scorecardresearch
 

क्या है 12 रिजर्व सीटों का विवाद, जिसकी वजह से PoK में पाकिस्तान कर रहा खून-खच्चर

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में 12 आरक्षित विधानसभा सीटों को लेकर JAAC और स्थानीय संगठनों का बड़ा आंदोलन चल रहा है. ये सीटें शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जिससे स्थानीय लोगों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर हो रहा है.

Advertisement
X
PoK में रिजर्व 12 सीटों के विवाद के कारण हिंसा भड़की हुई है
PoK में रिजर्व 12 सीटों के विवाद के कारण हिंसा भड़की हुई है

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) बीते हफ्ते से हिंसा में जल रहा है. JAAC  (जम्मू-कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी) ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और इस विरोध प्रदर्शन की आवाज जो घाटी से उठी है वह लंदन तक गूंज रही है. सामने आया है कि लंदन स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर सैकड़ों लोगों ने एकजुट होकर पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ नारेबाजी की. उन्होंने PoK में मानवाधिकार उल्लंघनों का आरोप लगाया.

POK में ताजा आंदोलन की सबसे बड़ी वजह वहां की विधानसभा में 12 आरक्षित सीटों को लेकर लिया गया फैसला है. 45 सदस्यीय विधानसभा में ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित की गई हैं जो कश्मीर से जुड़े होने का दावा करते हैं, लेकिन वर्तमान में पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहते हैं.

JAAC और अन्य स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इस व्यवस्था से स्थानीय लोगों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर होगा और बाहरी प्रभाव बढ़ेगा. उनका कहना है कि क्षेत्र के भविष्य से जुड़े फैसलों पर अधिकार केवल वहां रहने वाले लोगों का होना चाहिए. इसी मांग को लेकर संगठन लंबे समय से आंदोलन चला रहा है. JAAC इन सीटों को खत्म करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है.

आरक्षित सीटों को लेकर क्यों मचा है बवाल?

Advertisement

असल में ये सारा विवाद पाकिस्तान की संसद, चुनाव प्रक्रिया और वहां के प्रतिनिधित्व के कारण उपजा है. बात ये है कि दरअसल, PoK में विधानसभा की 12 सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जो जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में जाकर बस गए थे. इनमें 1947, 1965 और 1971 के युद्धों या बाद के संघर्षों के दौरान विस्थापित हुए लोग शामिल हैं. 

Pok Protest

JAAC का आरोप है कि इन सीटों की वजह से स्थानीय आबादी का पॉलिटिकल लीडरशिप कम हो जाता है. इसका फायदा केवल कुछ खास परिवारों तक सीमित रहता है. संगठन इन सीटों को खत्म करने और स्थानीय लोगों के लिए ज्यादा प्रतिनिधित्व की मांग कर रहा है. यही मुद्दा अब बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है. इन 12 आरक्षित सीटों में से 6 सीटें जम्मू से आए शरणार्थियों के लिए और 6 सीटें कश्मीर घाटी से आए शरणार्थियों के लिए हैं. 'ज्वाइंट आवामी एक्शन कमेटी' ने इन 12 सीटों को समाप्त करने की मांग की है. उनका तर्क है कि इन सीटों पर चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं होती है. 

गिलगित-बाल्टिस्तान के बाद 27 जुलाई को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे. PoK की विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं. इनमें से 45 सीटों पर सीधे चुनाव होता है, जबकि 8 सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं.  जिन 12 सीटों पर विवाद हो रहा है, वह इन्हीं 45 सीटों में आती हैं. 

Advertisement

PoK विधानसभा की संरचना को ऐसे समझिए-

कुल सीटें: 53

प्रत्यक्ष चुनाव: 45

शरणार्थी सीटें: 12 (45 में शामिल)

विशेष आरक्षित सीटें: 8


तो अभी कुल मिलाकर जो पूरा विवाद है उसके केंद्र में यही 12 सीटों के विवाद का मामला है. इसके अलावा अक्टूबर 2025 में हुआ ‘मुजफ्फराबाद समझौता’ भी इस मौजूदा विवाद की एक वजह है. यह समझौता पाकिस्तान सरकार, PoK प्रशासन और JAAC के बीच पिछले वर्ष हुए हिंसक आंदोलनों के बाद हुआ था.

उस समय लगातार विरोध प्रदर्शनों और आर्थिक संकट के बीच सरकार ने कई महत्वपूर्ण मांगों को स्वीकार करने का वादा किया था. समझौते के तहत गेहूं और बिजली पर सब्सिडी, आंदोलन में मारे गए लोगों के परिवारों को मुआवजा, प्रशासनिक सुधार, बुनियादी ढांचे का विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार तथा स्थानीय लोगों के अधिकारों को मजबूत करने जैसी घोषणाएं की गई थीं.

उस समय इस समझौते को PoK में लंबे समय से चली आ रही आर्थिक और राजनीतिक शिकायतों के समाधान की दिशा में एक बड़ी सफलता माना गया था. लेकिन JAAC का आरोप है कि सरकार जो वादे किए थे वह पूरे नहीं हुए हैं. संगठन का कहना है कि बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद संरचनात्मक सुधारों, सब्सिडी, सार्वजनिक सेवाओं, स्थानीय अधिकारों और विकास परियोजनाओं पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई.

Advertisement

9 जून से हड़ताल और बंद का था ऐलान

इसी कारण संगठन ने 9 जून से पूरे क्षेत्र में हड़ताल और नए आंदोलन का आह्वान किया था. JAAC का कहना है कि जनता को राहत देने के बजाय सरकार टालमटोल करती रही, जिससे लोगों में गुस्सा बढ़ता गया. हालांकि पाकिस्तान के अफसरों का दावा अलग है. सरकारी पक्ष का कहना है कि JAAC की अधिकांश मांगों को पहले ही स्वीकार किया जा चुका है. लेकिन स्थानीय स्वायत्तता, आरक्षित विधानसभा सीटों, राजनीतिक विशेषाधिकारों और दीर्घकालिक सब्सिडी व्यवस्था जैसे मुद्दों पर अब भी मतभेद बने हुए हैं.

Pok Protest

लंदन में भी हुआ विरोध-प्रदर्शन

उधर, लंदन में भी पाकिस्तान हाई कमीशन के सामने प्रदर्शन के दौरान 'आजादी' के नारे लगे. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे PoK के लोगों के अधिकारों और पॉलिटिकल लीडरशिप की मांग का समर्थन करते हैं. उनका आरोप है कि क्षेत्र में असंतोष को बातचीत के जरिए दूर करने के बजाय सुरक्षा बलों के जरिये दबाने की कोशिश की जा रही है. प्रदर्शन के दौरान लोगों ने बैनर और पोस्टर लेकर पाकिस्तान सरकार की नीतियों का विरोध किया तथा वैश्विक संस्थाओं से हस्तक्षेप की अपील की.

12 आरक्षित सीटों के अलावा संगठन ने महंगाई, बिजली संकट, बेरोजगारी, खराब प्रशासनिक व्यवस्था और क्षेत्र की राजनीतिक उपेक्षा जैसे मुद्दों को भी उठाया है. पिछले दो वर्षों के दौरान JAAC ने आटे और बिजली की बढ़ती कीमतों के खिलाफ कई बड़े प्रदर्शन आयोजित किए थे. उन आंदोलनों में भी कई बार सुरक्षा बलों के साथ टकराव देखने को मिला था.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement