पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जारी जेएएसी आंदोलन को रोकने के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने कथित तौर पर ‘पीस कमेटी’ के नाम पर एक प्रतिनिधिमंडल रावलकोट भेजा है. इस प्रतिनिधिमंडल को लेकर अब बड़े सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि इसमें जैश-ए-मोहम्मद के वरिष्ठ कमांडर इलियास कश्मीरी के शामिल होने का दावा किया गया है.
आजतक को मिले एक वीडियो के मुताबिक इलियास कश्मीरी इस तथाकथित ‘पीस कमेटी’ का हिस्सा था. वीडियो में वह कैमरे से बचता हुआ दिखाई देता है. इसी के बाद यह सवाल और तेज हो गया है कि अगर यह टीम शांति वार्ता के लिए बनाई गई थी, तो उसमें एक वरिष्ठ आतंकी कमांडर की मौजूदगी क्यों थी.
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मसूद अजहर के परिवार के मारे जाने पर दिया था अपडेट
इलियास कश्मीरी वही शख्स है जिसने ऑपरेशन सिंदूर के बाद दावा किया था कि भारतीय सेना की कार्रवाई में मसूद अजहर के परिवार के लोग ‘रेजा-रेजा’ हो गए थे. अब उसी का एक कथित शांति प्रतिनिधिमंडल के साथ दिखना नई बहस को जन्म दे रहा है. मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह पूरी घटना ऐसे समय सामने आया है जब जेएएसी आंदोलन को दबाने की कोशिशों की चर्चा चल रही है.
बड़ा सवाल यही है कि क्या ‘पीस कमेटी’ के नाम पर अलग तरह की एंट्री करवाई गई. सामने आए दावे पाकिस्तान की सरकार, उसकी खुफिया एजेंसी और आतंकियों की कथित सांठगांठ पर फिर से उंगली उठा रहे हैं. रावलाकोट भेजे गए प्रतिनिधिमंडल में इलियास कश्मीरी जैसे चेहरे की मौजूदगी इस पूरे दावे को और संवेदनशील बना देती है.
लश्कर-ए-तैयबा आंदोलन के खिलाफ मैदान में उतरा
इस बीच लश्कर-ए-तैयबा भी जेएएसी आंदोलन के खिलाफ खुलकर मैदान में उतर आया है. इनपुट के मुताबिक संगठन लगातार जेएएसी नेताओं को ‘गद्दार’ बता रहा है. उनके खिलाफ प्रचार अभियान चलाया जा रहा है और आंदोलन को बदनाम करने की कोशिशों का खुलकर समर्थन किया जा रहा है.
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अब पीओजेके में चल रहे घटनाक्रम पर कई नए सवाल खड़े हो गए हैं. एक तरफ ‘पीस कमेटी’ के नाम पर प्रतिनिधिमंडल भेजे जाने का दावा है, दूसरी तरफ उसमें जैश-ए-मोहम्मद के वरिष्ठ कमांडर की मौजूदगी और लश्कर-ए-तैयबा का आंदोलन के खिलाफ खुला प्रचार दिख रहा है. इन सबके बीच आईएसआई की कथित भूमिका और आतंकियों की मौजूदगी को लेकर मामला और गहरा गया है