ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने पीएम नरेंद्र मोदी को ईरान आने का न्योता दिया है. ये बुलावा ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए है. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका और इजरायल के हमले में मौत हो गई थी. ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार 4 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है. ईरान ने अमेरिका के साथ डील पर समझौता करने के बाद इस कार्यक्रम को अपनी शक्ति और ईरानी संप्रभुता के प्रदर्शन के तौर पर पेशकर रहा है.
अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 जुलाई को शुरू होंगे. 5 दिन बाद 9 जुलाई 2026 को खामेनेई को उनके गृहनगर मशहद में दफन के साथ समाप्त होगा.
28 फरवरी को खामेनेई के निधन के बाद भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भारत सरकार की ओर से नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास का दौरा किया था. उन्होंने वहां शोक पुस्तिका में भारत के मैसेज लिखे थे. अभी यह पता नहीं चला है कि अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों में भारत की ओर से कौन शामिल होगा.
खामेनेई की मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल के हवाई हमलों में हुई थी, जिसके बाद उनका अंतिम संस्कार मूल रूप से मार्च में तय था, किन युद्ध के कारण इसे टाल दिया गया. अब युद्ध समाप्त होने के बाद यह तारीख तय हुई है. ईरान इस आयोजन को भव्य बनाने की पूरी तैयारी कर रहा है. तेहरान के इमाम खुमैनी ग्रैंड मोसल्ला में 4 और 5 जुलाई को उनके पार्थिव शरीर को जनता के दर्शन के लिए रखा जाएगा.
6 जुलाई को तेहरान में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें लाखों लोग शामिल होंगे. 7 जुलाई को पवित्र शहर क़ोम में समारोह होगा. अंत में 9 जुलाई को मशहद के इमाम रज़ा दरगाह में उन्हें दफनाया जाएगा.
ईरान की सरकार का आकलन है कि पूरे कार्यक्रम में 2 करोड़ तक लोगों की भीड़ की उम्मीद जताई है. तेहरान में 24 घंटे का समारोह होगा और पूरे देश में छुट्टी घोषित की जा सकती है. सुरक्षा, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स की व्यापक व्यवस्था की जा रही है. अंतरराष्ट्रीय नेताओं को निमंत्रण भेजे गए हैं, इसी सिलसिले में भारत के प्रधानमंत्री को भी निमंत्रण भेजा गया है.
ईरान इसे 1989 के खुमैनी अंतिम संस्कार के बाद सबसे बड़ा सार्वजनिक आयोजन बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि राष्ट्रीय एकता और समर्थन का प्रदर्शन हो.