अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग अब और बड़े इलाके में फैल गई है. शनिवार को ईरान ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी अड्डों पर मिसाइलें और ड्रोन दाग दिए. इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के रडार और निगरानी केंद्रों को तबाह कर दिया. दुनिया अब डरी हुई है कि यह लड़ाई और ज्यादा देशों को अपनी चपेट में न ले ले.
28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था. उसके बाद से यह लड़ाई रुकी नहीं है. ईरान ने पलटवार करते हुए खाड़ी के उन देशों को निशाना बनाना शुरू किया जहां अमेरिका के सैनिक अड्डे हैं. साथ ही ईरान ने होर्मुज की खाड़ी से गुजरने वाले जहाजों को भी रोकना शुरू कर दिया. यह वही समुद्री रास्ता है जिससे दुनिया का पांचवां हिस्सा यानी करीब 20 फीसदी तेल गुजरता था.
शनिवार को हुआ क्या?
ईरान ने होर्मुज की खाड़ी की तरफ चार ड्रोन उड़ाए. अमेरिका का कहना है कि ये ड्रोन उस इलाके से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा थे. अमेरिकी फौज ने उन चारों ड्रोन को मार गिराया. इसके बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के दो इलाकों, गोरुक और किश्म द्वीप, में बने रडार और जासूसी केंद्रों को तबाह कर दिया. ये दोनों जगहें होर्मुज की खाड़ी के किनारे हैं.
ईरान ने इसके जवाब में कुवैत और बहरीन में अमेरिकी अड्डों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. कुवैत ने बताया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने मिसाइल और ड्रोन हमलों को बीच में ही रोक लिया. बहरीन में सायरन बज उठे और लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने के लिए कहा गया.
अमेरिका का दावा है कि ईरान की छह मिसाइलों को रोक लिया गया और एक अपने आप फेल हो गई यानी कोई भी मिसाइल अपने निशाने तक नहीं पहुंची.
कुवैत और बहरीन ने क्या कहा?
दोनों देशों ने इस हमले की कड़ी निंदा की. कुवैत के विदेश मंत्रालय ने ईरान के हमले को "खुली आक्रामकता" बताया और कहा कि यह दुनिया की उन अपीलों को नजरअंदाज करना है जो लड़ाई रोकने के लिए की जा रही हैं. यह हमला वहां रहने वाले नागरिकों और पूरे इलाके की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है.
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ईरान ने समुद्री रास्ते पर भी क्या किया?
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने कहा कि उसने चार ऐसे तेल टैंकरों पर हमला किया जो उसकी इजाजत के बिना होर्मुज की खाड़ी से गुजरने की कोशिश कर रहे थे. ईरान ने इस रास्ते को असरदार तरीके से बंद कर रखा है, जिससे दुनिया में तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है.
बातचीत चल रही है, लेकिन कोई नतीजा नहीं
लड़ाई के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच किसी हद तक बातचीत भी चल रही है, जो ज्यादातर किसी बीच के देश के जरिए हो रही है. दोनों एक अस्थायी समझौता चाहते हैं लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली है.
ईरान की मांगें हैं कि उसके 24 अरब डॉलर के जमे हुए पैसे वापस किए जाएं, उसके तेल पर लगी पाबंदियां हटाई जाएं, उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म हो और उसे होर्मुज की खाड़ी पर दबाव बनाने का मौका मिले.
ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार मोहसिन रेजाई ने एक समाचार चैनल से कहा कि कोई भी शांति समझौता तभी होगा जब अमेरिका 24 अरब डॉलर के जमे हुए ईरानी पैसे वापस करे.
पाकिस्तान इस झगड़े को सुलझाने में मदद कर रहा है. ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी शनिवार को तेहरान के लिए रवाना हुए, हालांकि पाकिस्तान ने इसकी तुरंत पुष्टि नहीं की.
डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव बढ़ रहा है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप देश के अंदर से भी दबाव झेल रहे हैं. तेल के दाम बढ़ रहे हैं और लोग इस जंग को खत्म करने की मांग कर रहे हैं. अमेरिकी टेलीविजन प्रसारण कंपनी NBC के एक कार्यक्रम में ट्रंप ने माना कि ईरान के ज्यादातर मिसाइल और ड्रोन बनाने के कारखाने तबाह हो चुके हैं, लेकिन उसके पास अभी भी कुछ हथियार बचे हैं. ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास शायद पहले के मुकाबले 21-22 फीसदी मिसाइलें बची हैं.
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जब राष्ट्रपति ट्रंप से पूछा गया कि इतने दबाव के बावजूद ईरान समझौता क्यों नहीं कर रहा, तो उन्होंने कहा, "क्योंकि वे मजबूत हैं. वे गर्वीले हैं. कुछ ऐसी चीजें हैं जो वे कभी करने के बारे में सोचते भी नहीं थे, लेकिन अब उन्हें करनी पड़ेंगी. उनके पास कोई चारा नहीं है और इसमें थोड़ा वक्त लगता है."
दुनिया पर क्या असर पड़ रहा है?
इस जंग की वजह से दुनिया भर में तेल के दाम बढ़ गए हैं और सप्लाई चेन बिगड़ गई है. संयुक्त राष्ट्र के वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि तेल और ट्रांसपोर्ट के बढ़ते खर्च की वजह से करोड़ों लोग भूख के करीब पहुंच रहे हैं.