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नेपाल में बाढ़ से तबाह हुए हाइड्रो प्रोजेक्ट्स में रोका गया रेस्क्यू, 868 लोग अब भी लापता; चिलिमे टनल में जुटी भारतीय टीम

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद क्षतिग्रस्त 13 जलविद्युत परियोजनाओं में से 10 में लापता लोगों की तलाश रोक दी गई है. अब सिर्फ चिलिमे, अपर त्रिशूली-1 और अपर त्रिशूली-3 ‘बी’ में बचाव कार्य जारी है. बताया जा रहा है कि 868 लोग अब भी लापता हैं.

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नेपाल में ज्यादातर जगहों पर रोका गया रेस्क्यू ऑपरेशन. (File photo: ITG)
नेपाल में ज्यादातर जगहों पर रोका गया रेस्क्यू ऑपरेशन. (File photo: ITG)

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद क्षतिग्रस्त 13 जलविद्युत परियोजनाओं में से अधिकांश में लापता श्रमिकों और कर्मचारियों की तलाश जारी रेस्क्यू ऑपरेशन को रोक दिया गया है.बाढ़ में आए मलबे और भारी पत्थरों के कारण अब इन लोगों के जिंदा बचने की संभावनाएं बेहद कम होने के चलते ये कदम उठाया गया है.

हालांकि, चिलिमे, अपर त्रिशूली-1 और अपर त्रिशूली-3 ‘बी’ में ही खोज एवं बचाव अभियान जारी है. स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादक संघ नेपाल (इप्पान) के अनुसार, 11 परियोजनाओं में काम करने वाले 868 लोग अब भी लापता हैं, जिनसे किसी भी प्रकार का कोई संपर्क नहीं हो पाया है.

इन बड़ी परियोजनाओं में रोका गया रेस्क्यू ऑपरेशन

बाढ़ के भयंकर प्रकोप के बाद कई प्रमुख प्रोजेक्ट्स में तलाश का काम बंद कर दिया गया है. इनमें रसुवागढ़ी 111 मेगावाट, रसुवा भोटेकोशी 120 मेगावाट, मैलुंग खोला 5 मेगावाट, अपर त्रिशूली-3 ‘ए’ 60 मेगावाट, देवीघाट 14.1 मेगावाट और अपर मैलुंग 14.3 मेगावाट शामिल हैं. इन सभी स्थलों पर लंबे वक्त तक चले तलाशी अभियान के बाद भी कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आ सका. इसके बाद अधिकारियों ने यहां खोज अभियान रोकने का फैसला किया.

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चिलिमे की सुरंग में भारतीय टीम का ऑपरेशन जारी

स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि भारत से आई रेस्क्यू टीम को चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के अंदर रेस्क्यू की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जहां विकट परिस्थितियों होने के बावजूद अभी-भी रेस्क्यू जारी है. नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, चिलिमे की सुरंग में बाढ़ से जमा भारी मिट्टी, मलबा और विशालकाय पत्थरों को हटाने का काम लगातार चल रहा है. खुदाई के दौरान कंक्रीट और बड़े बोल्डर सामने आने से अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है.

सुरंग में फंसे हो सकते हैं 6 लोग

अधिकारियों को उम्मीद है कि टीम जल्द ही सुरंग में ‘ब्रेकथ्रू’ हासिल कर लेगी. माना जा रहा है कि सुरंग के अंदर छह लोग फंसे हो सकते हैं. नेपाली सेना की रेस्क्यू टीम के साथ मिलकर भारतीय रेस्क्यू टीम सोमवार को सुरंग के करीब 125 मीटर अंदर तक पहुंच गई थी. हालांकि, आगे खुदाई के दौरान सुरंग में पानी मिलने के बाद फिलहाल खुदाई रोककर पानी बाहर निकालने का काम किया जा रहा है. पानी में कीचड़ और गाद मिली होने के कारण डी-वॉटरिंग में भी काफी वक्त लग रहा है.

त्रिशूली-3 ‘बी’ में मिटा घरों का नामोनिशान

अपर त्रिशूली-3 ‘बी’ परियोजना में अब तक लापता लोगों का कोई पता नहीं चल पाया है. रेस्क्यू टीम परियोजना के भवनों वाले इलाकों में खुदाई कर रही है, लेकिन वहां भवनों का ढांचा तक नहीं मिल रहा है. केवल उनकी नींव का स्तर यानी प्लिंथ लेवल मिला है.

