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'पाकिस्तान US के लिए सबसे बड़े परमाणु खतरों में से एक', अमेरिका इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड का बड़ा बयान

अमेरिकी खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने परमाणु हथियारों को लेकर दुनिया के सामने नई चेतावनी जारी की है. उन्होंने पाकिस्तान को उन देशों की श्रेणी में रखा है जो अमेरिका के लिए सबसे बड़ा परमाणु खतरा पैदा कर रहे हैं. इस लिस्ट में रूस, चीन और उत्तर कोरिया जैसे नाम भी शामिल हैं.

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US के लिए सबसे बड़ा परमाणु खतरा है पाकिस्तान. (Photo: Screengrab)
US के लिए सबसे बड़ा परमाणु खतरा है पाकिस्तान. (Photo: Screengrab)

अमेरिका की खुफिया एजेंसी की प्रमुख (Director of National Intelligence) तुलसी गबार्ड ने कहा है कि पाकिस्तान संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए सबसे बड़े परमाणु खतरों में से एक है. उन्होंने ये भी कहा कि ईरान, चीन, रूस और उत्तर कोरिया को उन देशों के रूप में भी दिखाया है जो ऐसी क्षमताएं विकसित कर रहे हैं जो अमेरिका को खतरे में डाल सकती हैं.

तुलसी गबार्ड ने बुधवार को अपनी ब्रीफिंग में उन पांच देशों के नाम प्रमुखता से लिए जो अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं. उन्होंने कहा कि रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान लगातार ऐसी मिसाइल तकनीक विकसित कर रहे हैं जो परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम हो 

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए सबसे बड़े परमाणु खतरों में से एक है. 

इंटेलिजेंस चीफ के मुताबिक, ईरान, चीन, रूस, उत्तर कोरिया और पाकिस्तान पारंपरिक प्रणालियों के साथ-साथ कई नए और उन्नत मिसाइल सिस्टम पर काम कर रहे हैं. इन क्षमताओं के कारण अमेरिका का होमलैंड अब इन देशों की मारक क्षमता के दायरे में आ चुका है.

ब्रीफिंग के दौरान उत्तर कोरिया को लेकर भी गंभीर चिंताएं जताई गईं. गबार्ड ने बताया कि उत्तर कोरिया अब रूस और चीन के साथ अपनी साझेदारी को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर रहा है. ये त्रिपक्षीय सामरिक तालमेल अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से बड़ी समस्या पैदा कर सकता है. खुफिया विभाग लगातार इन देशों के बीच बढ़ते सैन्य और तकनीकी सहयोग पर नजर बनाए हुए है. उत्तर कोरिया द्वारा किए जा रहे मिसाइल परीक्षणों और परमाणु रिसर्च को इसी बड़े गठबंधन के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है.

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ईरान के मामले पर तुलसी गबार्ड ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने पिछले साल जून 2025 में ईरान के परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को पूरी तरह तबाह (Obliterated) कर दिया था.

टेलिजेंस चीफ के अनुसार, उस बड़ी कार्रवाई के बाद से अब तक अमेरिका को ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं कि ईरान अपनी संवर्धन क्षमताओं को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, ईरान अभी भी उन्नत मिसाइल प्रणालियों के विकास की सूची में शामिल है, लेकिन उसका परमाणु कार्यक्रम फिलहाल ठप पड़ा है.

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