महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में लगातार हो रही बारिश के बीच पेड़ों के गिरने की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है. सिर्फ 24 घंटे में 523 पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं, जिनमें एक शख्स की मौत और आठ लोग घायल हुए. अब इन हादसों को लेकर कंक्रीट सड़कों, पेड़ों की गलत छंटाई और खराब मौसम की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं.
हकीकत जानने पर पता चला कि पेड़ कंक्रीट की बाउंड्री से घिरे हुए हैं. इसके साथ ही, पेड़ों की गलत तरीके से छंटाई करने से उनमें असंतुलन पैदा हो गया है. सड़कों की तरफ आने वाली शाखाओं को काट दिया जाता है, जिससे तेजं हवा चलने पर पेड़ अस्थिर हो जाते हैं.
रविवार को 24 घंटों यानी 5 जुलाई की सुबह 8 बजे से 6 जुलाई की सुबह 8 बजे तक, शहर और पूर्वी व पश्चिमी उपनगरों में पेड़ गिरने की 523 घटनाएं सामने आईं. इन घटनाओं में एक शख्स की मौत हो गई और 8 लोग घायल हो गए. एक हफ्ते के अंदर पेड़ गिरने की इन घटनाओं में कुल तीन लोगों की जान जा चुकी है.
उठ रहे हैं बड़े सवाल!
मुंबई के लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या इतने सारे पेड़ों के गिरने की वजह लापरवाही है या कोई प्राकृतिक आपदा. हालांकि, मुंबई में पेड़ गिरने की घटनाएं हमेशा से होती रही हैं, लेकिन इनकी तादाद में भारी बढ़ोतरी हुई है. बृहन्मुंबई नगर निगम यानी बीएमसी ने पेड़ गिरने की इतनी ज्यादा घटनाओं के लिए तेज हवाओं को जिम्मेदार ठहराया है. रविवार को हवा की रफ्तार 72-79 किलोमीटर प्रति घंटा थी, जो मॉनसून के दौरान आम तौर पर चलने वाली हवा की औसत रफ्तार से तीन गुना ज्यादा है.
लेकिन अगर जानकारों की मानें तो हाल ही में पेड़ों के गिरने की कई घटनाओं ने बीएमसी के बड़े रोड कॉन्क्रीटाइजेशन प्रोजेक्ट पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं. क्योंकि पेड़ गिरने से हुई मौत की तीन घटनाओं में से दो उन सड़कों पर हुईं, जहां हाल ही में कॉन्क्रीटाइजेशन का काम हुआ था.
डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के इस रोड कॉन्क्रीटाइजेशन प्रोजेक्ट को जनवरी 2023 में लॉन्च किया गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका शिलान्यास किया था. तब से BMC के डेटा से पता चलता है कि पेड़ गिरने की घटनाएं बढ़ी हैं. साल 2023 में 687, 2024 में 653 और 2025 में 855 घटनाएं दर्ज की गईं. 2023 से 5 जुलाई 2026 के बीच पेड़ गिरने की घटनाओं में करीब 11 लोगों की मौत हुई, जबकि 2020 से 2022 के बीच चार मौतें दर्ज की गई थीं.
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मुंबई में 5,000 पेड़ों का वैज्ञानिक सर्वे कर रहे आर्बरिस्ट यानी पेड़ों के विशेषज्ञ वैभव राजे ने कहा, "सीमेंट और पेड़ एक साथ नहीं रह सकते. पेड़ों की जड़ों को मिट्टी में मजबूती से जमने की जरूरत होती है. जब जड़ों वाला हिस्सा कंक्रीट से ढक जाता है, तो जड़ें धीरे-धीरे अपनी पकड़ खो देती हैं और पेड़ की नींव कमजोर हो जाती है. नतीजतन, थोड़ी सी भी भारी बारिश के बाद पेड़ गिर सकते हैं. पेड़ों की गलत तरीके से छंटाई करने से भी वे अस्थिर हो जाते हैं और गिर सकते हैं.
इसके साथ ही, सड़न भी एक वजह है, जिससे मजबूत दिखने वाले पेड़ भी गिर जाते हैं. इसलिए हम जोखिम का आकलन करने के लिए LiDAR और AI टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं. पेड़ों के जोखिम का आकलन करने से उनके गिरने का खतरा कम हो जाता है."
जब बीएमसी की मार्केट्स एंड गार्डन्स कमिटी की चेयरपर्सन हेतल गाला से इस बारे में पूछा गया कि ट्री अथॉरिटी ने अक्टूबर 2023 से मार्च 2026 के बीच पेड़ों की जड़ों को नुकसान पहुंचाने के लिए बीएमसी के रोड्स डिपार्टमेंट और यूटिलिटी एजेंसियों को 428 नोटिस जारी किए हैं, तो उन्होंने कहा, "यह सच है कि पेड़ गिरने की घटनाएं बढ़ी हैं, लेकिन पेड़ तेज हवा और भारी बारिश की वजह से गिर रहे हैं. ऐसा जरूरी नहीं है कि सिर्फ वही पेड़ गिर रहे हों, जहां कंक्रीट का काम चल रहा है. पेड़ों का सड़ना उनके गिरने की सबसे बड़ी वजहों में से एक है, इसलिए ऐसे पेड़ों की अच्छी तरह से जांच करके उनकी पहचान की जानी चाहिए और उनका इलाज किया जाना चाहिए."