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पुतिन ने की ट्रंप की तारीफ, जेलेंस्की के ओपन लेटर पर बोले- कई शब्द बहुत चुभने वाले

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की की शांति पहल पर रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने ठंडा जवाब दिया है. पुतिन ने कहा कि सिर्फ मिलने के लिए मुलाकात का कोई मतलब नहीं है और किसी भी शिखर वार्ता से ठोस नतीजे निकलने चाहिए. हालांकि उन्होंने सैद्धांतिक रूप से जेलेंस्की से मिलने से इनकार नहीं किया. दूसरी तरफ उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ की.

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पुतिन बोले कि ट्रंप द्वारा पेश किए गए शांति प्रस्ताव संघर्ष को समाप्त करने में मदद कर सकते हैं (फोटो- ITG)
पुतिन बोले कि ट्रंप द्वारा पेश किए गए शांति प्रस्ताव संघर्ष को समाप्त करने में मदद कर सकते हैं (फोटो- ITG)

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मिलने की 'ख्वाहिश' जताई थी. इसपर अब पुतिन का जवाब आ गया है. पुतिन ने कहा कि उन्हें ऐसी बैठक आयोजित करने में कोई खास फायदा नहीं दिखता. बता दें कि हाल में जेलेंस्की ने ओपन लेटर लिखा था. इसमें उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध की समाप्ति पर चर्चा करने के लिए अपने रूसी समकक्ष (पुतिन) के साथ सीधी बैठक का प्रस्ताव दिया था.

सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (एसपीआईईएफ) में इंडिया टुडे की गीता मोहन के एक सवाल का जवाब देते हुए पुतिन ने कहा कि वे सैद्धांतिक रूप से जेलेंस्की से मिलने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी शिखर सम्मेलन से ठोस परिणाम निकलने चाहिए, न कि यह सिर्फ प्रतीकात्मक हो.

पुतिन ने कहा, 'जेलेंस्की ने मुलाकात की इच्छा जताई थी. मैं कभी भी मिलने से इनकार नहीं करता. लेकिन सिर्फ मिलने के लिए मिलना, मैंने ऐसा पहले भी देखा है.'

उनकी ये टिप्पणी युद्ध पर अपने कठोर रुख को दोहराने के कुछ घंटों बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि रूसी सेनाएं युद्ध के मैदान में हर दिन बढ़त हासिल कर रही हैं.

रूस का मिन्स्क संधि का अनुभव

साथ ही, उन्होंने सुझाव दिया कि अगर कीव समझौता करने को तैयार हो तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेश किए गए शांति प्रस्ताव संघर्ष को समाप्त करने में मदद कर सकते हैं.

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आगे पुतिन ने अब समाप्त हो चुके मिन्स्क समझौतों का हवाला दिया, जिन्हें 2014 में दुश्मनी शुरू होने के बाद पूर्वी यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र में यूक्रेनी सरकारी बलों और रूसी समर्थित अलगाववादियों के बीच संघर्ष को समाप्त करने के लिए बनाया गया था.

पुतिन ने 2014 के असफल समझौते का जिक्र करते हुए कहा, 'हम पूरी रात मिन्स्क समझौतों को अंतिम रूप देने और उन पर काम करने में लगे रहे.'

पुतिन लगातार यह दावा करते रहे हैं कि यूक्रेन ने संवैधानिक सुधारों और डोनबास को विशेष दर्जा देने जैसे राजनीतिक प्रावधानों को लागू करने से इनकार करके समझौते का उल्लंघन किया है.

जेलेंस्की के ओपन लेटर पर क्या बोले पुतिन

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को जेलेंस्की के उस खुले पत्र की कड़ी आलोचना की, जिसमें चार साल से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए सीधी बातचीत का प्रस्ताव था. उन्होंने पत्र के कुछ हिस्सों को 'बहुत चुभने वाला' बताते हुए कीव पर शांति वार्ता में दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने संघर्ष के समाधान की दिशा में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की कोशिशों की तारीफ की.

SPIEF में बोलते हुए, पुतिन ने सवाल उठाया कि यूक्रेन अमेरिकी सैन्य सहायता पर निर्भर क्यों बना हुआ है, जबकि वह भविष्य के किसी भी शांति समझौते की गारंटी में अमेरिका की अधिक भूमिका का विरोध कर रहे हैं.

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पुतिन ने कहा कि ट्रंप ने कई बार जेलेंस्की को सबके सामने चुनौती दी थी और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की थी.

उन्होंने कहा, 'हमने देखा कि डोनाल्ड (ट्रंप) जेलेंस्की को निर्देश दे रहे थे और बातें समझा रहे थे. कुल मिलाकर, मैं इस काम के लिए डोनाल्ड का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं. यह काम ठीक है. लेकिन अभी और भी काम करने बाकी हैं और यह काम जारी रहना चाहिए.'

जेलेंस्की का पुतिन को खुला पत्र

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने गुरुवार को पुतिन को संबोधित एक ओपन लेटर जारी किया था. इसमें उन्होंने चार साल से ज्यादा वक्त से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए दोनों नेताओं के बीच सीधी मुलाकात का प्रस्ताव रखा. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि राजनयिक प्रयास विफल रहे तो यूक्रेन लड़ाई जारी रखने के लिए तैयार है.

जेलेंस्की के कार्यालय ने कहा कि यह पत्र संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई देशों के साथ भी साझा किया गया था, जिसमें तर्क दिया गया था कि यूक्रेन के लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों, बढ़ती मुद्रास्फीति और ईंधन की कमी के बीच कई रूसी इस संघर्ष से थक चुके हैं.

जेलेंस्की ने वार्ता के लिए एक तारीख निर्धारित करने का भी प्रस्ताव रखा और सुझाव दिया कि बैठक की मेजबानी उन देशों द्वारा की जा सकती है जिनका शांति वार्ता को सुविधाजनक बनाने का इतिहास रहा है, जिनमें स्विट्जरलैंड, तुर्की और कई अरब देश शामिल हैं.

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