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ईरान के हमलों पर भड़का कतर, बोला- हमारे पास जवाब देने का पूरा हक

ईरान के द्वारा किए गए हमलों की कतर ने कड़ी निंदा की है. कतर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और यूएन चार्टर के अनुच्छेद 51 के प्रावधानों के तहत उसके पास पलटवार करने का पूरा हक है.

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कतर ने हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है. (Representative image)
कतर ने हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है. (Representative image)

ईरान ने खाड़ी के कई देशों जिनमें बहरीन, कुवैत, कतर और ओमान भी शामिल हैं, उनपर हमले किए हैं. इसके बाद अब कतर ने ईरान की ओर से किए जा रहे हमलों की निंदा की है. कतर के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है. 

कतर ने ईरान की तरफ से अपनी क्षेत्र के साथ-साथ जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बहरीन, ओमान और कुवैत के इलाकों पर किए गए नए हमलों की सख्त निंदा की है. कतर ने इन हमलों को निशाना बनाए गए देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सीधा उल्लंघन माना है. साथ ही इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन भी बताया है.

विदेश मंत्रालय का कहना है कि इन हमलों का जारी रहना तनाव को खतरनाक स्तर तक बढ़ा सकता है, जिससे तनाव कम करने के प्रयास जटिल हो जाएंगे और क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता लाने के राजनीतिक व कूटनीतिक प्रयासों को नुकसान पहुंचेगा. कतर इन हमलों और उनसे होने वाले परिणामों व प्रभावों के लिए इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान को पूरी तरह और कानूनी रूप से जिम्मेदार मानता है.

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इसके अलावा विदेश मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया है कि कतर के पास अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के प्रावधानों के अनुसार जवाब देने व अपनी संप्रभुता, सुरक्षा, क्षेत्रीय अखंडता और नागरिकों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करने का पूरा अधिकार है. कतर अपने मित्र देशों के साथ पूरी एकजुटता और उनकी संप्रभुता, सुरक्षा व क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने के लिए उनके द्वारा उठाए गए सभी वैध कदमों के प्रति अपना समर्थन दोहराता है.

मंत्रालय ने उन सभी सैन्य कार्रवाइयों और हमलों को तुरंत और पूरी तरह से रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया है जो क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा हैं.

इस बीच, ओमान ने मुसन्दम और अल वुस्ता प्रांतों में हवाई हमलों के बाद, ओमान में ईरान के राजदूत मूसा फरहांग को तलब किया और उन्हें विरोध का औपचारिक नोट सौंपा.

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