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अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ की ताकत इतनी ज्यादा थी कि ऐसा लगता है कि परियोजना के भवन पूरी तरह बह गए. अब पावरहाउस बनने वाले क्षेत्र में भी खुदाई करने की तैयारी की जा रही है.

अपर त्रिशूली-1 में 497 लोग लापता

216 मेगावाट क्षमता वाली अपर त्रिशूली-1 परियोजना में सुरंग और हेडवर्क्स क्षेत्र में तलाशी जारी है. नेपाली सेना समेत विभिन्न टीमों ने ऑडिट नंबर-3 से सुरंग के ऊपरी हिस्से की तरफ खोज अभियान शुरू किया है. हालांकि, भारी मात्रा में मलबा जमा होने से टीमें तेजी से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं. कंपनी के अनुसार, बांध की ओर स्थित सुरंग तक पहुंचने के लिए लगभग 4 किलोमीटर की दुर्गम दूरी तय करनी होगी.

अपर त्रिशूली-1 परियोजना में कुल 1,433 कर्मचारी और श्रमिक तैनात थे. इनमें से अब भी 497 लोग लापता हैं. लापता लोगों में कंपनी के 15, डोसान के 47, पावर चाइना के 335, कंसल्टेंसी के 7 और एंडिज के 93 लोग शामिल हैं. वहीं, 936 लोगों के सुरक्षित होने या संपर्क में आने की पुष्टि हो चुकी है. अब तक 10 शव बरामद किए गए हैं और संपर्क बहाल होने के साथ आंकड़ों में बदलाव आ रहा है.

इसी तरह 60 मेगावाट की अपर त्रिशूली-3 ‘ए’ में बचाव कार्य के लिए तैयार किया गया रास्ता दोबारा हुए भूस्खलन के कारण मलबे से मलबे से भर गया है. बारिश के बाद सुरंग के प्रवेश मार्ग फिर से मिट्टी से ढक गया है, जिससे बचाव कार्य असंभव हो गया. प्राधिकरण अब समिति के जरिए सुझाव लेने की तैयारी में है.

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वहीं, रसुवागढ़ी परियोजना में कोई प्रगति न दिखने पर टीम हटा ली गई है. प्राधिकरण ने साफ किया कि केवल दो-तीन स्थानों को छोड़कर बाकी जगह अब कोई टीम तैनात नहीं है.

नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अधिकारियों का मानना है कि लंबे खोज अभियान के बाद भी किसी के जीवित न मिलने से मलबे में दबे लोगों के बचने की संभावना लगभग खत्म हो चुकी है. अधिकांश जगहों पर ऑपरेशन बंद करने का मुख्य कारण भी यही रहा है. हालांकि, चिलिमे और अपर त्रिशूली-3 ‘बी’ में अभी-भी संभावित जीवित व्यक्तियों की तलाश के उद्देश्य से अभियान चलाया जा रहा है.

लांगटांग खोला में मिले दो शव

20 मेगावाट की लांगटांग खोला परियोजना में भी सेना और पुलिस ने मंगलवार से तलाशी बंद कर दी है. इप्पान के अनुसार, यहां 39 लोग अब भी लापता हैं, जबकि बाढ़ के समय 19 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया था. सुरंग से दो शव बरामद हुए थे जिनकी हालत खराब होने के चलते पहचान के लिए डीएनए जांच कराई जा रही है. प्रबंधन का मानना है कि लापता 39 लोग सुरंग में नहीं थे और तेज धारा में बह गए.

ऊर्जा क्षेत्र को 1.34 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान

उधर, ऊर्जा-जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय के शुरुआती आकलन के मुताबिक भोटेकोशी बाढ़ से 1.34 लाख करोड़ नेपाली रुपये का नुकसान हुआ है. इस आपदा में 783.39 मेगावाट की बिजली परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं. इनमें 249.4 मेगावाट की सात चालू जलविद्युत और 24.34 मेगावाट की एक सौर परियोजना शामिल है. साथ ही 508.62 मेगावाट की छह निर्माणाधीन परियोजनाएं भी क्षतिग्रस्त हुईं और 410.06 मेगावाट बिजली राष्ट्रीय ग्रिड से अलग हो गई.

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