Reuters)

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में इस वक्त जबरदस्त सरगर्मी है. वजह है अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली वो महावार्ता, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं. इस बड़ी बैठक के लिए इस्लामाबाद को किसी किले की तरह तैयार कर दिया गया है. शहर का जो सबसे खास हिस्सा है, जिसे रेड जोन कहते हैं, उसे पूरी तरह सील कर दिया गया है. वहां जाना अब किसी आम इंसान के लिए मुमकिन नहीं है.

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, रेड जोन की तरफ जाने वाली हर सड़क पर भारी-भरकम बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं. यह वही इलाका है जहां पाकिस्तान की संसद, बड़े सरकारी दफ्तर, विदेशी दूतावास और वीआईपी होटल हैं. इस बातचीत की संवेदनशीलता को देखते हुए चप्पे-चप्पे पर पहरा बिठा दिया गया है. शुक्रवार को ही ईरान का बड़ा डेलिगेशन इस्लामाबाद पहुंच चुका है, जिसकी अगुवाई वहां की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर रहे हैं.

जानिए कौन-कौन पहुंचा इस्लामाबाद

अब बात करते हैं उन लोगों की, जिनके कंधों पर शांति का जिम्मा है. ईरान की तरफ से करीब 70 सदस्यों का यह दल संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची के नेतृत्व में इस्लामाबाद पहुंचा है. इस डेलिगेशन में केवल बड़े नेता ही नहीं, बल्कि सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और तकनीकी मामलों के एक्सपर्ट्स भी शामिल है. ईरान ने अपनी सबसे अनुभवी टीम उतारी है ताकि हर मुद्दे पर बारीकी से बात हो सके.

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दूसरी तरफ, अमेरिका ने भी अपने सबसे पावरफुल लोगों को भेजा है. इस टीम की कमान खुद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस संभाल रहे हैं. उनके साथ डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर भी हैं, जो पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय समझौतों में माहिर माने जाते रहे हैं. साथ ही सैन्य मामलों के जानकार वाइस एडमिरल ब्रैड कूपर भी साथ रहेंगे. ये सभी लोग ईरान के साथ मिलकर तनाव कम करने का रास्ता खोजने की कोशिश करेंगे.

चूंकि इस पूरी मुलाकात का मेजबान पाकिस्तान है, इसलिए वहां के बड़े अधिकारियों ने भी पूरी कमान संभाल रखी है. खुद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस बैठक को होस्ट कर रहे हैं. उनके साथ पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की मौजूदगी बहुत अहम है, क्योंकि सुरक्षा और रणनीति के लिहाज से उनका रोल काफी बड़ा हो जाता है. इनके अलावा विदेश मंत्री इशाक डार और एनएसए मोहम्मद असीम मलिक भी पूरी कोशिश कर रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच यह बातचीत किसी भी तरह सफल हो जाए. कुल मिलाकर, इस्लामाबाद इस वक्त दुनिया की कूटनीति का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है.
 

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