दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी 'सऊदी अरामको' ने संकट को लेकर चेतावनी जारी की है. कंपनी के सीईओ अमीन नासिर ने कहा कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इसी तरह बंद रहा, तो गर्मियों में पेट्रोल और जेट फ्यूल का स्टॉक खाली हो सकता है.
अमीन नासिर के मुताबिक, जमीन पर मौजूद ईंधन के भंडारों में भारी गिरावट आ रही है. पेट्रोल और जेट फ्यूल जैसे रिफाइंड ईंधन सबसे तेजी से कम हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के बाद से दुनिया अब तक 1 अरब बैरल तेल की सप्लाई खो चुकी है.
हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि हर हफ्ते 10 करोड़ बैरल तेल का अतिरिक्त नुकसान हो रहा हैय. नासिर ने चेतावनी दी कि ये भंडार ही संकट से बचाने का एकमात्र जरिया थे, लेकिन अब वो भी लगभग खत्म होने की कगार पर हैं.
अमेरिका ने खोला अपना 'रिजर्व' खजाना
तेजी से बढ़ती तेल की कीमतों और बाजार में मची खलबली को शांत करने के लिए अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने वैश्विक समझौते के तहत ऊर्जा कंपनियों को अपने 'रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व' से 5.33 करोड़ बैरल कच्चा तेल कर्ज पर देने का फैसला किया है.
इस योजना के तहत एक्सॉन मोबिल और मैराथन पेट्रोलियम जैसी नौ कंपनियों ने तेल उधार लिया है. हालांकि, ऊर्जा विभाग ने शुरुआत में 9.25 करोड़ बैरल की पेशकश की थी, लेकिन कंपनियों ने उसका केवल 58% हिस्सा ही लिया है. अमेरिकी सरकार इस वसंत में अब तक कुल 17.2 करोड़ बैरल तेल बाजार में जारी करने का लक्ष्य बना चुकी है.
मार्च में अमेरिका और 30 अन्य देशों के बीच हुए समझौते के तहत कुल 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर सहमति बनी थी. आईईए ने बताया है कि अगर सप्लाई में बाधा जारी रही, तो सदस्य देश अपने रणनीतिक भंडार से और ज्यादा तेल निकालने के लिए तैयार हैं. अब तक सदस्य देशों ने अपने उपलब्ध भंडार का 20% हिस्सा बाजार में उतार दिया है.
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के प्रमुख फातिह बिरोल ने इस युद्ध को अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट करार दिया है.