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PM मोदी साइप्रस पहुंचे, राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलाइड्स ने किया वेलकम... व्यापार, निवेश समेत इन मुद्दों पर होगी बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को साइप्रस के दौरे पर पहुंचे, जहां से उन्होंने अपनी 5 दिवसीय विदेश यात्रा की शुरुआत की. ऑपरेशन सिंदूर के बाद पीएम मोदी की यह पहली विदेश यात्रा है. अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मोदी साइप्रस के साथ व्यापार, निवेश, तकनीक और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर चर्चा करेंगे.

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पीएम मोदी का साइप्रस में राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलाइड्स ने एयरपोर्ट पर स्वागत किया
पीएम मोदी का साइप्रस में राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलाइड्स ने एयरपोर्ट पर स्वागत किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को साइप्रस के दौरे पर पहुंचे, जहां से उन्होंने अपनी 5 दिवसीय विदेश यात्रा की शुरुआत की. ऑपरेशन सिंदूर के बाद पीएम मोदी की यह पहली विदेश यात्रा है. साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलाइड्स ने खुद एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया. यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की 2 दशकों में पहली साइप्रस यात्रा है. 

अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मोदी साइप्रस के साथ व्यापार, निवेश, तकनीक और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर चर्चा करेंगे. इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी 16-17 जून को कनाडा के कानानास्किस शहर में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. 

जब से भारत और कनाडा के बीच खालिस्तान के मुद्दे पर तनाव बढ़ा, उसके बाद पीएम मोदी की पहली कनाडा यात्रा है. वहां प्रधानमंत्री मोदी वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, नवाचार और प्रौद्योगिकी सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर भारत की भूमिका को रेखांकित करेंगे. 

 

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी 18 जून को क्रोएशिया जाएंगे, जो किसी भारतीय प्रधानमंत्री की क्रोएशिया की पहली आधिकारिक यात्रा होगी. प्रधानमंत्री मोदी वहां राष्ट्रपति ज़ोरान मिलानोविच और प्रधानमंत्री आंद्रे प्लेनकोविच से मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे. 

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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारे दोनों देशों के बीच सदियों पुराने घनिष्ठ सांस्कृतिक संबंध हैं. किसी भारतीय प्रधानमंत्री की क्रोएशिया की पहली यात्रा से आपसी हितों के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे.

ये दौरा भारत की वैश्विक कूटनीतिक भूमिका को सशक्त करने और आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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