सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता होने के बावजूद ईरान समर्थित हमलों को नहीं रोक पाने वाले पाकिस्तान ने अब कुवैत के साथ भी बड़े रक्षा समझौते की तैयारी शुरू कर दी है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान और कुवैत के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने, ऊर्जा सुरक्षा और निवेश को लेकर शुरुआती स्तर पर बातचीत चल रही है.
रिपोर्ट के अनुसार, कुवैत चाहता है कि पाकिस्तान के साथ उसका रक्षा समझौता सऊदी अरब जैसा हो. इसमें पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती, लड़ाकू विमान, ड्रोन, एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य सैन्य सुविधाएं शामिल करने की मांग की गई है. हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने साफ किया है कि फिलहाल लड़ाकू सैनिक भेजने पर कोई सहमति नहीं बनी है.
यह घटनाक्रम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाल ही में ईरान ने सऊदी अरब में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था. इससे पहले पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पारस्परिक रक्षा सहयोग का समझौता हो चुका था. हालांकि, हमलों के बाद पाकिस्तान की ओर से किसी सैन्य प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई. ऐसे में अब कुवैत के साथ प्रस्तावित रक्षा समझौते की व्यवहारिकता और प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देश रक्षा सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा और निवेश पर बातचीत कर रहे हैं. हालांकि, यदि यह समझौता आगे बढ़ता है तो पाकिस्तान की क्षेत्रीय भूमिका और भारत की सुरक्षा चिंताओं पर भी इसका असर पड़ सकता है. हालांकि, सूत्रों का कहना है कि बातचीत अभी प्रारंभिक चरण में है और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस पर असर पड़ सकता है.
क्यों अहम है यह बातचीत?
रॉयटर्स के मुताबिक, इस साल ईरान की ओर से कुवैत पर कई हमले हुए हैं. ऐसे में कुवैत अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए नए रक्षा साझेदारों की तलाश में है. वहीं, पाकिस्तान पहले से ही सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता कर चुका है. हाल ही में यह भी खबर सामने आई थी कि ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के सऊदी अरब पर हमले के बाद पाकिस्तान ने ईरान को संदेश दिया था कि सऊदी अरब पर किसी भी हमले को वह अपने ऊपर हमला मानेगा.
सूत्रों के अनुसार, रक्षा सहयोग के बदले पाकिस्तान कुवैत से ऊर्जा सुरक्षा और निवेश चाहता है. कुवैत पाकिस्तान में ईंधन भंडारण की संभावना भी तलाश रहा है. यह दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे सरकारी डीजल आपूर्ति समझौते को और मजबूत कर सकता है. पाकिस्तान की सरकार का मानना है कि ऐसे समझौते देश में निवेश बढ़ाने और ऊर्जा भंडार मजबूत करने में मदद करेंगे.
रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्किये, पाकिस्तान और सऊदी अरब एक अलग त्रिपक्षीय रक्षा समझौते के मसौदे पर भी काम कर रहे हैं. इसके अलावा, बहरीन भी पाकिस्तान के साथ इसी तरह के रक्षा समझौते में रुचि रखता है, जबकि जॉर्डन ने हथियारों की खरीद और सैन्य प्रशिक्षण को लेकर दिलचस्पी दिखाई है.