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रूस-ईरान से बेइंतहा नफरत, ट्रंप को सपोर्ट... US सीनेटर ग्राहम लिंडसे की मौत साजिश तो नहीं?

लिंडसे ग्राहम अमेरिकी राजनीति में उन नेताओं में गिने जाते थे, जो विदेश नीति पर बेहद आक्रामक रुख रखते थे. वे रूसियों की मौत को अमेरिकी विदेश नीति के हक में मानते थे. ईरान पर कड़े प्रतिबंध के पक्ष में थे और भारत पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने के पक्ष में थे. अपनी मौत से कुछ ही घंटे पहले वे यूक्रेन में थे.

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लिंडसे ग्राहम ट्रंप के नजदीकी थे. (Photo: Reuters)
लिंडसे ग्राहम ट्रंप के नजदीकी थे. (Photo: Reuters)

"रूसी मर रहे हैं, यह हमारे द्वारा खर्च किया गया अब तक का सबसे अच्छा पैसा है." ये शब्द हैं अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के, जो उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की से मुलाकात के दौरान 2023 में कहे थे. अमेरिका द्वारा यूक्रेन को दी जा रही सैन्य सहायता का जिक्र करते हुए ग्राहम ने रूस के नुकसान को "सबसे अच्छा निवेश" बताया था. इससे पता चलता है कि ट्रंप के करीबी लिंडसे ग्राहम की नीतियों में रूस के लिए कितना विरोध भरा हुआ था. यह बयान रूस में भारी विवाद का कारण बना, मॉस्को ने इसे उकसावे के रूप में देखा और ग्राहम के खिलाफ वारंट भी जारी किया था. 

दूसरी ओर ईरान भी उन्हें अपना कट्टर विरोधी मानता था, क्योंकि ग्राहम लगातार तेहरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई, कड़े प्रतिबंध और यहां तक कि ईरानी नेतृत्व के खिलाफ आक्रामक अमेरिकी नीति की वकालत करते रहे. 

अब ऐसा बयान देने वाले 71 साल के लिंडसे ग्राहम की संदिग्ध मौत हो चुकी है. मौत से कुछ ही घंटे पहले वे यूक्रेन में थे और जेलेंस्की से मिल रहे थे. यहां उन्होंने एक ड्रोन फैक्ट्री का दौरा किया, लेकिन रूस ने इस फैक्ट्री को ही उड़ा दिया. इसके कुछ ही घंटे बाद अमेरिका से उनकी मौत की खबर आई.

ग्राहम अमेरिकी विदेश नीति के हॉकीश चेहरे के रूप में जाने जाते थे. वे यूक्रेन को मजबूत समर्थन देते थे और रूस को रोकने के लिए निरंतर अमेरिकी सहायता की वकालत करते थे. 

भारत पर 500% टैरिफ लगाने की दी थी धमकी

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भारत में लोग लिंडसे ग्रामह को अलग वजह से जानते हैं. वे नई दिल्ली को बार-बार दी गई चेतावनियों के लिए जाने जाते थे. उन्होंने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 500% टैरिफ और दूसरे आर्थिक कदम उठाने की धमकी दी थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत व्लादिमीर पुतिन की 'वॉर मशीन' (युद्ध की मशीनरी) को चलाने में मदद कर रहा है.

मौत के बाद साजिशों की थ्योरीज

अब जब 71 वर्षीय रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम की अचानक मौत हो गई है, तो अमेरिका में सिर्फ शोक नहीं बल्कि सवालों का तूफान भी उठ खड़ा हुआ है. क्या यह सिर्फ एक प्राकृतिक मौत है, या फिर इसके पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी है? सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. 

हालांकि अब तक किसी जांच एजेंसी ने हत्या या साजिश के कोई सबूत नहीं बताए हैं. शुरुआती आधिकारिक जानकारी के अनुसार उनकी मौत महाधमनी (Aorta) के फटने से हुई, जो एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी होती है. 

मेक अमेरिका ग्रेट अगेन मूवमेंट से जुड़े कई लोगों ने उनकी मौत के समय पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यह घटना यूक्रेन के दौरे के ठीक बाद हुई, जहां ग्राहम ने रूसी तेल और गैस निर्यात पर और कड़े प्रतिबंध लगाने की अपनी मांग को फिर से दोहराया था. 

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71 साल के ग्राहम की मौत 11 जुलाई को हुई. उनके ऑफ़िस के मुताबिक, उन्हें "छोटी और अचानक बीमारी" हुई थी. बताया जाता है कि शनिवार शाम को वॉशिंगटन, DC में उनके घर पर कार्डियक अरेस्ट की सूचना मिलने पर इमरजेंसी टीम पहुची थी. वे यूक्रेन की यात्रा से लौटे थे और बताया जाता है कि उन्हें सीने में दर्द महसूस हुआ था. 

