
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत के चार दिनों के दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने आजतक से खास बातचीत की और कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी. उन्होंने भारत और अमेरिका के रिश्ते, दोनों देशों के बीच होने वाली ट्रेड डील, क्वाड, समुद्री सुरक्षा और ईरान जैसे मुद्दों पर विस्तार से बात की.
अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने साफ कहा कि भारत अमेरिका के लिए सिर्फ एक दोस्त नहीं है, बल्कि सबसे जरूरी रणनीतिक साथियों में से एक है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा, टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन यानी सामान पहुंचाने की व्यवस्था और दुनिया की बड़ी चुनौतियों पर साथ काम करने के मौके लगातार बढ़ रहे हैं.
रुबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई मुलाकात को बेहद अच्छा बताया. उन्होंने कहा कि दोनों देश कई ऐसे मुद्दों पर मिलकर काम कर रहे हैं जो दोनों के लिए समान रूप से जरूरी हैं.

प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा की तैयारी
अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा को लेकर भी बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि जी-20 सम्मेलन से अलग एक अलग और खास द्विपक्षीय यात्रा हो, यानी सिर्फ भारत और अमेरिका के बीच की बैठक हो. उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी की मेजबानी करने के लिए उत्साहित हैं और दोनों देशों के बीच तारीखों पर बात हो रही है.
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ट्रेड डील हफ्तों में होगी
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते यानी ट्रेड डील को लेकर रुबियो ने भरोसा दिलाया कि यह डील अब बस होने वाली है. उन्होंने कहा कि यह 'महीनों नहीं बल्कि हफ्तों' की बात है. उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ टैरिफ यानी आयात पर लगने वाले टैक्स की बात नहीं है, बल्कि पूरी आर्थिक साझेदारी को नए जमाने के हिसाब से ठीक करने की बात है. नई इंडस्ट्री, नई टेक्नोलॉजी और बदलती जरूरतों को देखते हुए दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को अपडेट करना जरूरी है.
क्वाड को सिर्फ बैठकों तक नहीं रखना
क्वाड चार देशों का एक समूह है जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं. रुबियो ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि क्वाड सिर्फ बैठकों और बयानों तक सीमित न रहे, बल्कि असल में कुछ काम हो.
उन्होंने समुद्री सुरक्षा और जरूरी टेक्नोलॉजी को क्वाड के दो सबसे बड़े काम के क्षेत्र बताया. उन्होंने यह भी कहा कि इस साल चारों देशों के नेता मिलने की कोशिश करेंगे और उससे पहले विदेश मंत्रालय स्तर पर तैयारी की जा रही है ताकि बैठक में ठोस फैसले हो सकें.
ईरान पर सख्त रुख
ईरान और पश्चिम एशिया की स्थिति पर रुबियो ने कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि दुनिया के समुद्री रास्तों को रोकना या उन पर कब्जा करना बिल्कुल मंजूर नहीं है. किसी भी देश को यह हक नहीं दिया जा सकता कि वो जहाजों को जबरन रोके या उनसे पैसे वसूले.
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी रुबियो ने सीधे शब्दों में कहा कि ईरान को यह साफ-साफ बताना होगा कि वो परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और यूरेनियम को बड़े पैमाने पर तैयार करने के कार्यक्रम पर गंभीरता से बात करनी होगी.
उन्होंने कहा कि 60 फीसदी तक शुद्ध किए गए यूरेनियम का कोई शांतिपूर्ण इस्तेमाल नहीं होता, यानी यह साफ है कि इसका मकसद हथियार बनाना है. इसलिए यह मुद्दा सुलझाना बेहद जरूरी है.
रुबियो ने यह भी कहा कि अभी सबसे पहली और जरूरी बात यह है कि समुद्री रास्तों को पूरी तरह खोला जाए और सुरक्षित किया जाए, ताकि दुनिया का व्यापार और तेल जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई बिना रुकावट चलती रहे.