पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हिंदू अल्पसंख्यकों को लेकर ऐसा बयान दिया, जिस पर सवाल उठने लगे हैं. जरदारी ने कहा कि पाकिस्तान और वहां के मुसलमान 3-4 प्रतिशत हिंदू आबादी को 'बर्दाश्त' करते हैं. उन्होंने भारत के ‘अखंड भारत’ के विचार का भी जिक्र किया और कहा कि भारत का अपना अलग नजरिया और एजेंडा है.
हालांकि, पाकिस्तान की 2023 की जनगणना के अनुसार देश में हिंदुओं की आबादी 52 लाख, यानी कुल आबादी का 2.17 प्रतिशत है. यह आंकड़ा जरदारी के बताए 3-4 प्रतिशत से कम है.
जरदारी ने कहा कि 'हम मुसलमान हैं, वे नहीं हैं. लेकिन हमारी सोच ऐसी है कि हम 3-4 प्रतिशत हिंदू आबादी को बर्दाश्त करते हैं.' उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान में हिंदू पूरी तरह आजाद हैं और वे पाकिस्तान में रहना पसंद करते हैं.
जरदारी ने यह बयान 14 अगस्त को इस्लामाबाद में यादगार-ए-फतह विजय स्मारक समारोह में दिया था. यह स्मारक पाकिस्तान ने भारत के साथ 2025 में हुए संघर्ष को ‘मारका-ए-हक’ नाम देते हुए उसकी जीत के तौर पर बनाया है.
कड़ी आलोचना
उनके बयान पर भारत में तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं. केरल हाईकोर्ट के वकील रोहित मडास्सेरिल और वकील, लेखक व ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के शोधकर्ता अमित कृष्णकांत पॉल ने भी जरदारी की टिप्पणी की आलोचना की. पॉल ने कहा कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति 80 साल बाद भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारत का जिक्र कर विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं.
जरदारी के ‘बर्दाश्त’ शब्द के इस्तेमाल पर इसलिए भी सवाल उठे क्योंकि पाकिस्तान का संविधान धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है, हालांकि देश में इस्लाम को विशेष स्थान और राजकीय धर्म का दर्जा प्राप्त है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में हिंदू और दूसरे धार्मिक अल्पसंख्यक जबरन धर्म परिवर्तन, अपहरण, भेदभाव और भीड़ हिंसा जैसी घटनाओं का सामना करते रहे हैं. ऐसे में देश के राष्ट्रपति द्वारा हिंदू अल्पसंख्यकों के लिए ‘बर्दाश्त’ शब्द का इस्तेमाल खासा चर्चा में है.