ऑनलाइन यह अटकलें तेज़ी से फैलने लगीं कि ग्राहम की हत्या रूस या ईरान ने की हो सकती है; इन अटकलों को यूक्रेन की उनकी हालिया यात्रा और ईरान की ओर से उन्हें हाल ही में मिली जान से मारने की धमकी से और बल मिला.

फॉक्स न्यूज के संवाददाता बिल मेलुगिन ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा है कि DC मेडिकल एग्ज़ामिनर ऑफ़िस की शुरुआती जांच से पता चला है कि सीनेटर लिंडसे ग्राहम (R-SC) की मौत "आर्टेरियोस्क्लोरोटिक कार्डियोवैस्कुलर बीमारी के कारण एओर्टिक डिसेक्शन" से हुई. आसान शब्दों में कहें तो इसका मतलब है कि पहले से मौजूद कार्डियोवैस्कुलर बीमारी की वजह से धमनियों के सख्त और संकरा होने से एओर्टा (शरीर की मुख्य धमनी) में चीरा या दरार आ गई.

उन्होंने कहा है कि डेथ सर्टिफिकेट को अपडेट किया जाएगा. 

पूर्व अमेरिकी न्यूक्लियर साइंटिस्ट ने कहा है कि मुझे अफसोस है,लेकिन लिंडसे ग्राहम का अचानक इस तरह गुज़र जाना बिल्कुल भी समझ में नहीं आता.

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कल ही उन्हें कैमरे पर बिल्कुल ठीक-ठाक हालत में देखा गया था. इनमें से कुछ भी समझ नहीं आ रहा.

इन अफवाहों को और बल तब मिला जब ईरानी मीडिया ने कहा, "मैं ईरान-विरोधी और युद्ध भड़काने वाले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के जहन्नुम में भेजे जाने पर ईरानी राष्ट्र को बधाई देता हूं."

FBI डायरेक्टर काश पटेल के यह कहने के बाद कि एजेंसी "स्थानीय अधिकारियों की मदद कर रही है और हर ज़रूरी संसाधन उपलब्ध कराया है," ये आशंकाएं और तेज हो गईं. 

अमेरिका की दक्षिणपंथी एक्टिविस्ट लॉरा लूमर ने अलेक्जेंडर डुगिन की बातों की ओर इशारा किया. डुगिन को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का मुख्य विचारक माना जाता है और उन्होंने पहले सीनेटर की हत्या की बात कही थी. 

लॉरा लूमन ने एक्स पर लिखा, “कल लिंडसे ग्राहम यूक्रेन में थे. और उन्होंने रूस पर और प्रतिबंध लगाने की मांग की और यूक्रेन को और अमेरिकी मदद का वादा किया.” “एक दिन बाद, लिंडसे ग्राहम की मौत हो गई इसकी जांच होनी चाहिए!”

MAGA पॉडकास्टर क्लिंट रसेल ने X पर अपने फॉलोअर्स से कहा कि वे “अपनी टिनफॉइल तैयार रखें.” उन्होंने लिखा, “ग्राहम ने कल यूक्रेन में एक ड्रोन फ़ैक्टरी का दौरा किया था. रूस ने आज उस फ़ैसिलिटी को उड़ा दिया.” उन्होंने आगे कहा: “फिर, आज रात घोषणा की गई कि ग्राहम की मौत ‘अचानक हुई बीमारी’ से हो गई है.”

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रसेल ने यह भी लिखा, “और कोई जानकारी नहीं है. मुझे लगता है कि इस बात की काफ़ी संभावना है कि रूस ने लिंडसे ग्राहम को उड़ा दिया.”

फॉक्स न्यूज़ की पूर्व प्रोड्यूसर काइली जेन क्रेमर ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स की धमकियों का ज़िक्र करते हुए कहा कि इसमें ईरान का हाथ हो सकता है. उन्होंने लिखा, "IRGC ने सिर्फ़ पांच दिन पहले ही सीनेटर लिंडसे ग्राहम को जान से मारने की धमकी दी थी. उनकी मौत की पूरी जांच होनी चाहिए."

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है क्या यह सिर्फ एक दुखद प्राकृतिक मौत थी या फिर इसके पीछे कोई और कहानी छिपी है? अभी तक उपलब्ध आधिकारिक तथ्यों के आधार पर इसे प्राकृतिक चिकित्सीय कारणों से हुई मौत माना जा रहा है. लेकिन रूस और ईरान जैसे देशों के साथ ग्राहम की तीखी राजनीतिक टकराहट ने इस मौत को सामान्य राजनीतिक घटना से कहीं बड़ा ग्लोबल घटनाक्रम बना दिया है. 
 

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