पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हालिया मक्का रक्षा समझौते को कई सिक्योरिटी एक्सपर्ट ‘सुन्नी नाटो’ बता रहे हैं. यह समझौता सामूहिक रक्षा के सिद्धांत पर आधारित है. यानी कि किसी एक सदस्य पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा. ऐसे में सवाल उठता है कि सुन्नी बहुल देशों का यह गठबंधन शिया बहुल ईरान का भरोसा कैसे जीत पाएगा?
ईरान उस पाकिस्तान पर कैसे भरोसा करेगा जो इस डिफेंस पैक्ट का अहम पार्टनर है. बता दें कि सऊदी अरब और तुर्की घोर सुन्नी मुस्लिम राष्ट्र हैं. ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि ऐसे ही माहौल में पाकिस्तान ईरान-अमेरिका के बीच मीडिएशन का दूसरा राउंड शुरू करने की कोशिश कर रहा है.
ईरान समर्थित हूती विद्रोही सऊदी अरब की संपत्तियों और उनके ठिकानों पर लगातार हमला कर रहे हैं. ईरान भी अमेरिकी हमलों के जवाब में जबतक सऊदी प्रतिष्ठानों पर हमला करता रहता है. ईरान ने ये धमकी एक बार फिर से दोहरायी है.
अब पाकिस्तान ईरान-अमेरिका की इसी लड़ाई में फिर से बिचौलिया बनना चाहता है. इससे पहले पाकिस्तान ईरान-अमेरिका जंग में मध्यस्थ बन चुका है. तब बहुत धूमधाम से इस्लामाबाद समझौते पर हस्ताक्षर हुआ था. लेकिन कुछ ही हफ्तों में यह समझौता मुंह के बल गिरा. अब पाकिस्तान फिर से बिचौलिया बनने की कोशिश में है.
इसी सिलसिले में पाकिस्तान के गृह मंत्री और शहबाज शरीफ कैबिनेट के एकमात्र शिया मंत्री तेहरान पहुंचे हैं.
पाकिस्तान की स्थिति अनोखी है. वह ईरान से लगभग 900 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है और उसके अंदर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी शिया आबादी रहती है. इसलिए इस्लामाबाद किसी भी सूरत में तेहरान से खुली दुश्मनी नहीं चाहता.
'पाकिस्तान ईमानदार कोशिश कर रहा है'
पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान तनाव में मध्यस्थ की भूमिका निभाई उसने दोनों पक्षों के बीच बातचीत के द्वार खुले रखे और इस्लामाबाद में वार्ता की मेजबानी भी की. मोहसिन नकवी एक बार फिर से पाकिस्तान के लिए वही रोल चाहते हैं.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने बुधवार को इस्लामाबाद में एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि वह क्षेत्र के दूसरे देशों की मदद से अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहा है.
नकवी की तेहरान यात्रा के बारे में पूछे जाने पर अंद्राबी ने कहा, "पाकिस्तान इस संकट को सुलझाने के लिए अपने मित्र देशों के साथ मिलकर ईमानदारी से कोशिशें कर रहा है." उन्होंने कहा, "पाकिस्तान सीधे और परोक्ष तरीकों से बाधा डालने वालों का मुकाबला करना जारी रखेगा और सभी लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए रचनात्मक बातचीत को आगे बढ़ाएगा."
एक राजनयिक सूत्र के अनुसार ईरानी राष्ट्रपति के साथ अपनी बैठक में नकवी ने पड़ोसी देशों के बीच संबंधों को "मजबूत, लंबे समय से चले आ रहे और अटूट" बताया और तेहरान के साथ संबंधों के व्यापक विकास को आगे बढ़ाने के लिए इस्लामाबाद के "गंभीर संकल्प और इच्छाशक्ति" को व्यक्त किया.
राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने कहा कि ईरान-पाकिस्तान संबंध दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों को पूरा करेंगे और साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा में भी योगदान देंगे.
काम न आई पाकिस्तान की गारंटी
नकवी की यह पहल इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि पाकिस्तान खुद को मुस्लिम दुनिया में एक प्रभावशाली ताकत के तौर पर पेश करता रहा है. हाल ही में पाकिस्तान ने सऊदी अरब, तुर्की, कतर और अन्य सुन्नी देशों के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की कोशिश की है.
नकवी के तेहरान दौरे का सबसे अहम मुद्दा जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुआ वह समझौता है, जिसके तहत उच्चस्तरीय बातचीत के लिए 60 दिनों की खिड़की खोलने की कोशिश हुई थी. पाकिस्तान इस प्रक्रिया में गारंटर की भूमिका में था. लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और अमेरिका-ईरान के बीच फिर सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद यह प्रक्रिया पटरी से उतर गई.
पाकिस्तान अब इस बातचीत को दोबारा शुरू कराने के लिए अपना मध्यस्थता चैनल सक्रिय रखना चाहता है. हालांकि इस दिशा में उसे अभी तक बड़ी सफलता नहीं मिली है. इसकी एक बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का विवाद है. दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम यह समुद्री मार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है. ईरान और ओमान के बीच फिलहाल इस रास्ते से सुरक्षित जहाजरानी को लेकर अलग बातचीत चल रही है.
पाकिस्तान की उम्मीदों पर पानी
इस बीच ईरान के एक सैन्य अधिकारी ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच सीज़फायर को बढ़ाने को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है.
ईरानी अधिकारी ने कहा, "इसे बढ़ाने को लेकर कोई बातचीत नहीं हो रही है क्योंकि ईरान के नज़रिए से, कोई ऐसी समय सीमा शुरू ही नहीं हुई थी जिसे बढ़ाया जा सके. अमेरिका ने अंतरिम समझौते के होने के 48 घंटे बाद ही उसका उल्लंघन किया और कुछ दिनों बाद उससे हट गया."
पाकिस्तान की मुश्किलें इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि ईरान की सेना के प्रवक्ता ने अमेरिका को ईरान के ख़िलाफ़ दोबारा आक्रामकता न दिखाने की चेतावनी दी है. ईरान की सेना के प्रवक्ता ने कहा है कि अगर अमेरिका ने ईरान के खिलाफ दोबारा आक्रामकता दिखाई, तो एनर्जी ट्रांसमिशन लाइनें, पावर प्लांट, सभी अमेरिकी और ग़ैर-अमेरिकी सिस्टम, और यहां तक कि ग्लोबल इंटरनेट से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर भी ख़तरे में पड़ जाएंगे."