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हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में रामकथा, मोरारी बापू को सुनने के लिए जुटे साधु-संत, तुलसी जयंती भी मनाई

अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में मोरारी बापू की रामकथा चल रही है. इस कथा में भारत के अलग-अलग प्रमुख तीर्थ स्थलों से बड़ी संख्या में साधु-संन्यासी पहुंचे हैं.

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नौ दिन चलनी है कथा (Photo: ITG)
नौ दिन चलनी है कथा (Photo: ITG)

आध्यात्मिक गुरु मोरारी बापू इन दिनों अमेरिका में हैं. मोरारी बापू अमेरिका के न्यूयॉर्क की प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में रामकथा कर रहे हैं. हार्वर्ड के सैंडर्स थिएटर में 15 अगस्त से शुरू यह रामकथा नौ दिन चलेगी. कथा का समापन 23 अगस्त को होगा. इस दौरान 16 से 18 अगस्त तक, तीन दिन विद्वत चर्चा भी आयोजित होगी.

मोरारी बापू ने इसे लेकर कहा है कि यह कथा सावन के महीने में तुलसी जयंती के संदर्भ में आयोजित हो रही है. मोरारी बापू ने कहा कि आज साधुओं ने जिसे प्रज्ज्वलित किया, वह ज्ञान दीप नहीं बल्कि प्रेम ज्योति थी. उन्होंने कहा कि इस आयोजन में सत्य, प्रेम और करुणा के ‘त्रिभुवन सूत्रों’ पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.

हार्वर्ड के लक्ष्मी मित्तल एंड फैमिली साउथ एशिया इंस्टीट्यूट की फैकल्टी डायरेक्टर प्रोफेसर डायना ने कहा कि राम, सीता और लक्ष्मण को ऐसे ‘आदिम तीर्थयात्री’ के रूप में देखा जा सकता है. उन्होंने कहा कि जिनकी अयोध्या से शुरू हुई 14 वर्षों की वनवास यात्रा प्रयाग, चित्रकूट, पंचवटी और किष्किंधा होते हुए रामेश्वरम तक पहुंची.

प्रोफेसर डायना ने कहा कि इस यात्रा के दौरान ये स्थान पवित्र तीर्थस्थलों में बदल गए और तब से श्रद्धालु उनके पदचिह्नों का अनुसरण करते आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह यात्रा रामलीला की परंपरा का भी आधार बनी, जो भारत से आगे बढ़कर थाईलैंड, इंडोनेशिया और कंबोडिया तक पहुंची.

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ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य डी पोपट ने कहा कि हार्वर्ड का आदर्श वाक्य ‘Veritas’ यानी सत्य, ‘सत्य, प्रेम और करुणा’ के मूल्यों से मेल खाता है. इससे यह आयोजन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है. हार्वर्ड में रामकथा के दौरान ही 19 अगस्त को गोस्वामी तुलसीदास की जयंती भी मनाई गई.

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मोरारी बापू ने साल 2010 में तुलसी जयंती पर कार्यक्रम की शुरुआत की थी. इसके पीछे रामकथा और ‘रामचरितमानस’ की परंपरा को संरक्षित करने के लिए काम कर रहे हैं. रामकथा के आयोजन की टीम के सदस्य पी पोपट ओबे ने कहा कि यह कार्यक्रम दुनिया की सबसे पुरानी पाठ परंपराओं और दुनिया के सबसे बड़े शिक्षण केंद्रों में से एक” को एक साथ ला रहा है.

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उन्होंने कहा कि मोरारी बापू रामकथा को कैलाश मानसरोवर, वेटिकन, संयुक्त राष्ट्र और कैम्ब्रिज तक ले जा चुके हैं. हार्वर्ड में चित्रकूट, अयोध्या और वाराणसी से आए साधुओं और विद्वानों की मौजूदगी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है.

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