
जरा सोचिए, आप एक ऐसी कॉफी शॉप में घुसें जहां का माहौल एकदम बढ़िया है, लेकिन जैसे ही आप वॉशरूम में हाथ-मुंह धोने गए, शीशे में आपको अपना सिर्फ माथा दिखाई दिया! आप चौंककर बाहर निकले, मेट्रो पकड़ी, तो देखा कि 6 फ़ुट की लंबाई वाला बंदा भी भीड़ में खुद को 'औसत से छोटा' मानकर एक तरफ दुबका खड़ा है. मॉल के गेट हों या रेस्तरां की टेबल-कुर्सियां, ऐसा लगता है मानो पूरी दुनिया को किसी ने 10 से 15 फीसदी 'जूम' करके बड़ा बना दिया हो.
अब अगर आप सोच रहे हैं कि यह गुलिवर्स ट्रेवल्स या किसी फैंटेसी फिल्म का सेट है, तो आप गलत हैं. यह नीदरलैंड्स की सड़कों पर हर दिन दिखने वाला आम नजारा है. लंबाई के वैश्विक डेटा पर नजर डालें, तो डच पुरुषों का औसत कद लगभग 182.5 सेमी यानी 6 फुट और महिलाओं की औसत लंबाई 169 सेमी यानी 5 फुट 6.5 इंच है. कुल मिलाकर 177.1 सेंटीमीटर के औसत के साथ डच लोग लंबाई के मामले में पूरी दुनिया के बॉस बने हुए हैं.
लेकिन इस कहानी का सबसे मजेदार ट्विस्ट जानते हैं क्या है? डच लोग हमेशा से ऐसे खंभे जैसे लंबे नहीं थे! अगर आप टाइम मशीन में बैठकर 1860 के आसपास एम्सटर्डम की सड़कों पर टहल रहे होते, तो आपको हर तरफ नाटे लोग दिखाई देते. रॉयल सोसाइटी पब्लिशिंग जर्नल के ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स बताते हैं कि उस दौर में डच पुरुषों की औसत लंबाई मुश्किल से 165 सेमी यानी लगभग 5 फुट 5 इंच हुआ करती थी और वे पूरे यूरोप में सबसे छोटे कदों वाले लोगों में गिने जाते थे.
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फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि अगले 150 सालों में पासा पूरी तरह पलट गया? जहां बाकी दुनिया में औद्योगीकरण और आधुनिक रहन-सहन आने के बाद भी लोगों की हाइट एक जगह जाकर अटक गई, वहीं नीदरलैंड्स के लोगों का कद बढ़ता ही चला गया. 1860 से लेकर आज तक डच लोगों की लंबाई में औसतन 20 सेंटीमीटर यानी 8 इंच का भारी उछाल आया, जबकि इसी दौरान अमेरिकी लोगों की हाइट में सिर्फ 6 सेमी की बढ़ोतरी हुई.

वैज्ञानिकों ने जब इस 'हाइट सीक्रेट' की परतें उघेड़ीं, तो पता चला कि इसके पीछे कोई एक जादू नहीं, बल्कि तीन चीजों का जबरदस्त कॉम्बिनेशन था... खान-पान, सोशल सिस्टम और जेनेटिक्स. सबसे पहली बात तो यह है कि डच लोग दूध, पनीर और मक्खन के जबरदस्त शौकीन होते हैं. वहां कहावत तो यहां तक है कि डच लोग पानी से ज्यादा डेयरी प्रोडक्ट्स गटक जाते हैं. बचपन से ही आहार में मिले भरपूर प्रोटीन और कैल्शियम ने उनकी हड्डियों की नींव को चट्टान जैसा मजबूत बना दिया.
दूसरी वजह है नीदरलैंड्स का सोशल ढांचा और हेल्थकेयर. वहां सरकार ने अमीरी-गरीबी के फर्क को बच्चों की सेहत के बीच नहीं आने दिया. हर बच्चे को पैदा होते ही एक जैसी बेहतरीन स्वास्थ्य देखभाल और पौष्टिक खाना मिला. जब बचपन में बीमारियां कम हुईं और सही पोषण मिला, तो शरीर को अपनी पूरी ग्रोथ हासिल करने का खुला मौका मिल गया.
तीसरा और सबसे दिलचस्प कारण था पार्टनर चुनने का तरीका. स्टडी के मुताबिक, डच समाज में लंबे पुरुषों और महिलाओं को शादी या पार्टनर के मामले में पहली पसंद माना गया. आंकड़ों से यह भी साफ हुआ कि लंबे डच पुरुषों के बच्चे भी ज्यादा हुए, जिससे लंबे कद वाले जीन्स पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ते गए और पूरे मुल्क का औसत कद ऊपर उठ गया.
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अब जब किसी देश में रहने वाले लोग ही इतने लंबे हो जाएंगे, तो शहर को भी तो उनके हिसाब से ढलना ही पड़ेगा! एम्सटर्डम हो या उट्रेच, वहां की सरकारों ने बिल्डिंग कोड्स बदलकर दरवाज़ों की ऊंचाई बढ़ा दी ताकि लोग बिना सिर टकराए निकल सकें. सड़कों पर दौड़ने वाली साइकिलों के फ्रेम आम देशों से काफी ऊंचे होते हैं, और बसों, ट्रेनों से लेकर होटलों तक में 2.1 मीटर लंबे स्पेशल गद्दे लगाए जाते हैं.
हालांकि, डच स्टैटिस्टिक्स ब्यूरो की ताजा रिपोर्ट बताती है कि अब नई पीढ़ी में यह हाइट बढ़ने की रफ्तार थोड़ी धीमी हो गई है. इसकी वजह खान-पान में प्रोसेस्ड फूड का शामिल होना और बाहर से आ रहे प्रवासियों के कारण आनुवंशिक विविधता आना माना जा रहा है. लेकिन वजह चाहे जो भी हो, आज भी जब आप एम्सटर्डम के किसी कैफे में बैठकर विशाल साइकिलों पर फर्राटा भरते डच नागरिकों को देखते हैं, तो दिल से एक ही बात निकलती है- दुनिया में चाहे सब कुछ थम जाए, लेकिन लंबे लोगों के इस मुल्क का आसमान छूता कद हमेशा दुनिया को हैरान करता रहेगा!