ईरान जंग के बीच जहां पाकिस्तान खुद को साबित करने में लगा हुआ है, खुद को अमेरिका-ईरान के बीच एक मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है, अमेरिका की तरफ से उसे एक बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी संसद की एक रिसर्च रिपोर्ट में पाकिस्तान के आतंकी कारनामों की पोल एक बार फिर से खुल गई है. रिपोर्ट में पाकिस्तान को कई आतंकवादी संगठनों का 'पुराना अड्डा' बताया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान लगातार आतंकी संगठनों को पनाह दे रहा है, जिनमें से कई 1980 के दशक से सक्रिय हैं.
अमेरिकी कांग्रेस की यह रिपोर्ट 25 मार्च को आई है जिसने एक बार फिर साफ किया है कि पाकिस्तान आतंकियों का सुरक्षित पनाहगार बना हुआ है.
रिपोर्ट में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों को उनके फोकस के आधार पर बांटा गया है जैसे वैश्विक, अफगानिस्तान केंद्रित, भारत केंद्रित, घरेलू या सांप्रदायिक. इसमें यह भी कहा गया है कि इनमें से कम से कम 12 संगठनों को अमेरिकी कानून के तहत विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है. इनमें से अधिकांश संगठन इस्लामी चरमपंथी विचारधारा वाले हैं और लगातार सक्रिय बने हुए हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाए हैं, जिनमें हवाई हमले और खुफिया जानकारी के आधार पर सैकड़ों हजारों कार्रवाई शामिल हैं, लेकिन वो इन नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने में सफल नहीं हो पाया है. अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र दोनों की तरफ से नामित कई संगठन अब भी पाकिस्तान की जमीन पर सक्रिय हैं.
रिपोर्ट में किन आतंकी संगठनों के नाम शामिल हैं?
रिपोर्ट में जिन आतंकवादी संगठनों का जिक्र किया गया है, उनमें लश्कर-ए-तैयबा शामिल है, जिसकी स्थापना 1980 के दशक के आखिर में हुई थी और जिसे 2001 में आतंकवादी संगठन घोषित किया गया.
हाफिज सईद के नेतृत्व में यह संगठन पाकिस्तान के पंजाब प्रांत और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से संचालित होता रहा है. प्रतिबंधों से बचने के लिए बाद में इस संगठन ने जमात-उद-दावा का नाम इस्तेमाल करना शुरू किया. इस समूह में हजारों आतंकी शामिल हैं. 2008 के मुंबई हमलों के लिए यह आतंकी संगठन जिम्मेदार था.
रिपोर्ट में जैश-ए-मोहम्मद का भी जिक्र है जिसकी स्थापना 2000 में मसूद अजहर ने की थी. 2001 में इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया गया. रिपोर्ट के अनुसार भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में इस आतंकी समूह के करीब 500 लड़ाके सक्रिय हैं.
रिपोर्ट में हरकत-उल जिहाद इस्लामी, हरकत-उल मुजाहिदीन और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे अन्य संगठनों का भी जिक्र है. रिपोर्ट के मुताबिक, ये समूह पाकिस्तान में एक्टिव हैं.
रिपोर्ट में 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' का भी जिक्र है, जिसे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा माना जाता है. इसी आतंकी समूह ने पहलगाम हमले को अंजाम दिया जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी. इस संगठन को अब वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित किया जा चुका है.
अमेरिका की पॉलिसी रिपोर्ट में लिखा- भारत नाराज है
इसके साथ ही, सेंटर फॉर अ न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी की एक नीति रिपोर्ट- ‘Repairing the Breach: Getting US-India Ties Back on Track’ ने भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव की तरफ इशारा किया है. इसमें कहा गया है कि 2025 के दूसरे हिस्से में भारत-अमेरिका संबंध 'गंभीर रूप से लड़खड़ा गए.' इसकी वजह भारत-पाकिस्तान के बीच मई में हुई लड़ाई की युद्धविराम प्रक्रिया को लेकर भारत-अमेरिका मतभेद और भारतीय निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ बताए गए हैं.
22 अप्रैल को पाकिस्तान स्पॉन्सर आतंकियों ने पहलगाम में हमला कर दिया था जिसके जवाब में भारत ने 7 मई को पाकिस्तान के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया. भारत-पाकिस्तान के बीच करीब चार दिनों बाद 10 मई को युद्ध खत्म हुआ.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि उन्होंने दोनों देशों के बीच संघर्षविराम कराया है. हालांकि, भारत ने इससे इनकार किया और कहा कि युद्धविराम दोनों देशों के बीच बातचीत से संभव हुआ.
इसके बाद से भारत-अमेरिका संबंधों में लगातार तनाव देखा गया. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत पर लगाया भारी टैरिफ कम कर 18% कर दिया है जिससे रिश्तों में थोड़ी नरमी देखी गई है.
लिसा कर्टिस, कीर्ति मार्टिन और सितारा गुप्ता की लिखी अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत-अमेरिका के बीच रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग भले ही मजबूत बना हुआ है, लेकिन पाकिस्तान और आतंकवाद को लेकर मतभेद अब भी रिश्तों पर दबाव डाल रहे हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, भारत इस बात से निराश रहा है कि पाकिस्तान से जुड़े आतंकवाद पर अमेरिका ने पूरी तरह ध्यान नहीं दिया, यहां तक कि टीआरएफ को आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने के बाद भी अमेरिका ध्यान नहीं दे रहा है.
कश्मीर मुद्दे पर अमेरिकी रिपोर्ट में क्या लिखा गया
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका को किसी तीसरे पक्ष की भूमिका से बचना चाहिए. इसमें कहा गया है कि ऐसे बयान दोनों देशों के बीच भरोसे को और नुकसान पहुंचा सकते हैं.
साथ ही, रिपोर्ट में रिश्तों को लेकर कुछ सकारात्मक बातों का भी जिक्र है जैसे भारत-अमेरिका के बीच 10 साल का नया रक्षा ढांचा, एक अंतरिम व्यापार समझौता, और ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में सहयोग का बढ़ना.
हालांकि, रिपोर्ट में एक स्पष्ट चेतावनी भी दी गई है कि अगर राजनीतिक अविश्वास को दूर नहीं किया गया, तो ये सभी उपलब्धियां धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकती हैं.